D D Lapang Dies: 'चायवाले' CM का निधन, 4 बार संभाली राज्य की कमान, दिलचस्प है मजदूर से मुख्यमंत्री तक का सफर
डोनवा डेथवेल्सन लपांग Former CM D.D. Lapang Passes Away: मेघालय की राजनीति में आज एक युग का अंत हो गया। दिग्गज राजनेता और चार बार के मुख्यमंत्री डोनवा डेथवेल्सन लापांग का 93 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनका जीवन एक साधारण व्यक्ति के असाधारण बनने की कहानी है, जिसने अपनी मेहनत और लगन से राज्य की राजनीति में एक अमिट छाप छोड़ी। उनके निधन पर पूरा मेघालय शोकाकुल है और सोमवार को उन्हें राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जाएगी।
क्या कोई सड़क मजदूर से मुख्यमंत्री बन सकता है? मेघालय की राजनीति में यह अकल्पनीय सफर डी.डी. लापांग ने पूरा किया था। उनका जीवन सिर्फ एक राजनीतिक करियर नहीं, बल्कि दृढ़ता, सादगी और जनता के प्रति समर्पण की एक अविश्वसनीय कहानी है। उनका जाना मेघालय के लिए एक युग का अंत है, लेकिन उनका जीवन आज भी लाखों लोगों को प्रेरणा देता है।

कैसे हुआ पूर्व मुख्यमंत्री का निधन?
डी.डी. लापांग पिछले काफी समय से उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे। उनके परिवार के अनुसार, उन्होंने शुक्रवार शाम अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर सुनते ही मेघालय के लोगों और नेताओं में शोक की लहर दौड़ गई।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पूर्व सांसद और कांग्रेस नेता विन्सेंट एच पाला भी अस्पताल में मौजूद थे जब लापांग ने अंतिम सांस ली। आम जनता से लेकर राजनेताओं तक, सभी ने अस्पताल पहुंचकर और बाद में उनके नोंगपो स्थित आवास पर पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
साधारण पृष्ठभूमि से राजनीतिक शिखर तक
10 अप्रैल, 1932 को जन्मे लापांग का राजनीतिक सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है। उन्होंने अपनी जिंदगी की शुरुआत एक साधारण व्यक्ति के रूप में की थी। एक समय था जब वे अपनी मां के साथ चाय की दुकान चलाने, मजदूर, शिक्षक और सरकारी कर्मचारी के रूप में भी काम करते थे।
राजनीतिक यात्रा
इन शुरुआती अनुभवों ने उन्हें जमीन से जोड़े रखा। उन्होंने अपनी राजनीतिक यात्रा 1972 में नोंगपो सीट से एक निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में विधानसभा चुनाव जीतकर शुरू की। बाद में वे कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए और एक मजबूत नेता के रूप में उभरे।
चार बार के मुख्यमंत्री और Ri-Bhoi के निर्माता
अपने राजनीतिक करियर में लापांग ने चार बार मेघालय के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला। उन्होंने 1992 से 2010 के बीच अलग-अलग समय पर यह पद संभाला। एक अनुभवी और कुशल राजनेता के रूप में, उन्हें Ri-Bhoi जिले के निर्माण के वास्तुकारों में से एक के रूप में भी याद किया जाता है, जो 1992 में अस्तित्व में आया था।
कांग्रेस के प्रति अपनी आजीवन प्रतिबद्धता के बावजूद उन्होंने 2018 में नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) में शामिल होकर राज्य सरकार के मुख्य सलाहकार के रूप में कार्य किया। उनके निधन से मेघालय के राजनीतिक और सामाजिक जीवन में एक बड़ा शून्य पैदा हो गया है।
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