SM Krishna News: बेंगलुरु को 'भारत की सिलिकॉन वैली' बनाने वाले SM कृष्णा का निधन, जानिए कैसा था राजनीतिक सफर?
Former Karnataka CM SM Krishna Passes Away: कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और भारत के राजनीतिक इतिहास की एक मजबूत हस्ती, सोमनहल्ली मल्लैया कृष्णा (एस.एम. कृष्णा), का मंगलवार सुबह (10 दिसंबर 2024) निधन हो गया। 92 वर्षीय दिग्गज राजनेता काफी समय से बीमार थे। उन्होंने अपने आवास पर तड़के 2:45 बजे अंतिम सांस ली। उनके पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए मद्दुर ले जाया जा सकता है।
उन्हें'ब्रांड बेंगलुरु' को वैश्विक मानचित्र पर लाने और इसे तकनीकी हब बनाने का श्रेय दिया जाता है। सोमनहल्ली मल्लैया कृष्णा के परिवार में उनकी पत्नी प्रेमा और दो बेटियां शांभवी और मालविका हैं। कृष्णा को 2023 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके छह दशक लंबे राजनीतिक करियर और देश के विकास में उनके योगदान के लिए दिया गया। उनकी मृत्यु से न केवल कर्नाटक, बल्कि पूरे भारत ने एक ऐसा नेता खो दिया, जिसने राजनीति को विकास का जरिया बनाया।

एक शानदार राजनीतिक जीवन का सफर
कृष्णा ने 1962 में राजनीति में कदम रखा, जब उन्होंने मद्दुर से अपना पहला चुनाव निर्दलीय के रूप में जीता। इसके बाद उन्होंने लोकसभा में मांड्या क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। उनका मुख्यमंत्री कार्यकाल (1999-2004) बेंगलुरु और कर्नाटक के विकास के लिए यादगार रहा। राजनीति में लंबी पारी पर एक नजर...
- 1972-77: वाणिज्य, उद्योग और संसदीय मामलों के मंत्री
- 1980: लोकसभा सदस्य और केंद्र में उद्योग राज्य मंत्री
- 1989: कर्नाटक विधानसभा के अध्यक्ष
- 1992: कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री
- 1999-2004: कर्नाटक के मुख्यमंत्री
कर्नाटक का गौरव: बेंगलुरु को बनाया 'सिलिकॉन वैली'
एस.एम. कृष्णा को कर्नाटक के तकनीकी और आईटी विकास के लिए हमेशा याद किया जाएगा। उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में बेंगलुरु को 'भारत की सिलिकॉन वैली' बनाने में अहम भूमिका निभाई। उनके नेतृत्व में आईटी सेक्टर में अभूतपूर्व विकास हुआ, जिससे बेंगलुरु वैश्विक मानचित्र पर एक प्रमुख तकनीकी हब बन गया।
उन्होंने बैंगलोर एजेंडा टास्क फोर्स (BATF) की स्थापना की, जिसमें नंदन नीलेकणी जैसे बड़े नाम जुड़े। यह टास्क फोर्स बेंगलुरु के बुनियादी ढांचे को सुधारने और आईटी सेक्टर को बढ़ावा देने पर केंद्रित थी। आईटी इंडस्ट्री के विशेषज्ञों का मानना है कि उनके प्रयासों से न केवल युवाओं को रोजगार मिला, बल्कि बेंगलुरु दुनिया में कैलिफोर्निया की सिलिकॉन वैली का विकल्प भी बन गया।
राजनीति में उतार-चढ़ाव
कृष्णा ने 2017 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा। हालांकि, वे राजनीति में कम सक्रिय हो गए थे। उन्होंने महाराष्ट्र के राज्यपाल के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं। उन्होंने एक साक्षात्कार में स्वीकार किया था कि 2004 में विधानसभा भंग करना और महाराष्ट्र के राज्यपाल का पद स्वीकार करना उनके राजनीतिक जीवन की बड़ी भूल थी। उनका मानना था कि अगर वे राज्य की राजनीति में बने रहते, तो बेंगलुरु के बुनियादी ढांचे को और बेहतर बना सकते थे।
संकटों में भी मजबूत नेतृत्व
कृष्णा का मुख्यमंत्री कार्यकाल कई चुनौतियों से भरा था।
- डॉ. राजकुमार का अपहरण: कुख्यात चंदन तस्कर वीरप्पन द्वारा किए गए इस अपहरण ने राज्य में भारी अशांति फैला दी।
- कावेरी जल विवाद: उनके समय में इस विवाद को लेकर कई हिंसक प्रदर्शन हुए।
इन चुनौतियों के बावजूद, कृष्णा ने बेंगलुरु के आईटी विकास और सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के जरिए राज्य को आर्थिक मजबूती दी।
प्रेरणादायक व्यक्तित्व और शौक
कृष्णा न केवल एक कुशल राजनीतिज्ञ थे, बल्कि एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व भी थे।
- टेनिस प्रेमी: उन्हें टेनिस खेलना और देखना बहुत पसंद था। वे ऑस्ट्रेलियाई टेनिस खिलाड़ी फ्रैंक सेडगमैन के बड़े प्रशंसक थे और विंबलडन देखने के लिए लंदन जाते थे।
- फैशन के शौकीन: कपड़ों का डिजाइन करना उनका शौक था।
- अंतरराष्ट्रीय शिक्षा: उन्होंने डलास और जॉर्ज वाशिंगटन यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की और अमेरिका में राष्ट्रपति कैनेडी के चुनाव अभियान का हिस्सा भी बने।
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