युद्ध सिर पर और हथियारों की धार तेज कर रही है कांग्रेस

गौर हो कि राहुल ने अभी कुछ रैलियों में कहा था कि मैं गरीबों और आदिवासियों का प्रतिनिधित्व करने वाले लोगों को सांसद और विधायक बनाना चाहता हूं, जिससे कि पिछड़े और गरीब लोगों की बातों को सुना जाए। कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि राहुल के भाषण जनता में पार्टी के प्रति उत्साह नहीं पैदा कर रहे हैं, बल्कि पार्टी के लिए सवाल पैदा कर रहे हैं कि पिछले दस वर्षों से पार्टी सत्ता में है लेकिन तब ऐसा क्यों नहीं हुआ।
इस पर कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित का कहना है कि राहुल चुनावी क्षेत्रों में जा रहे हैं और उनके भाषणों से पता चलता है कि वह चुनाव को लेकर बेहद गंभीर हैं। जयराम रमेश की राहुल से नाराजगी की वजह उनका कांग्रेस को मजबूत करने की कोशिश में 2014 के चुनावों में जीत को नजरअंदाज करना है। सूत्रों का कहना है कि बिहार में नीतीश कुमार की जदयू के भाजपा से अलग होने के बाद उन्होने चुनावी लाभ लेने के लिए राजद के साथ गठबंधन करने से भी इनकार कर दिया था। अत: पार्टी नेताओं की चिंता लाजिमी है कि राहुल चुनाव के नजदीक आने के बावजूद ऐसे काम करना चाहते हैं जो कि काफी पहले किये जाने चाहिए थे।
कांग्रेस में व्याप्त अदंरूनी भीतर घात पर भाजपा प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है कि कांग्रेस की नजर 2014 के चुनावों पर नहीं है, यह सब इस बात की ओर इशारा करता है कि उन्होने हार मान ली है।












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