मणिपुर हिंसा में 'विदेशी हाथ'! गवर्नर अनुसुइया उइके ने इस वजह से किया इशारा
मणिपुर की गवर्नर अनुसुइया उइके ने शुक्रवार को कहा है कि हो सकता है कि कुछ 'शत्रुतापूर्ण तत्वों' ने प्रदेश की मौजूदा अशांति को हवा देने के लिए सीमा पार से घुसपैठ कर ली हो। राज्य में जातीय तनाव के बीच राज्यपाल का यह बयान बहुत ही महत्वपूर्ण है।
गवर्नर ने गुरुवार को हिंसा में बाहरी ताकतों के शामिल होने की ओर इशारा किया था। इंफाल के राजभवन की ओर से शुक्रवार को बायन जारी कर कहा गया है कि राज्यपाल ने इंटेलिजेंस इनपुट के आधार पर यह बयान दिया था।

'शत्रुतापूर्ण तत्वों' की मौजूदगी की ओर इशारा
राजभवन की ओर से जारी बयान में कहा गया है, 'यह स्पष्ट किया जाता है कि गवर्नर का बयान इंटेलिजेंस इनपुट पर आधारित था, जिसमें कुछ 'शत्रुतापूर्ण तत्वों' की मौजूदगी की ओर इशारा है, जो हो सकता है कि सीमा पार से मणिपुर की मौजूदा अशांति को भड़काने के लिए घुसपैठ कर गए हों।'
ऐसे खतरे से निपटने का दिया भरोसा
गवर्नर ने मणिपुर के लोगों को 'पक्का भरोसा' दिया है कि सुरक्षा बलों को इस चुनौती के बारे में पता है और किसी भी ऐसे खतरे को समाप्त करने के लिए नियमित रूप से संयुक्त अभियान चला रहे हैं।'
सीएम बीरेन सिंह ने भी बाहरी ताकतों के हाथ होने की आशंका जताई थी
हाल ही में मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने भी हिंसा में बाहरी ताकतों के हाथ होने की ओर इशारा किया था। उन्होंने कहा था कि देश मणिपुर में म्यांमार के साथ 398 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है। चीन भी पास में ही है। ऐसे में व्यापक सुरक्षा तैनाती के बावजूद घुसपैठ की चुनौती बनी रह सकती है।
जांच आयोग ने भी शुरू कर दी है छानबीन
बहरहाल, अच्छी बात ये है कि शुक्रवार को लगातार तीसरे दिन मणिपुर में शांति बनी रही। इसके साथ ही हिंसा की न्यायिक जांच भी तीन सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग के पहुंचने के साथ शुरू हो चुकी है। शुक्रवार को जांच आयोग के अध्यक्ष और गुवाहाटी हाई कोर्ट के रिटायर्ड चीफ जस्टिस अजय लांबा की अगुवाई में सदस्यों ने चुराचांदपुर का दौरा किया। एक दिन पहले उन्होंने इंफाल के कुछ राहत कैंपों का भी दौरा किया था।
जांच आयोग ने दोनों जगहों पर राहत कैंपों में रह रहे लोगों से बातचीत की और उनका हाल जाना। इस बीच नागालैंड सरकार ने आधार पंजीकरण करने वाले अधिकारियों और एजेंसियों से कहा है कि इससे जुड़ी सारी प्रक्रिया को पालन करते हुए, सभी जरूरी दस्तावेजों की सही तहर से पड़ताल की जाए। ऐसा इस वजह से किया गया है, क्योंकि मणिपुर से विस्थापित हुए कुछ लोगों की ओर से जो नागालैंड के विभिन्न क्षेत्रों में अस्थायी तौर पर रह रहे हैं, अपने आधार डिटेल में नागालैंड के अस्थाई लोकेशन के हिसाब से बदलाव की मांग किए जाने की जानकारी मिलने का दावा किया गया है।












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