सर्जिकल स्ट्राइक की रात चांद ने भी दिया था भारतीय सेना का साथ
नई दिल्ली। गुरूवार की रात पाकिस्तान की सीमा में भारत की सीमा ने जाकर आतंकियों पर हमले के लिए काफी तैयारी की थी, तमाम हथियारों और हैलीकॉप्टरों के साथ उस रात चांद ने भी भारत की सेना का साथ दिया था।

गुरूवार रात को भारतीय कमांडो पीओके में गए थे और फिर अपने ऑपरेशन में सफल होने के बाद दिन का उजाला फैलने से पहले ही अपनी सीमा में भी आ गए। आखिरी पाकिस्तानी सेना को कैसे पता नहीं चला, ये सवाल कई लोगों के मन में है।
इस ऑपरेशन से जुड़े अधिकारियों ने बताया है कि कैसे ये ऑपरेशन अंजाम दिया गया, बावजूद इसके कि पाक की सेनी भी सरहदों पर पर मुश्तैद थी।
गुरूवार की रात भंयकर काली रात थी, चांद पूरी तरह छुपा हुआ था। पूरे इलाके में भयंकर अंधेरे ने भारतीय कमांडो का इस ऑपरेशन में बहुत साथ दिया।
इस ऑपरेशन के तहत सीमा पर बुधवार दिन से ही कब क्या हुआ, आइए आपको बताते हैं। पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम देने वाले कमांडो दस्ते ने 7 आतंकी लॉन्च पैड या इसके आसपास से सटे क्षेत्र को निशाना बनाया।
पाक की फौज का ध्यान भटकाने को की थी भारतीय सेना ने फायरिंग
कमांडो करीब दो किलोमीटर तक पीओके के अंदर तक गए और एक साथ ही सभी कैंपों पर हमला बोला। इस ऑपरेशन की इजाजत बुधवार दोपहर ही दी गई, वैसे सेना की तैयारी में कई दिन से लगी थी। कहां-कहां हमला होना है, ये सब तय था।
सीमा से लगे सेक्टरों पर पाकिस्तानी सैनिकों का ध्यान भटकाने के लिए भारतीय सेना ने फायरिंग की। फायरिंग के बीच कमांडो अपने लक्ष्य पर लगभग रात के पौने दो बजे पहुंचे।
कमांडो ने हमला करते हुए आतंकियों के पांच कैंप तबाह कर दिए। इसमें आतंकियों की भी मौत हुई। वहीं पाक सेना का ध्यान भारतीय सेना की तरफ से होपाक को घर में घुसकर मारने पर क्या बोले गदर के तारा सिंह रही फायरिंग और भारतीय सीमा में उड़ रहे हैलीकॉप्टरों पर लगा रहा।
कितने आतंकी मारे गए, इस सवाल पर सेना के सूत्रों का कहना है कि एक कैंप में अमूमन 10 आतंकी रहते हैं। उनके साथ उनको मदद करने वाले लोग भी कैंप में रहते हैं।
कमांडो ने रात के अंधेरे का फायदा उठाया
भारतीय पैरा कमांडो ने स्वीडिश डिजाइन वाली कार्ल गुस्टव रॉकेट लॉन्चर और कंधे पर रखकर चलाई जाने वाली राइफल जिसे दो सैनिकों की टीम ऑपरेट करती है, के जरिए इस ऑपरेशन को अंजाम दिया।
सूत्रों के मुताबिक, पाक सेना के पास ऐसे यंत्रों की कमी है, जिससे वो घने अंधेरे में देख सकें। जबकि भारत ने इस ऑपरेशन के लिए कुछ ऐसे यंत्रों का इस्तेमाल किया, जो रात में भी दूर तक देख सकें।
सुबह होने से पहले वे भारतीय सीमा में वापस लौट आए। हालांकि सेना ने जम्मू और पठानकोट के एयर फोर्स बेस जैसे कई स्थानों को हाई अलर्ट पर रखा था, जो किसी चूक की स्थिति में कमांडो की मदद करते।












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