दीदी का भी सपना 'मोदी बनें प्रधानमंत्री'

यह भी ध्यान देने योग्य है कि बंगाल को स्पेशल पैकेज देने के लिए ममता कई बार प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ मीटिंग कर चुकी हैं लेकिन उन्हें अपने मकसद में कामयाबी नहीं मिली अत: उनका भाजपा की तरफ झुकाव अप्रत्याशित नहीं है, इसके अलावा कल आये बजट में भी बंगाल के लिए कुछ नहीं था। ऐसे में जो विश्लेषक कह रहे थे कि भाजपा की सांप्रदायिक पहचान होने के कारण तृणमूल कांग्रेस उसके साथ गठबंधन नहीं करेगी, उनका आकलन गलत हो सकता है। हालांकि केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश और बिहार को जरूर पैकेज जारी किये, जिसके बाद ममता के लिए भाजपा का दामन थाम लेने से बेहतर और क्या हो सकता है?
देश की राजनीति का एक सच है कि भले ही क्षेत्रीय पार्टियां राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की बात करती है, पर आर्थिक मदद के लिए वह केंद्र पर ही निर्भर हैं। ममता बनर्जी ने भी कई बार कहा है कि केंद्र में मजबूत सरकार हेतु टीएमसी ही भाजपा, कांग्रेस का विकल्प है, जबकि सच है कि बंगाल में लंबे समय तक सत्ता में बने रहने के लिए ममता को केंद्र से मदद की जरूरत है।
ममता धीरे धीरे एनडीए के नजदीक जा रही हैं क्योंकि उन्हें भी पता है कि अगर उन्होने चुनाव के पहले भाजपा का समर्थन किया तो पार्टी की सीटें बंगाल में घट सकती हैं, वहीं अगर लोकसभा चुनाव 2014 में पार्टी अधिक सीटें जीतने में कामयाब रहती है तो केंद्र में भी उसकी सशक्त उपस्थिति होगी और वह केंद्र से भी अपनी शर्तों पर आर्थिक सहायता प्राप्त कर सकेंगी।












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