चारा घोटाला में सजा सुनाने से पहले लालू यादव से बोले जज, आपके लिए कई कॉल आए हैं
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नई दिल्ली। देवघर चारा घोटाले में राजद प्रमुख और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को गुरुवार को कोर्ट में पेश किया गया। लालू यादव को इस मामले में सजा का ऐलान बुधवार को होना था लेकिन पहले बुधवार और फिर गुरुवार को सजा नहीं सुनाई जा सकी। चारा घोटाले में दोषी करार लालू प्रसाद यादव के खिलाफ अब रांची की सीबीआई अदालत सजा का ऐलान शुक्रवार को करेगी। वहीं इस दौरान कोर्ट में सीबीआई की विशेष अदालत के जज ने लालू यादव से ही उनके लिए कई कॉल आने की बात कही। जज ने लालू यादव से कहा कि उनको लेकर कई कॉल मिल रहे हैं लेकिन वो बेफिक्र रहें, वो किसी कॉल के नहीं कानून के हिसाब से ही फैसला देंगे क्योंकि वो सिर्फ कानून को मानते हैं।

लालू और 15 और लोगों को सुनाई जाएगी दवा
लालू यादव के साथ अन्य 15 लोगों को भी इस मामले में कोर्ट ने दोषी करार दिया है। सजा का ऐलान बुधवार को होना था लेकिन एक वरिष्ठ वकील की मृत्यु के चलते दोपहर 1.30 बजे के बाद वकीलों ने शोक सभा का आयोजन किया और किसी भी तरह के कामकाज को नहीं करने का ऐलान किया था, जिसके चलते सजा का ऐलान बुधवार को टाल दिया गया था। बुधवार को लालू प्रसाद यादव सीबीआई कोर्ट पहुंचे थे, जहां उनके समर्थकों की भारी भीड़ मौजूद थी। रांची की विशेष सीबीआई अदालत को ये फैसला सुनाना था। लालू यादव बीते 23 दिसंबर से रांची की बिरसा मुंडा जेल में बंद हैं।

गुरुवार को भी नहीं हुआ सजा का ऐलान
गुरुवार को A से K नाम वाले आरोपियों की सजा सुनाई गई। A से K लेटर वाले चार अभियुक्त हैं, इसलिए लालू की सजा का ऐलान नहीं गुरुवार को भी नहीं हुआ। शुक्रवार को उनको सजा का ऐलान होगा। लालू यादव को कल से वीडियो कांफ्रेंसिंग के दरिए सजा सुनाई जाएगी। केस में लालू समेत 16 लोगों को आज सजा सुनाई जानी है। अदालत ने लालू यादव को धोखाधड़ी, साजिश और भ्रष्टाचार के आरोप में आईपीसी की धारा 420, 120 बी और पीसी एक्ट की धारा 13( 2) के तहत दोषी पाया है।

ये है चारा घोटाले का पूरा मामला
यह मामला 1994 से 1996 के बीच देवघर जिला कोषागार का है जहां से फर्जी तरीके से कोष निकाला गया था। 21 साल पुराने इस मामले में सीबीआई ने शुरु में 34 लोगों को आरोपी बनाया था। इसमें 11 की मौत ट्रायल के दौरान हो गई। दो आरोपी सरकारी गवाह बन गए और निर्णय के पूर्व ही अपना दोष स्वीकार कर लिया। सीबीआई ने इस मामले में देवघर कोषागार से फर्जी बिल बना कर राशि की निकासी करने का आरोप लगाया था। लालू पर आरोप था कि उन्हे इस मामले की पूरी जानकारी थी बावजूद इसके उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की।












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