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वित्त मंत्री सीतारमण ने जिसकी कविता पढ़ी उनके बेटे ने Article-370 हटाने के बारे में क्या कहा ? जानिए

नई दिल्ली- इस साल वित्त मंत्री के बजट भाषण में अपनी कविता पढ़े जाने की वजह से तीन दशक बाद कश्मीरी कवि पंडित दीनानाथ कौल सुर्खियों में आ गए हैं। कौल ने उस वक्त अपनी लेखनी से कश्मीर और पूरे देश के हाल बयां करने की कोशिश की थी, जब देश संकट की दौर से गुजर रहा था। उनकी कविताओं में आजादी से पहले और उसके बाद पाकिस्तानी हरकतों के दौरान के हालातों को जगह मिली है। लेकिन, पिछले करीब 6 महीनों के बीच आर्टिकल-370 हटने के बाद से कश्मीर का राजनीतिक मानचित्र बदल दिया गया है। वह न तो पूर्ण राज्य रह गया है और उ उसके पास कोई विशेषाधिकार रह गया है। उसका अपना अलग से कोई संविधान भी नहीं है और नहीं तिरंगे के अलावा कोई और झंडा ही बच गया है। ऐसे में पंडित दीनानाथ कौल का परिवार बदले हालातों के बारे में क्या सोचता है, ये जानना जरूरी है।

 'आर्टिकल-370 हमेशा से अस्थाई प्रावधान था'

'आर्टिकल-370 हमेशा से अस्थाई प्रावधान था'

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को लोकसभा में बजट पेश करते वक्त कश्मीर के कवि पंडित दीनानाथ कॉल 'नादिम' की कश्मीरी कविता का हिंदी अनुवाद पढ़ा था। इस वाक्ये से पंडित कौल का परिवार बहुत ही खुश है कि पंडित जी के निधन के तीन दशक बाद भी देश में उनके शब्दों की अहमियत बरकरार है। पंडित दीनानाथ कौल के छोटे बेटे शांतिवीर कौल दिल्ली से सटे गुड़गांव में रहते हैं। उन्होंने साफ कहा है कि जम्मू-कश्मीर में पहले जो आर्टिकल-370 का प्रवाधधान था, संविधान के तहत वह पूरी तरह 'अस्थायी प्रावधान' था। हालांकि, उन्होंने ये भी कहा है कि 5 अगस्त, 2019 को आर्टिकल 370 हटाने के बाद वहां जिस तरह की पाबंदियां लगाई गईं, उससे क्षेत्र के लोगों को बहुत ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ा। टीओआई को दिए एक इंटरव्यू में शांतिवीर कौल ने कहा कि, 'आर्टिकल-370 हमेशा से एक अस्थाई प्रावधान था। इसे किसी भी तरह निष्क्रिय होना ही थी। लेकिन, कश्मीर में लगाई गई पाबंदियों से लोगों को बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ा।'

आम बजट में कश्मीर पर ध्यान देने पर जताई खुशी

आम बजट में कश्मीर पर ध्यान देने पर जताई खुशी

लेकिन, इस साल के बजट में केंद्र शासित प्रदेश जम्मू एवं कश्मीर और लद्दाख के लिए जो फंड आवंटित किए गए हैं, उससे कौल परिवार बहुत ही गदगद है। उनका कहना है कि इसमें जम्मू-कश्मीर के संपूर्ण विकास का ध्यान रखा गया है, जो कि स्वागत योग्य कदम है। 67 वर्षीय शांतिवीर खुद एक मीडिया प्रोफेशनल हैं। गौरतलब है कि इस साल के बजट में जम्मू एवं कश्मीर के लिए 30,757 करोड़ रुपये और लद्दाख के लिए 5,958 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। बता दें कि वित्त मंत्री ने शनिवार को कश्‍मीरी भाषा में उनकी जिस कविता को पढ़ा और फिर उसका हिंदी में अनुवाद सुनाया था वह दीनानाथ कौल ने डोगरा समुदाय के लोगों को प्रोत्‍साहित करने के मकसद से लिखा था। उस कविता का हिंदी अनुवाद सीतारमण ने ये सुनाया था, 'हमारा वतन खिलते हुए शालीमार बाग जैसा, हमारा वतन डल झील में खिलते हुए कमल जैसा, नौजवानों के गर्म खून जैसा, मेरा वतन, तेरा वतन, हमारा वतन, दुनिया का सबसे प्‍यारा वतन।'
(पहली तस्वीर प्रतीकात्मक और दूसरी तस्वीर में शांतिवीर कौल के बड़े भाई अहिंसा कौल और उनकी पत्नी)

हरिवंश राय बच्चन ने किया था कविता का अनुवाद

हरिवंश राय बच्चन ने किया था कविता का अनुवाद

दीनानाथ कौल के बड़े बेटे अंहिंसा कौल ने उनकी इस कविता के बारे में और विस्तार से जानकारी दी है। उनके मुताबिक उनके पिता ने 25 जनवरी, 1957 को दूसरे ऑल इंडिया रेडियो कवि सम्मेलन में इसे पढ़ा था। उस कार्यक्रम में देश के पहले उपराष्ट्रपति डॉक्टर एस राधाकृष्णन भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि, 'कविता का हिंदी अनुवाद हरिवंश राय बच्चन ने किया था। ' 71 साल के अहिंसा कौल रिटायर्ड इंजीनियर हैं। दीनानाथ कौल को उनके निधन से दो साल पहले 1986 में साहित्य अकादमी पुरस्कार दिया गया था। जब लोकसभा में वित्त मंत्री ने उनकी कविता पढ़ी तो उनके परिवार के पास बधाई भरे फोन आने शुरू हो गए थे।

कश्मीर में अब सिर्फ 25 नेता हिरासत में

कश्मीर में अब सिर्फ 25 नेता हिरासत में

इस बीच पिछले साल 4-5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर में हिरासत में लिए गए राजनीतिक बंदियों में से अब सिर्फ 25 को ही रोक कर रखा गया है। मंगलवार को जम्मू एवं कश्मीर सरकार ने दो और बंदियों को रिहा कर दिया, जिसमें पीडीपी के एमएलए ऐजाज अहमद मीर और ट्रेड यूनियन नेता और कारोबारी शकील अहमद कलंदर भी शामिल हैं। ये दोनों पिछले 6 महीने से ज्यादा वक्त से हिरासत में थे। जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने अब तक विभिन्न राजनीतिक दलों के एक दर्जन से ज्यादा मध्य स्तरीय राजनेताओं और दो ट्रेड यूनियन नेताओं को रिहा किया है। अब जो राजनीतिक बंदी रह गए हैं, वे श्रीनगर के एमएलए होस्टल में बंद हैं। इनके अलावा पूर्ववर्ती राज्य के तीन पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती की हिरासत भी बरकरार है।

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