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जोर तो बहुत लगाया लेकिन फेल रहे, ये हैं 2017 के फ्लॉप 'पॉलिटिकल सितारे'

By Vikashraj Tiwari
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नई दिल्ली। साल 2019 में देश की राजनीति में बड़े बदलावों के तौर पर देखा जाएगा। इस साल में में बड़े से बड़े दिग्गजों को मुंह की खानी पड़ी तो वहीं कई दिग्गजों ने अपने जीत का परचम लहराया। देश के सबसे बड़े राज्य उत्तरप्रदेश से लंबे समय से चली आ रही सपा-बसपा संस्कृति का अंत हुआ और बीजेपी प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में आई। इस साल राजनीतिक कद के लिए बाप और बेटे की लड़ाई तक देखी गई। देश मे जयललिता जैसी दिग्गज राजनेता को खोया। इस साल में कई राजनेता तो सुपरहिट हुए तो कई बुरी तरह फ्लॉप हुए। हम आपको 2017 के फ्लॉप राजनेताओं की कहानी बता रहे हैं।

शरद यादव की राज्यसभा सदस्यता तक चली गई

शरद यादव की राज्यसभा सदस्यता तक चली गई

कभी देश की राजनीति के केंद्र में रहे शरद यादव के लिए साल 2017 कई मायनों में अच्छा नहीं रहा। इस साल के अंत उन्हें अपनी राज्यसभा सदस्यता तक गंवानी पड़ी। इतना ही नहीं बिहार के सीएम नीतीश कुमार से टक्कर लेने वाले शरद यादव को जेडीयू से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। फिर बाद में उन्होंने जेडीयू पर दावा ठोका लेकिन उसमें भी फेल रहे और चुनाव आयोग ने उनकी मांगों को सिरे से नकार दिया। दरअसल बिहार में लालू यादव के साथ चल रही महागठबंधन की सरकार से बाहर होकर नीतीश कुमार ने एनडीए के साथ मिलकर सरकार बना ली जिस वजह से शरद यादव नीतीश कुमार खफा हो गए और नीतीश के खिलाफ मोर्चा खोल दिया लेकिन इस लड़ाई में शरद यादव फेल साबित हुए लेकिन हां समय- समय पर शरद यादव को आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव का साथ मिलता रहा। संभव है शरद यादव और लालू यादव मिलकर देश की राजनीति में कुछ नया खेल करने की कोशिश करें। दोनों मिलकर नए समीकरण तलाशने की कोशिश में लगे हुए हैं।

लालू पर भारी पड़ा साल 2017

लालू पर भारी पड़ा साल 2017

आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के लिए साल 2017 अच्छा नहीं रहा। बिहार में लालू यादव की पार्टी सरकार में थी लेकिन वक्त का पहिया ऐसा घुमा की आरजेडी सरकार से बाहर हो गई। नीतीश कुमार ने एनडीए के साथ मिलकर सरकार बना ली। लालू यादव के दोनों बेटे जो बिहार में मंत्री थे अचानक सड़क पर संघर्ष करने को मजबूर हो गए। उधर रेलवे टेंडर घोटाले में आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के पटना में स्थित 3 एकड़ की बेनामी जमीन को प्रवर्तन निदेशालय ने जब्त कर लिया। साल 2017 में लालू यादव के ठिकानों पर रेड पड़ी। इतना ही पूरे लालू परिवार और उनके करीबियों को सीबीआई और ईडी के सामने कई मामलों में पेश होना पड़ा। लालू की मुश्किलें अभी भी कम होने का नाम नहीं ले रही हैं।

तेजस्वी यादव ने गंवाई मंत्री पद

तेजस्वी यादव ने गंवाई मंत्री पद

साल 2017 तेजस्वी यादव को भी रास नहीं आई। तेजस्वी यादव बिहार के उप मुख्यमंत्री के तौर पर काम कर रहे थे और अपनी समझ से पार्टी का कुनबा भी बढ़ा रहे थे। कहते है वक्त बदलते देर नहीं लगती है। तेजस्वी का मंत्री पद चला गया इतना ही नहीं वो सड़क पर संघर्ष करने को मजबूर हो गए। तेजस्वी की गाड़ी अच्छी चल रही थी लेकिन नीतीश कुमार के एक्शन से सब कुछ धड़ाम से गिर गया। तेजस्वी यादव करप्शन के खेल में फंस गए उनके ऊपर मुकदमा दर्ज हुआ है उनको सीबीआई के सामने भी पेश होना पड़ा है। अभी मामले की जांच चल ही रही है। इतना ही नहीं उनकी बड़ी बहन और सांसद मीसा भारती को लेकर जांच चल रही है। तेजस्वी समेत पूरी लालू परिवार परेशान है जिसका असर उनकी राजनीति पर भी पड़ा है।

मुलायम सिंह यादव के साथ वो हुआ जो पहले कभी नहीं हुआ था

मुलायम सिंह यादव के साथ वो हुआ जो पहले कभी नहीं हुआ था

यूपी के सबसे बड़े सियासी परिवार में ऐसा रार चला कि अखिलेश यादव ने आपातकालीन राष्ट्रीय कार्यकारिणी के अधिवेशन में सदस्यों के भारी समर्थन के साथ पिता मुलायम सिंह को गद्दी से उतार कर खुद राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए। मुलायम सिंह यादव ने कभी सोचा भी नहीं था कि एक वक्त ऐसा आएगा जब उनका बेटा उन्हें कुर्सी से उतार देगा लेकिन ऐसा हुआ। वहीं अखिलेश यादव ने नेतृत्व में भी समाजवादी पार्टी को बड़ी हार मिली। पूरे साल मुलायम सिंह यादव अपने बेटे अखिलेश यादव और मुलायम सिंह यादव का समझौता कराने में लगे रहे। यूपी में समाजवादी पार्टी को बुरी दुर्गती देखनी पड़ी है।

अखिलेश यादव का फॉर्मूला फ्लॉप रहा

अखिलेश यादव का फॉर्मूला फ्लॉप रहा

अखिलेश यादव अपने पिता और चाचा को दरकिनार कर यूपी को जितने का दांव लगाया लेकिन बुरे तरीके से फेल हो गए। यूपी विधासभा चुनाव में अखिलेश यादव की पार्टी समाजवादी पार्टी को ऐसी हार मिली की जिसकी उन्होंने कल्पना कभी भी नहीं की थी। विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने समाजवादी पार्टी को बुरी तरह से पटखनी दी। बात यही खत्म नहीं हुई अखिलेश यादव के कई करीबियों ने बीजेपी का दामन थाम लिया। अखिलेश ने फिर भी अपने आप को संभालने की कोशिश की लेकिन 2017 के अंत तक उनकी पार्टी को निकाय चुनावों में भी हार का सामना करना पड़ा। साल 2017 में समाजवादी पार्टी के अंदर खूब कलह हुआ जिसको रोकने में अखिलेश यादव नाकामयाब रहे।

शिवपाल यादव को भतीजे ने दिया जोर का झटका

शिवपाल यादव को भतीजे ने दिया जोर का झटका

राजनीति के माहिर खिलाड़ी और लंबे समय तक अपने भाई मुलायम सिंह यादव का झंडा बुलंद करते रहे शिवपाल यादव को उनके भतीजे ने जोर का झटका दिया। पारिवारिक कलह की वजह से समाजवादी पार्टी यूपी में हार गई वहीं समाजवादी पार्टी में शिवपाल का कद भी कुछ नहीं रहा। शिवपाल यादव और अखिलेश यादव के बीच लंबे समय तक 'शीतयुद्ध' चला जो अभी भी खत्म नहीं हुआ है। शिवपाल यादव अभी यूपी में पार्टी को बढ़ाने और खुद के लिए समाजवादी पार्टी में ओहदा दोनों के लिए लड़ रहे हैं। एक वक्त था जब यूपी की राजनीति में शिवपाल यादव की तूती बोलती थी।

अमर सिंह का तो पॉलिटिकल करियर ही खत्म हो गया!

अमर सिंह का तो पॉलिटिकल करियर ही खत्म हो गया!

लंबे समय तक समाजवादी पार्टी से बाहर रहने के बाद अमर सिंह को पार्टी में एंट्री मिली थी लेकिन वो भी लंबी ना चल सकी। अमर सिंह पर समाजवादी पार्टी के अंदर झगड़ा लगाने के आरोप लगे जिसके बाद अखिलेश यादव ने उनको पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया। अखिलेश यादव ने बार-बार समाजवादी परिवार में मचे घमासान के लिए अमर सिंह को जिम्मेदार बताया था। कभी यूपी की राजनीति के केंद्र में रहे अमर सिंह आज कहीं नहीं हैं।

मायावती का बुरा हाल

मायावती का बुरा हाल

2014 के लोकसभा चुनाव में बसपा का बुरा हाल देखने के बाद मायावती ने साल 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव से बहुत उम्मीदें लगा रखी थी लेकिन उनका सपना टूटा और उनको विधानसभा चुनाव में भी हार का सामना करना पड़ा। इतना ही नहीं मायावती पर यूपी में हिंसा कराने के आरोप भी लगे। हार का सिलसिला विधानसभा चुनाव तक ही नहीं रूका मायावती को निकाय चुनाव में भी हार का ही सामना करना पड़ा। अब फिर से मायावती पार्टी को खड़ा करने में लगी हुई हैं।

पंजाब में फेल हुए सुखबीर बादल

पंजाब में फेल हुए सुखबीर बादल

दस सालों कर पंजाब में राज करने के बाद सुखबीर बादल की पार्टी शिरोमणी अकाली दल साल 2017 में विधानसभा चुनाव हार गई। वहीं पंजाब में शिरोमणी अकाली दल का जनाधार भी कम होता जा रहा है। सरकार में रहते हुए सुखबीर बाद पर भ्रष्टाचार और नशा को बढ़ावा देने का आरोप लगा।

टीटीवी दिनाकरन की प्लानिंग फेल

टीटीवी दिनाकरन की प्लानिंग फेल

जब जयललिता तमिलनाडु की मुख्यमंत्री थी तब शशिकला के करीबी और एआईएडीएमके नेता टीटीवी दिनाकरन की खूब चलती थी लेकिन जयललिता की मौत के बाद शशिकला ग्रुप को लगा की आसानी से सत्ता की बागडोर उनके हाथों में आ जाएगी। अब हालात बिल्कुल बदल गए है। कभी सत्ता का स्वाद चखने वाले टीटीवी दिनाकरन मुश्किवल में चल रहे हैं। जिनको उन्होंने आगे बढ़ाया आज वो ही उनकी बात नहीं सुनते। शशिकला जेल में हैं। उधर टीटीवी दिनाकर आरके नगर सीट से उम्मीदवार बने हैं। कुल मिलाकर टीटीवी दिनाकरन को लिए ये साल अच्छा तो नहीं कहा जा सकता।

 शशिकला को हुई है जेल

शशिकला को हुई है जेल

अप्रत्यक्ष रूप से तमिलनाडु की सरकार चलाने वाली शशिकला ने तो जयललिता को खोया ही उनको जेल भी जाना पड़ा है। वहीं जेल जाने के बाद उनके सारे चहतों ने खिलाफत कर दी है। शशिकला कानूनी और राजनीतिक दोनों लड़ाई लड़ रही हैं। कभी सत्ता को चलाने वाली शशिकला के अधिकतर मोहरों ने खिलाफत कर दी है। जिस पन्नीलरेसल्वम को शशिकला ने तमिलनाडु का सीएम बनाया था वहीं आज उनके खिलाफ खड़े हैं।

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English summary
flop political leader of 2017, read each and every thing about them
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