वो 5 चीजें, जो साल 2016 में भी नहीं बदलीं
साल 2016 में कुछ चीजों को बदलने के लिए काफी प्रयास हुए, दावे भी किए गए लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद कोई बदलाव नहीं हो पाया।
नई दिल्ली। साल 2016 को बीतने में गिनती के दिन बचे हैं और हर बार की तरह इस बार भी साल 2017 में हम बदलाव के कई वादे करने के लिए तैयार हैं। हालांकि कई चीजें ऐसी हैं जिन्हें बदलने का दावा 2016 में भी किया गया था लेकिन बदल नहीं पाए।
आइए आपको बताते हैं वो चीजें जो इस साल बदली तो नहीं लेकिन 2017 में हम फिर से इन्हें बदलने का वादा जरूर करेंगे।


नहीं बन पाया स्वच्छ भारत, लगे हैं गंदगी के ढेर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बड़े मिशन 'स्वच्छ भारत' को कामयाब बनाने के लिए सरकारी स्तर पर कई बड़े प्रयास हुए। विज्ञापन से लेकर फिल्मी हस्तियों के जरिए भारत को स्वच्छ बनाने की कोशिशें की गई लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद कुछ नहीं हुआ।
टीवी, अखबार और एफएम पर चलाए गए धुआंधार विज्ञापन भी ज्यादातर भारतीयों को यह समझाने में नाकामयाब रहे कि अपने आस-पास साफ सफाई रखना जरूरी है।
ना केवल बड़े शहरों बल्कि छोटे कस्बों और गांवों तक में सरकार ने इस मिशन को आम आदमी से जोड़ने के लाख प्रयास किए लेकिन गंदगी से भारत का पीछा नहीं छूट पाया।
हालांकि ग्रामीण इलाकों में घरों में शौचालय बनवाने के काम में जरूर तेजी आई लेकिन शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता को लेकर कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिला।

2016 में भी नहीं बदला संसद में हंगामे का रिवाज
संसद में हंगामा करना जैसे एक परंपरा ही बन गई है। मुद्दा चाहे कोई भी रहा हो, सदन को बाधित करने में नेता जरा भी नहीं हिचकते। हर बार की तरह साल 2016 में भी संसद में हंगामे का रिवाज नहीं बदला।
दल चाहे कोई भी रहा हो, विपक्ष में जाते ही सदन को बाधित करना जैसे उनकी प्राथमिकता होती है। सदन को सही ढंग से चलाने के लिए इस साल भी सर्वदलीय बैठकें हुईं लेकिन नतीजा जीरो ही रहा।
पहले जीएसटी के मुद्दे पर और फिर नोटबंदी के फैसले को लेकर साल 2016 में संसद में जमकर हंगामा हुआ। संसद का पूरा शीतकालीन सत्र हंगामे की भेंट चढ़ गया।
भाजपा के वरिष्ठ सांसद और पूर्व उप-प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी संसद में चल रहे हंगामे से इस कदर दुखी हुए कि उन्हें कहना पड़ा कि मन कर है कि इस्तीफा दे दूं। खैर उम्मीद करेंगे कि साल 2017 में संसद ठीक ढंग से चले।

2016 में भी सवाल ही रहा पाकिस्तान का एजेंडा
2014 और 2015 की तरह 2016 में भी यह समझ नहीं आया कि आखिरकार हमारा पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान चाहता क्या है? इस साल भी पाकिस्तान ना दोस्ती में आगे बढ़ा और ना दुश्मनी में।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नवाज शरीफ को जन्मदिन की बधाई देने पाकिस्तान गए तो लगा कि अब दोनों देशों के बीच दोस्ती की एक नई इबारत लिखी जाएगी, लेकिन नतीजा वही ढाक के तीन पात।
सीमा पर हालांकि उसकी कायराना हरकतें जरूर जारी रहीं। पठानकोट से लेकर उरी आतंकी हमले तक पाकिस्तान ने अपनी साजिशों को जारी रखा।
इसके बाद जब पाकिस्तान की नापाक हरकतों के जवाब में भारत के जांबाज सैनिकों ने उसके घर में घुसकर आतंकियों को मारा तो लगा कि अब सीमा पर संग्राम छिड़ना तय है, लेकिन पाकिस्तान दुश्मनी भी नहीं निभा पाया।
यानी साल 2016 में भी पाकिस्तान अपने उसी रवैये पर कायम रहा और ना दोस्त ही बन पाया, ना दुश्मनी निभा पाया। क्या 2017 में पाकिस्तान कुछ बदलेगा?

कोशिशें हुईं लेकिन नहीं बदली दिल्ली की हवा
देश की राजधानी में हवा को साफ करने के लिए एनजीटी से लेकर दिल्ली सरकार तक ने कोशिशें की लेकिन दिल्ली के लोगों का जहरीली हवा में सांस लेना नहीं बदला।
आम आदमी पार्टी की सरकार ने बड़े जोर-शोर से ऑइ ईवन फॉर्मूला लागू कर सड़कों पर गाड़ियां कम कर प्रदूषण का स्तर घटाने की कोशिश की लेकिन हवा के जहरीले कण कम नहीं हुए।
दिवाली से पहले ही अखबारों में खूब खबरें छपी कि दिल्ली की हवा बेहद जहरीली हो रही है। इसे लेकर लोगों को जागरूक भी किया गया कि लोगों ने दिवाली पर जमकर पटाखे फोड़े।
यानी जो हवा पहले से ही जहरीली थी, उसे और जहरीला बना दिया और हर साल की तरह साल 2016 में भी दिल्ली की हवा नहीं बदली।

आईफोन, जैसा पहले था वैसा ही 2016 में रहा
जब भी आईफोन का नया वर्जन लॉन्च होता है तो बड़े जोर-शोर से ये बताया जाता है कि इस बार नए आईफोन में ये खासियत है, लेकिन जब वह यूजर्स के हाथ में आता है तो कुछ नया नहीं मिलता।
साल 2016 में आए आईफोन के नए वर्जन में हेडफोन जैक को तो खत्म कर दिया गया लेकिन कोई नया अवतार देखने को नहीं मिला। यूजर्स को सबकुछ पहले जैसा ही मिला।
इस स्मार्टफोन को स्मार्टनेस के नाम पर एक खूबसूरत लेकिन गूंगे फोन की तरह पेश कर दिया गया। साल 2017 में हो सकता है कि आईफोन का नया वर्जन आए लेकिन उसमें कुछ बदलेगा, कहा नहीं जा सकता।
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