Flashback 2021: सिर्फ कोरोना ही नहीं, इस साल ये बीमारियां भी बनीं लोगों के लिए काल

नई दिल्ली, 19 दिसंबर। दुनियाभर को अपनी चपेट में ले चुके कोरोना वायरस महामारी से लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। पिछले दो वर्षों में सामने आई इस महामारी ने लाखों जिंदगियां छीन लीं, इसके अलावा भारत सहित कई देशों में लोगों की नौकरियां गईं और आर्थिक संकट की स्थिति का सामना करना पड़ा। 2021 के आगमन पर लग रहा था कि कोरोना से छुटकारा मिलेगा लेकिन साल के अंत तक यह अभी भी सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। हालांकि इस वर्ष सिर्फ कोरोना वायरस ही नहीं कई अन्य बीमारियों ने कहर ढाया।

इस साल पांच बीमारियों ने किया परेशान

इस साल पांच बीमारियों ने किया परेशान

साल 2021 को भारत में बीरारियों का साल कहा जा सकता है। इस वर्ष जहां कोरोना की दूसरी भयानक लहर देखने को मिली, वहीं दूसरी ओर डेंगू, एमआईएस-सी, हृदय की परेशानियों से लेकर म्यूकोर्मिकोसिस तक की अन्य बीमारियों ने लोगों के स्वास्थ्य संकट को बढ़ा दिया। बच्चों सहित कई लोग कोरोना के बाद होने वाली जटिलताओं से पीड़ित रहे। जबकि डेंगू और चिकनगुनिया जैसी मच्छरों से होने वाली बीमारियों में इस साल बढ़ोतरी देखी गई, उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में पिछले साल दर्ज किए गए डेंगू के मामलों की संख्या पांच गुना से अधिक दर्ज की गई। आइए एक नजर डालते हैं उन पांच बीमारियों पर जिन्होंने इस साल लोगों को परेशान किया।

फंगल संक्रमण-म्यूकोर्मिकोसिस

फंगल संक्रमण-म्यूकोर्मिकोसिस

फंगस संक्रमण के म्यूकोर्मिकोसिस कहा जाता है, साल 2021 में ब्लैक और व्हाइट फंगस ने काफी लोगों के प्रभावित किया। यह एक दुर्लभ घातक संक्रमण है जो म्यूकोर्माइसेट्स नामक मोल्ड के कारण होता है और इसके लिए तत्काल चिकित्सा की आवश्यकता होती है। यह स्टेरॉयड के उपयोग के कारण कोविड के बाद के रोगियों में देखा गया था। स्टेरॉयड के अनुचित उपयोग और अनियंत्रित मधुमेह (शुगर) के मरीजों में इस संक्रमण का विकास होता है।

हड्डियों की बीमारी- एवैस्कुलर नेक्रोसिस

हड्डियों की बीमारी- एवैस्कुलर नेक्रोसिस

यह एक और पोस्ट-कोविड जटिलता है जो रोगियों में स्टेरॉयड के अति प्रयोग के कारण होती है। इसे ऑस्टियोनेक्रोसिस या रक्त की आपूर्ति में कमी के कारण हड्डी के ऊतकों की मृत्यु के रूप में भी जाना जाता है। यह हड्डी के छोटे-छोटे आकार में टूटने और हड्डी के अंतिम पतन का कारण बन सकता है। हालांकि प्रारंभिक अवस्था में रोग के कोई लक्षण नहीं होते हैं, कई केस में दर्द महसूस होने की बात सामने आई है।

मल्टीसिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम (एमआईएस-सी)

मल्टीसिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम (एमआईएस-सी)

बच्चों में कोरोना वायरस के हल्के लक्षण ही देखने को मिले हैं, लेकिन कोविड के बाद होने वाली परेशानियों में मल्टीसिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम बच्चों के लिए घातक साबित हुआ। एमआईएस-सी हृदय, फेफड़े, रक्त वाहिकाओं, गुर्दे, पाचन तंत्र, मस्तिष्क, त्वचा या आंखों में गंभीर सूजन पैदा कर सकता है। लक्षणों में बुखार, उल्टी, पेट में दर्द, त्वचा पर लाल चकत्ते, तेजी से सांस लेना, लाल आंखें, होंठ और जीभ पर सूजन और सिरदर्द शामिल हैं।

खून का थक्का जमना और दिल की समस्याएं

खून का थक्का जमना और दिल की समस्याएं

इस साल दिल के दौरे के मामलों में वृद्धि हुई क्योंकि ठीक हुए कई कोविड-19 रोगियों में हृदय संबंधी समस्याएं थीं। लक्षण सीने में जकड़न, सांस लेने में कठिनाई, दर्द और अचानक धड़कन से लेकर थे। दिल का दौरा, मायोकार्डिटिस, दिल की सूजन, कम पंपिंग क्षमता, दिल की विफलता, रक्त के थक्के और अतालता (असामान्य दिल की धड़कन) जैसी जटिलताएं देखी गईं।

डेंगू

डेंगू

यह मच्छरों द्वारा फैलने वाला वायरल संक्रमण है जो संक्रमित एडीज प्रजाति (ए. इजिप्टी या ए. एल्बोपिक्टस) मच्छर के काटने से लोगों में फैलता है। इस बीमारी ने भी कई लोगों को कठिन समय का सामना कराया। हल्के रोग से लेकर डेंगू शॉक सिंड्रोम तक रोग के लक्षण इसके प्रकार पर निर्भर करते हैं। हल्के डेंगू बुखार में, लक्षण जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द, तेज बुखार, शरीर पर लाल चकत्ते, बार-बार उल्टी और तेज सिरदर्द से लेकर हो सकते हैं। इसके अलावा नाक-मुंह में खून बहना, प्लेटलेट्स की कम संख्या, आंतरिक रक्तस्राव, दस्त, ऐंठन, त्वचा पर खून के धब्बे, तेज बुखार, चिपचिपी त्वचा और पेट में दर्द होता है।

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