Flashback: त्योहार से लेकर राजनीति-खेल तक, 2020 में कोरोना ने यूं बदली हमारी सालों से चली आ रही परंपरा
Flashback: त्योहार से लेकर राजनीति-खेल तक, 2020 में कोरोना महामारी ने यूं बदली दी हमारी सालों से चली आ रही परंपरा
How CoviD change traditions in 2020: कोरोना काल में आज हम जिस दौर से गुजर रहे हैं, इस दौर का अंत कब होने वाला है, इसके बारे में कुछ भी कहना मुश्किल है। मेडिकल जगत से लेकर विज्ञान जगत पिछले एक सालों से इस महामारी को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन ये अभीतक संभंव नहीं हो पाया है। 2020 में कोरोना काल ने हमारी सालों से चली आ रही है परंपरा को तोड़ दिया है या यूं कह लें कि बदल दिया है। सोशल डिस्टेंसिंग वाले मोड में हम अपनी समाजिक लाइफ से बिल्कुल अलग घरों में कैद हैं...ताकि कोरोना वायरस के संक्रमण की रफ्तार धीमी हो। साल 2020 कुछ ही दिनों में जाने वाला है लेकिन अपने साथ ये कोरोना को लेकर जाएगा ये नहीं इसका किसी को पता नहीं है, तो चलिए हम आपको बताते हैं कि कोरोना ने कैसे हमारी परंपराओं को बदल दिया है।
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- धर्म और पूजा-पाठ: जब परंपराओं की बात हो तो सबसे पहले दिमाग में ख्याल धार्मिक मान्यताओं और पूजा-पाठ का आता है। लेकिन कोरोना काल में सभी लोगों ने अपनी धार्मिक मान्यताओं और उसके तौर-तरीकों में बदलाव किया है। भारत में हिन्दु, मुस्सिम, सिख और ईसाई सभी लोगों ने हर त्योहार में लॉकडाउन के दौरान पूजा-पाठ घर में किया है। कई शहरों में आज भी प्रमुख मंदिर और मस्जिद, गुरुद्वारे और चर्च बंद हैं। कोरोना काल में शादी का स्वरूप भी बदला। शादी में जोड़े को मास्क और पीपीई किट पहनकर शादी की रस्में करते देखा गया। मंदिरों में पूजा पाठ, आरती, प्रसाद वितरण की परंपरा को भी बदल दिया गया।
धर्म को लेकर जो सबसे बड़ा बदलाव देखा गया वो था अंतिम संस्कार में दिखा। कोरोना संक्रमित मरीजों के निधन पर मेडिकल सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने शवों के अंतिम संस्कार पर बैन लगाया था (जब ये पीक पर था) जिसकी वजह से परिजनों ने शवों का अंतिम संस्कार उनके धर्म के अनुसार नहीं किया। ये विदेशों में भी देखने को मिला, जहां कोरोना से हुई ज्यादा मौतों की वजह से श्मशान घाट की कमी हुई, कईयों को तो बिना ताबूत के ही दफनाया गया।

- त्योहार, के तो स्वरूप को ही कोरोना ने बदलकर रख दिया है। इसका सबसे ताजा उदाहरण है क्रिसमस। भारत सहित दुनियाभर में क्रिसमस के फेस्टिवल की वो रौनक देखने को नहीं मिली जो हर बार मिलती थी। यहां तक कई जगह तो चर्च को भी आम लोगों के लिए नहीं खोला गया। चर्च में सिर्फ पादरी सहित कुछ ही लोगों को सोशल डिस्टेसिंग में प्रार्थना करने की इजाजत दी गई। इसके अलावा राखी, दुर्गा पूजा, ईद, कोई भी त्योहार हो लोगों ने घर में ही इसको सेलिब्रेट किया। कोरोना ने रामलील की परंपराओं को भी इस साल बदला।

- शिक्षा, कोरोना काल में, सबसे ज्यादा अगर नुकसान किसी क्षेत्र को हुआ है तो वो शिक्षा है। कोरोना ने शिक्षा के सारे परंपराओं और नियमों को बदला है। कोरोना काल में स्कूल, कॉलेज, नई कक्षा, नई किताब-कॉपी, यूनिफॉर्म... इन सारे चीजों के महत्व को कम कर दिया है। कोरोना काल में स्कूल और कॉलेज की पढ़ाई अब ऑनलाइन हो रही है, अब छात्रों को स्कूल के लिए तैयार होने की जरूरत नहीं रह गई, वो बस मोबाइल पर इंटरनेट ऑन कर शिक्षा को ग्रहण कर रहे हैं। अब परीक्षा सेंटर में कार्डबोर्ड से ज्यादा जरूरी मास्क और सेनेटाइजर ले जाना हो गया है। जब कुछ महीने पहले स्कूल खुले भी है तो वो भी पहले की तरह नहीं, कई बदलवा के साथ खुले। अब क्लास में सारे छात्र एक साथ नहीं जा रहे हैं। स्कूल में असेंबली प्रथा को भी खत्म कर दिया गया है। शिक्षाविदों का तो मानना है कि अब पैसिव लर्निंग के दिन खत्म हो गए हैं और अब ऑनलाइन कोर्स तैयार कर इसी तरह के शैक्षणिक ढांचे तैयार करने होंगे।

-खेल, कोरोना काल में पहले तो सारे देशों ने राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय खेलों पर पाबंदी लगा दी थी...क्योंकि खेल और सोशल डिस्टेंसिंग का आपस में कोई तालमेल नहीं है। लेकिन क्रिकेट टूर्नामेंट के लिए जब लॉकडाउन के बाद योजना बनाई गई तो उसमें भी खेल के नियम सहित कई चीजों में बदलाव किया गया। जैसे आईपीएल के दौरान क्रिकेट के इतिहास में पहली बार बिना दर्शक के मैदान में मैच खेल गएं। खिलाड़ियों को एक-दूसरे से हाथ मिलाने पर पाबंदी लगाई गई। गेंदबाजों को सलाइवा के लिए बैन किया गया।

- राजनीति, कोरोना का असर देश की राजनीति पर भी दिखा। संसद की परंपरा को कोरोना ने प्रभावित किया। कोरोना को देखते हुए संसद सत्र को इस साल स्थगित किया गया। नेताओं के रैली पर भी कई तरह के पाबंदी लगाए गएं, नेता मैदान की जगह वर्चुअल सभाएं करते नजर आएं। राजनीतिक कार्यक्रम अब सभाओं में नहीं बल्कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हो रहे हैं। यहां तक की संयुक्त राष्ट्र ने भी कोरोना की वजह से सालों से चली आ रही कई परंपराओं को बदल दिया। उन्होंने अपने कई कार्यक्रम को वर्चुअली आयोजित किया। इस साल भारत में हुए चुनाव में भी कोरोना का असर दिखा।

-मनोरंजन, कोरोना काल में मनोरंजन का भी स्वरूप बदल गया है। साल 2020 में फिल्म सिनेमा घरों की जगह ऑनलाइन प्लेटफार्म पर रिलीज किए गए। सिनेमा के हिट होने का पैमान अब फिल्म की कमाई नहीं बल्कि ऑनलाइन रेटिंग हो गई है। मनोरंजन जगत में काम करने वालों के लिए भी इस साल ने काफी कुछ बदल दिया। कलाकारों के शूटिंग के तरीकों और फॉरमेट में भी बदलाव किया गया है। जिसका सबसे बड़ा बदलाव दिखा, अभिताभ बच्चन के शो कौन बनेगा करोड़पति में। जब कोविड-19 नियमों की वजह से शो में एक भी दर्शक को नहीं बुलाया गया। खेल के नियमों में भी कई बदलाव करने पड़ें। मनोरंजग जगत के कई कार्यक्रम को भी वर्चुअली आयोजित किया गया था।

-ऐसा कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा कि कोरोना काल के दौरान हमारी जिंदगी से जुड़ी ऐसी कोई भी चीज नहीं है, जिसमें बदलाव नहीं हुआ हो। कोरोना ने ऑफिस कल्चर को भी बदल कर रख दिया है। जहां भारत में लोगों को लगता था कि वर्क फॉर होम में कंस्ट्रक्टिव काम नहीं मिल पाता, जिसकी वजह से लोग ऑफिस कल्चर में ज्यादा यकीन करते थे, कोरोना ने उस परंपरा को भी बदल दिया है। एक्सपर्ट का ऐसा मानना है कि कोविड 19 के बाद दफ्तर के आर्किटेक्चर में भी काफी बदलाव होगा, ठीक वैसे ही जैसे 1954 में कॉलेरा महामारी के बाद लंदन का पूरा आर्किटेक्चर बदला गया था।
- कोरोना काल में रेस्तरां और होटल में भी खाना खाने के परंपरा में बदलाव हुआ। बफे तो अब भूल ही जाइए। आपको किसी रेस्तरां और होटल में बैठकर खान की इजाजत भी नहीं दी गई। कोरोना के बाद की दुनिया में भले ही बाहर जाकर खाने का चलन पूरी तरह खत्म न हो लेकिन सीमित हो ही जाएगा।
- अंत में बात मेडिकल क्षेत्र की। कोरोना काल में इलाज करने और हॉस्पिटल के नियमों में भी काफी बदलाव हुए हैं। अब हॉस्पिटल में किसी भी मरीज को बिना कोविड-19 टेस्ट के एडिमिट नहीं किया जा रहा है। अस्पताल और मेडिकल सेंटर में ज्यादा कर्मचारी पीपीई किट में नजर आ रहे हैं, जिन्हें अपने काम के घंटों के दौरान बाहर निकलने पर पाबंदी है। कोरोना ने पूरी दुनिया ये समझा दिया कि हमें मेडिकल क्षेत्र में और भी बदलाव की जरूरत है।












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