SC Freed Juvenile: 25 साल मौत के साये में रहने के बाद आजाद होगा युवक, पांच महिलाओं की हत्या के समय जुवेनाइल था
सुप्रीम कोर्ट ने हत्याकांड के दोषी पाए गए एक शख्स को 25 साल बाद रिहा करने का फैसला सुनाया है। मामला 1994 का है, जहां पांच महिलाओं की हत्या हुई थी। जानिए पूरा मामला

Five Women Killing 1994 का एक ऐसा मामला है जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने 29 साल के बाद दोषी करार दिए गए शख्स को बरी करने का फैसला (SC Freed Juvenile) सुनाया। देश की सबसे बड़ी अदालत ने पाया कि जिस समय जघन्य हत्या की वारदात को अंजाम दिया गया, आरोपी जिसे निचली कोर्ट ने दोषी करार दिया वह क्राइम के समय जुवेनाइल यानी नाबालिग था। 25 साल तक मौत से साये में रहने के बाद दोषी को रिहा किया जाएगा।
25 साल बाद मौत से मुक्ति मिली!
मौत की सजा पाने के 25 साल बाद दोषी करार दिए गए शख्स को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार किशोर पाया गया। अपराध के समय दोषी की आयु कानून के अनुसार एडल्ट यानी वयस्क आयु वर्ग में नहीं आती। फैसले के बाद मौत के दोषी को जीवनदान मिल गया है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को किशोर को तुरंत जेल से रिहा करने का निर्देश दिया।
दोषी को फरवरी 1998 में पुणे में पांच महिलाओं की हत्या मामले में अन्य आरोपियों के साथ मौत की सजा सुनाई गई थी। जिनकी हत्या हुई उनमें एक गर्भवती थी, और डेढ़ साल और ढाई साल की उम्र के दो बच्चों की भी हत्या हुई थी। खास बात ये है कि ट्रायल कोर्ट के आदेश को बॉम्बे हाई कोर्ट और शीर्ष अदालत ने भी बरकरार रखा था। करीब 23 साल पहले सुप्रीम कोर्ट 2000 में दोषी की अपील को खारिज कर चुकी थी।
देश की सबसे बड़ी कोर्ट ने कहा था कि ये मामला दुर्लभतम और एक असाधारण अपराध का है। इसमें कानून के तहत अधिकतम दंड जरूरी था। यहां तक कि शीर्ष अदालत ने किशोर की समीक्षा याचिका भी खारिज कर दी।
दिलचस्प है कि राजस्थान के रहने वाले दोषी ने ट्रायल कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक की कार्यवाही में नाबालिग होने का मुद्दा नहीं उठाया था। 2013 में पहली बार सुप्रीम कोर्ट में एक नई याचिका दायर कर अपराध के समय किशोर होने के मुद्दे को उठाया गया। उस याचिका को भी अदालत ने मामले के गुण-दोष में जाए बिना खारिज कर दिया था। इसके बाद पीड़ित पक्ष ने 2018 में एक याचिका दाखिल करके इस मुद्दे को उठाने की फिर से कोशिश की। इस समय शीर्ष अदालत ने किशोर होने की उनकी दलील की जांच करने पर सहमति व्यक्त जताई।
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस केएम जोसेफ, अनिरुद्ध बोस और हृषिकेश रॉय की पीठ ने किशोर की याचिका को स्वीकार किया था। शीर्ष अदालत ने ट्रायल कोर्ट की तरफ से दायर जांच रिपोर्ट पर भरोसा किया। स्कूल प्रमाण पत्र सहित सभी दस्तावेजी सबूतों पर भरोसा करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने दोषी को किशोर घोषित कर दिया। पीठ ने कहा कि रिकॉर्ड के अनुसार, अपराध के समय दोषी की उम्र लगभग 12 वर्ष थी। शीर्ष अदालत ने तत्काल रिहाई का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि ट्रायल जज द्वारा दायर जांच रिपोर्ट और स्कूल सर्टिफिकेट पर विश्वास न करने का कोई कारण नहीं है।












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