राहुल की खास बातें जो उन्हें बनाती हैं मोदी से बेहतर
नई दिल्ली। सन 2014 में होने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर भारत के राजनीतिक जगत में आजकल दो शख्सियतों की बड़ी चर्चा हो रही है। जिसमें से पहले स्थान पर हैं भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी तो दूसरे स्थान पर हैं कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी। मोदी के राष्ट्रीय परिदृश्य में आने से पहले राहुल गांधी ही अधिक चर्चित थे, वह कांग्रेस की तरफ से प्रधानमंत्री पद के अघोषित उम्मीदवार है।
पिछले दिनों रूस यात्रा से भारत लौटते वक्त प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी यह कह दिया था कि वह राहुल गांधी के नेतृत्व में काम करने में खुशी महसूस करेंगे। जबकि उनके प्रतिद्वंदी नरेंद्र मोदी देश भर में आयोजित रैलियों में भारत की जनता का पुरजोर समर्थन प्राप्त कर रहे हैं। अभी हाल ही में सीएसडीएस द्वारा किये गये सर्वे में यह पता चला है कि भारत के 29 फीसदी लोग राहुल गांधी को बतौर प्रधानमंत्री देखना चाहते हैं।
मोदी के आगे अगर राहुल के राजनीतिक अनुभव की बात करें तो यह बेहद कम है। मोदी ने आरएसएस के एक कार्यकर्ता से प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी तक का सफर तय किया है, जबकि राहुल को राजनीति विरासत में मिली है। फिलहाल भले ही मोदी के सामने राहुल को कम लोग ही प्रधानमंत्री पद के योग्य मानते हो फिर भी राहुल के पास कुछ ऐसी खास बातें हैं जो नरेंद्र मोदी में नहीं हैं।

किसी विवाद में नाम नहीं
एक तरफ जहां नरेंद्र मोदी का राजनीतिक कद जितना ज्यादा बढ़ रहा है 'गुजरात दंगों' का भूत उनका पीछा नहीं छोड़ रहा है। उन्हें साम्प्रदायिक भी करार दिया जाता है, वहीं राहुल गांधी के साथ ऐसा कोई भी विवाद नहीं है, उनकी छवि साफ सुथरी है।

यूपीए को करेंगे लीड
राहुल देश के सबसे प्रतिष्ठित गांधी परिवार से ताल्लुक रखते हैं। ऐसे में यूपीए के नेतृत्व में सरकार बनने पर प्रमुख पद के लिए उन्हें ही चुना जाना तय है, जबकि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार घोषित होते ही एनडीए के कई घटक दल भाजपा का साथ छोड़ गये हैं।

कई घटक दल हैं
राहुल गांधी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं। देश की सबसे पुरानी पार्टी होने के नाते कांग्रेस को समर्थन देने के लिए कई दल तैयार हैं, जबकि भाजपा के सहायक दलों की संख्या कम हो रही है। भाजपा को फिलहाल शिवसेना, अकाली दल और तमिलनाडु से जयललिता की पार्टी एआईडीएमके से समर्थन मिल रहा है। ऐसे में एनडीए का सत्ता संभालने का सपना अभी भी काफी मुश्किल नजर आ रहा है।

हर कोई जानता है गांधी परिवार को
कांग्रेस की पकड़ भारत के गांव गांव में है और पिछले दस वर्षों में पार्टी लोगों के बीच चर्चा का केंद्र रही है। इसके अलावा गांधी परिवार के नाम से देश का हर मतदाता परिचित है, जबकि मोदी के नाम की चर्चा सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में कम है।

सांत्वना का लाभ
राहुल गांधी ने एक रैली के दौरान जिक्र किया था कि देश के लिए काम करने की कीमत उनकी पार्टी को चुकानी पड़ी है। पहले उनकी दादी को मार दिया गया, फिर उनके पिता को मार दिया गया। जिसके कारण उन्हें लोगों से सांत्वना मिल सकती है। 1984 के लोकसभा चुनाव में इंदिरा गांधी की मौत से आहत जनता ने कांग्रेस को 415 सीटों पर जीत दिलाई थी।












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