बांधनी थी राखी लेकिन भाई शहीद होकर लौटा, रक्षा बंधन के दिन अंतिम संस्कार में शामिल हुईं 5 बहनें
बांधनी थी राखी लेकिन भाई शहीद होकर लौटा, रक्षा बंधन के दिन अंतिम संस्कार में शामिल हुईं 5 बहनें
नई दिल्ली, 23 अगस्त: छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में 20 अगस्त को एक माओवादी हमले में भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के असिस्टेंट कमांडेंट सुधाकर शिंदे की मौत हो गई थी। 45 वर्षीय आइटीबीपी के असिस्टेंट कमांडेंट सुधाकर महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले के रहने वाले थे। सुधाकर शिंदे अपने सात भाई बहनों में सबसे बड़े थे। रक्षा बंधन के दिन (रविवार, 22 अगस्त) सुधाकर शिंदे की पांच बहने उनके अंतिम संस्कार में शामिल हुईं। सुधाकर शिंदे को रक्षा बंधन पर उनकी बहनें राखी बांधने का इंतजार कर रही थीं लेकिन उन्हें कहां पता था कि वह उसी दिन अपने भाई के अंतिम संस्कार में शामिल होंगी।

बहनों को भाई की कलाई की जगह मिला पार्थिव शरीर
महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले के बमनी गांव में रविवार को सुधाकर शिंदे का अंतिम संस्कार किया गया। जहां उनकी पांच बहनों ने रोते हुए अपने भाई को आखिरी विदाई दी। सैनिक भाई की कलाई पर राखी बांधने के बजाय पांच असहाय बहनों के अंतिम संस्कार में शामिल होता देख, पूरे गांव वालों की आंखों में आंसू थे।

शहीद सुधाकर शिंदे के 6 साल के बेटे ने चिता को जलाया
बमनी गांव में शहीद सुधाकर शिंदे के 06 साल के बेटे कबीर ने चिता को जलाया। जिसको देख उसके परिवार के सदस्य और पड़ोसी फूट-फूट कर रो पड़े। सुधारक शिंदे के परिवार में पत्नी, चार साल की बेटी, छह साल का बेटा और बुजुर्ग माता-पिता हैं। सुधारक शिंदे के कॉलेज के साथी हरिभाऊ वाघमारे ने कहा, "सुधाकर सात भाई-बहनों में सबसे बड़े थे और उनकी सभी बहनों की शादी कराने में उसने अहम भूमिका निभाई थी"।

सुधारक शिंदे को लगी थी 13 गोलियां
20 अगस्त 2021 को जब नारायणपुर में एक क्षेत्र में गस्त लगाते वक्त सशस्त्र माओवादियों के एक छोटे समूह ने आईटीबीपी कर्मियों की एक टीम पर हमला किया और गोलीबारी की। जिसमें सुधारक शिंदे को 13 गोलियां लगी थी और उनकी मौके पर ही मौत हो गई थी।

जहां 15 अगस्त को जवान ने फहराया था झंड़ा वहीं हुई थी मौत
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक असिस्टेंट कमांडेंट सुधाकर शिंदे पर 20 अगस्त को उसी गांव में हमला हुआ था, जहां उन्होंने 5 दिन पहले 15 अगस्त को तिरंगा फहराया था। 15 अगस्त जिस जगह पर सुधाकर शिंदे गांव वालों को नक्सलियों से बचने और उनसे आजाद होने के बारे में बता रहे थे, वहीं 20 अगस्त को वो शहीद हो गए। सुधाकर शिंदे के अलावा इस हमले में एएसआई गुरमुख सिंह भी शहीद हो गए थे।

वायरल हुई झंडा फहराते हुए सुधाकर शिंदे की तस्वीर
सुधाकर शिंदे के शहीद होने के बाद उनकी झंड़ा फहराते हुए तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। 15 अगस्त को सुधाकर शिंदे अपनी टीम के साथ नारायणपुर के एक गांव में तिरंगा फहराया था। सरपंच और गांव वालों के साथ मिलकर सुधाकर शिंदे ने आजादी की 75वीं वर्षगांठ मनाई थी। इस दिन सुधारक ने गांव वालों को जरूरत का सामान भी बांटा था।












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