2019 में भाजपा-एनडीए की ना हुई सत्ता में वापसी तो फिर क्या करेंगे मोदी-शाह?, पढ़ें पांच विकल्प
नई दिल्ली। 2014 लोकसभा चुनाव में अपने दम पर बीजेपी को बहुमत दिलाकर प्रधानमंत्री बनने वाले नरेंद्र मोदी और उनके रणनीतिकार पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के लिए 2019 लोकसभा चुनाव सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा है। मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ के चुनाव परिणामों के बाद मोदी फैक्टर सवालों के घेरे में है। क्या ब्रैंड मोदी में अब भी इतना दम है कि वह बीजेपी की चुनावी नैया पार लगा सके? यह सवाल हर किसी की जुबां पर है। आज की तारीख में ऐसा कोई चुनावी पंडित नहीं जो खम ठोककर कह दे कि 2019 का नतीजा क्या होगा? ये तो छोड़ दीजिए, कोई यह भी बताने की हालत में नहीं कि 2019 के नतीजे के आसपास की स्थिति क्या होगी? असमंजस के इस माहौल में चुनाव परिणाम की भविष्यवाणी न सही, पर 2019 लोकसभा चुनाव के बाद राजनीति क्या-क्या विकल्प दे सकती है और इन सियासी विकल्पों के हिसाब से नरेंद्र मोदी और अमित शाह की स्थिति क्या होगी? इतना जरूर बताया जा सकता है। 2019 में मोदी-शाह की जोड़ी को बहुमत मिला तो कहां जाएगी भारतीय राजनीति? गठबंधन की स्थिति में क्या होगा? अगर मोदी-शाह के नेतृत्व में बीजेपी हारी तो क्या होगा? कांग्रेस पूर्ण बहुमत से आई तो क्या होगा? क्या होगा अगर बीजेपी हारे, कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बने पर बहुमत के करीब न हो? क्या ऐसा भी हो सकता है कि बीजेपी के समर्थन से केंद्र में सरकार बने और मोदी पीएम न हों? कुछ भी हो सकता है।

2019 में पूर्ण बहुमत से बीजेपी की वापसी तो?
इस बात में शक नहीं कि ब्रैंड मोदी अब भी दमदार है। भले ही बीजेपी मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में चुनाव हार गई है, लेकिन 2019 में प्रधानमंत्री पद के लिए अब भी नरेंद्र मोदी से बड़ा चेहरा नहीं है। संभव है कि बात जब प्रधानमंत्री चुनने की आए तो मतदाता दोबारा नरेंद्र मोदी के नाम पर मुहर लगा दे और बीजेपी पूर्ण बहुमत से सत्ता पर काबिज हो जाए। इस संभावना को अभी खारिज कर देना जरा मुश्किल लग रहा है। यदि ऐसा हुआ तो नरेंद्र मोदी जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी के बाद सबसे ताकतवर प्रधानमंत्री के तौर पर उभरेंगे और कांग्रेस का भविष्य लंबे समय के लिए गर्त में चला जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ तो?

बीजेपी बहुमत के पास तक पहुंची तो भी बच जाएगी मोदी-शाह की साख
2019 में दूसरी परिस्थिति यह बन सकती है कि ब्रैंड मोदी के दम पर बीजेपी ठीक-ठाक प्रदर्शन करे और भले ही बहुमत प्राप्त न सके, लेकिन बहुमत के आसपास आ जाए। मसलन बीजेपी 250, 240 या 255 सीटें जीत जाए और एनडीए सहयोगियों के साथ मिलकर सरकार बना ले। अमित शाह ने अगले आम चुनाव से पहले सहयोगियों को साथ लेने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। इस परिस्थिति में भी नरेंद्र मोदी और अमित शाह की साख काफी हद तक बच सकती है, लेकिन क्या होगा अगर ये दोनों परिस्थितियां न बन सकीं?

तीसरी परिस्थिति में आडवाणी के जैसी भूमिका में जा सकते हैं मोदी
2019 लोकसभा में अगर ऊपर दी गई दोनों परिस्थितियां न बन सकीं तो क्या होगा? मतलब ये कि बीजेपी को बहुमत न मिले, बहुमत के आसपास भी न पहुंच पाए और सीटें 200 से थोड़ी कम या ज्यादा हो जाएं तब क्या होगा। यह स्थिति न केवल बीजेपी बल्कि कांग्रेस के लिए भी अजीब होगी। मतलब किसी को स्पष्ट नहीं मिलेगा, बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी होगी। उसके बिना सरकार बनना संभव नहीं होगा, लेकिन ऐसी स्थिति में नरेंद्र मोदी की स्वीकार्यता का मसला खड़ा होगा। अटल बिहारी वाजपेयी की तरह क्या वह गठबंधन को लेकर चलने का कठिन निर्णय करेंगे या राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी जैसे चेहरों को फ्रंट पर लाया जाएगा और नरेंद्र मोदी ठीक वैसी ही भूमिका में होंगे जैसी 1999 में लालकृष्ण आडवाणी ने निभाई थी। आडवाणी उस वक्त कट्टर माने जाते थे और वाजपेयी सर्वस्वीकार्य थे। ऐसे में नरेंद्र मोदी और अमित शाह का प्रयास यह हो सकता है कि कुछ दिनों तक सरकार चलाई जाए और मध्यावधि चुनाव कराकर मोदी के अच्छे दिन याद दिलाए जाएं और चुनाव में उतरा जाए।

चौथी परिस्थिति में के चंद्रशेखर या नवीन पटनायक को पीएम बना सकती है बीजेपी
2019 में चौथी परिस्थिति यह बन सकती है कि कांग्रेस सबसे बड़ा दल बनकर उभरे, लेकिन बहुमत से बहुत दूर रहे और उसे कई सारे दलों के सहयोग की जरूरत पड़े। ऐसी स्थिति में बीजेपी को 100 से 150 सीटों के बीच प्राप्त हो सकती हैं। मतलब कांग्रेस और बीजेपी दोनों ऐसी स्थिति में आ जाएं कि जो ज्यादा दलों का समर्थन हासिल कर ले, वही सरकार बना ले। ऐसी हालत में नरेंद्र मोदी और अमित शाह के पास दो विकल्प होंगे। पहला- कांग्रेस के नेतृत्व में सरकार बन जाने दी जाए और बीजेपी विपक्ष में बैठे। नरेंद्र मोदी विपक्ष के नेता बनें और सरकार के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोला जाए। जाहिर है ऐसी सरकार का ज्यादा दिन चलना संभव नहीं है। दूसरा विकल्प बीजेपी अन्य दलों के सहयोग से खुद सरकार बनाए, लेकिन इतनी कम सीटों में उसे प्रधानमंत्री पद की तिलांजलि देनी पड़ेगी। ऐसी सूरत में टीआरएस के चंद्रशेखर और ओडिशा के सीएम नवीन पटनायक को बीजेपी प्रधानमंत्री पद के लिए समर्थन देकर खुद सरकार से बाहर रहकर काम करे।

पांचवीं परिस्थिति- कांग्रेस को मिले बहुमत, राहुल गांधी पीएम बनें तब क्या करेंगे मोदी-शाह
2019 में पांचवीं परिस्थिति यह हो सकती है राहुल गांधी के नेतृत्व में आक्रामक चुनाव प्रचार के बाद कांग्रेस दशकों बाद देश में बहुमत पा जाए। ऐसा भी संभव है, क्योंकि जीएसटी, नोटबंदी, लगातार मॉब लिंचिग, उग्र हिंदुत्व के नाम पर अगर कांग्रेस जनता में आक्रोश भरने में कामयाब रही तो यह संभव है कि मतदाता छोटे दलों पर भरोसा करने की बजाय ठीक उसी तरह कांग्रेस को जनादेश दे, जैसा कि 2014 में बीजेपी को दिया। गठबंधन की मजबूरियों और परेशानी को देश की जनता भी भलि-भांति जानती है। ऐसे में संभव है कि मतदाता अगर नरेंद्र मोदी को खारिज करे तो वह विकल्प के तौर पर मायावती, अखिलेश यादव, लालू यादव जैसे छत्रपों पर विश्वास करने की बजाय राहुल गांधी के नाम पर मुहर लगा दे। ऐसी परिस्थिति बनी तब मोदी-शाह की जोड़ी के लिए बेहद कठिन हालात होंगे। ऐसे में देखना रोचक होगा कि वे क्या फैसले लेते हैं।












Click it and Unblock the Notifications