पहले कोरोना और फिर भारत-चीन तनाव ने किया परिवार से बहुत दूर......पूछ रहे 'दुनियाभर का पैसा किस काम का'
नई दिल्ली- मर्चंट नेवी के नाविकों का काम दुनिया के सबसे तनावपूर्ण प्रोफेशनों में से एक माना जाता रहा है। लेकिन, कोरोना वायरस फैलने के बाद जहाज पर मौजूद लोगों के तनाव में और कई गुना इजाफा हो गया है। दिक्कत ये है कि वायरस के डर से क्रू और उसके बड़े अफसरों को कई देशों में जहाज से उतरने तक की इजाजत नहीं मिल रही। सीमाएं सील हैं, इसलिए नए क्रू का जहाज में सवार होकर उनसे कार्यभार लेना भी मुश्किल है। यह सिलसिला तभी से शुरू है जब से वुहान से निकलकर कोरोना विश्वभर में फैलना शुरू हुआ है। जबकि, दूसरी तरफ दुनियाभर में अंतरराष्ट्रीय माल ढुलाई का 90 फीसदी भार इन्हीं पानी के बड़े-बड़े जहाजों पर निर्भर है। कोरोना संकट में इनकी जिम्मेदारी और बढ़ चुकी है। मेडिकल उपकर, दवा और तेल की सप्लाई चेन बनाए रखने के लिए ये लोग दिनरात अपने काम में जुटे हुए हैं। लेकिन, इन सबके बीच इस वक्त ये लोग किस मनोदशा में जी रहे हैं, उसके बारे में सुनकर भी बहुत तकलीफ होती है।

समय से कई महीने ज्यादा जहाज पर रहने को मजबूर
कोरोना वायरस फैलने का नतीजा ये हुआ है कि जिन क्रू मेंबर्स को महीनों पहले जहाज से उतर जाना था, अभी तक जहाज में ही ड्यूटी निभाने को मजबूर हैं। उनका चाहकर भी जहाज छोड़ना और अपने घर जाना संभव नहीं हो पा रहा। मामला पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो चुका है। मेडिकल इमरजेंसी समेत कई तरह की परेशानियां सामने आ रही हैं और सबसे जहाज पर ही निपटने की कोशिश हो रही है। घर से एक से बढ़कर एक संदेश पहुंच रहे हैं, लेकिन उनका परिवार के पास जाना संभव ही नहीं हो पा रहा है। ये परेशानियां दुनिया के हर देशों के नाविकों के साथ हो रही है। एक ऐसे ही कार्गो शिप के चीफ ऑफिसर ने नाम नहीं बताने की शर्त पर न्यूज 18 से कहा, 'हम रोजाना शरीर का तापमान मॉनिटर करते हैं और हम मौजूदा महामारी को लेकर सारे एहतियात बरत रहे हैं और उसके परिणामों से भी वाकिफ हैं....हर इंडस्ट्री की तरह शिपिंग भी प्रभावित हुई है। क्रू चेंज, पोर्ट ऑपरेशन, एहतियात....सबसे महत्वपूर्ण बात है कि शिप के स्टाफ का मनोबल हमेशा ऊंचा बना रहे..... '

भारत-चीन तनाव ने और बढ़ा दिया टेंशन
सच्चाई ये है कि जहाज पर तय समय से महीनों ज्यादा वक्त गुजारने के बाद नाविकों का मानसिक तनाव बढ़ता ही जा रहा है। वैसे तो इन्हें महीनों घर और परिवार से दूर रहने की आदत है, लेकिन इसबार कोरोना वायरस के चलते हालात ज्यादा बिगड़ चुके हैं, लोग जल्द से जल्द घर लौटना चाहते हैं, लेकिन उनकी जगह पर दूसरा क्रू कब आएगा कोई भरोसा ही नहीं है। कई नाविक अब इसके चलते डिप्रेशन का शिकार होने लगे हैं। ऊपर से भारतीय सेलर्स को भारत-चीन के बीच पैदा हुए विवाद ने और परेशान कर रखा है। नाम नहीं लेने की गुजारिश करने वाले चीफ ऑफसर पूछते हैं, 'क्या जंग जैसे हालात हो जाएंगे?'

धरती पर कदम रखना सपना बन गया
इंटरनेशनल सीफेरर्स वेलफेयर एंड एसिस्टेंस नेटवर्क के रीजनल डायरेक्टर चिराग बाहरी कहते हैं कि 'हम कभी भी इतने प्रभावित नहीं हुए हैं।..' वो जिस संस्था से जुड़े हैं वह नाविकों और उनके परिवारों की सहायता करने वाला एक अंतरराष्ट्रीय एनजीओ है। वे कहते हैं, '.... जो जहाज पर हैं उनके लिए यह बहुत ही तनाव में गुजरने वाला समय है, वह इतने-इतने दिनों से जहाज पर हैं, जिसकी कभी उम्मीद ही नहीं की जा सकती है।' उनका कहना है कि इसका मतलब ये नहीं है कि इस वक्त में बाकी व्यवसाय से जुड़े लोग परेशान नहीं हैं, लेकिन उन्हें कम से कम वीकेंड तो मिल जाता है, जरा उन नाविकों के बारे में सोचिए जो कई महीनों से जहाज पर हैं। उन्हें धरती पर कदम रखे हुए महीने गुजर चुके हैं। वो ऐसी स्थित में 24 घंटे मौजूद हैं, जहां सीधे खड़े होकर भी नहीं रह सकते, ठीक से खाना और सोना तो दूर की बात है। एक समय के बाद यह स्थिति खतरनाक हो सकती है।

दुनिया भर का पैसा है, लेकिन ऐसे वक्त में किस काम का
चिराग और उनके साथियों के पास नाविकों के कॉल की बौछार हो रही है। पिछले कुछ महीनों में उनकी संख्या बहुत ज्यादा बढ़ गई है। उन्होंने जब एक नाविक की परेशानी बताई तो लगा कि वाकई स्थिति कितनी गंभीर हो चुकी है। उन्होंने कहा, 'एक जहाज के एक क्रू मेंबर की पत्नी को बच्चा होने वाला था। वह जहाज पर करीब एक साल गुजार चुका था। दोनों बहुत ज्यादा तनाव में थे। पत्नी ज्यादा परेशान थी, क्योंकि वो जिस शहर में थी, वहां पाबंदियों के चलते उसका ख्याल रखने वाला उसके पास दूसरा कोई नहीं था। तनाव के चलते उसका बच्चा समय से पहले ही हो गया। वह नाविक जब मुझसे बात कर रहा था तो सिर्फ रोता ही रहा......ऐसे वक्त में आप इतने हेल्पलेस महसूस करने लगते हैं कि...........आपके पास दुनियाभर का पैसा है, लेकिन ऐसे वक्त में वह किस काम का......हमसे जो हो सकता था हमने किया, लेकिन फिर भी हमें उस लड़के को उसकी पत्नी के पास भेजने में 15 दिन लग गए.......'
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