LAC पर मनमानी नहीं चलने के बाद, सिर्फ टिड्डियों की वजह से इतना क्यों खुश हो रहा है चीन
नई दिल्ली- तीन साल पहले सिक्किम के डोकलाम के बाद इस साल लद्दाख की गलवान घाटी में भारतीय सेना ने जिस तरह से चीन की सेना के दांत खट्टे किए हैं, शायद चीन ने कभी उसकी कल्पना भी नहीं की थी। उसके दिमाग पर तो 1962 और 1967 का खुमार ऐसा छाया हुआ था कि भारत से भी मुंहतोड़ जवाब मिल सकता है, उसने सोचा ही नहीं होगा। यही वजह है कि चीन की सोच पर अब पाकिस्तानी मानसिकता वाला असर पड़ने लगा है। जिस तरह से पाकिस्तान अपनी अपार समस्याओं को भी भुलाकर भारत की तकलीफ से ही खुश होने लगता है, वही हाल अब ड्रैगन की भी होने लगी है। चीन की सत्ताधारी चाइनीज कम्युनिस्ट पार्टी के एक मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स की एंटी इंडिया प्रोपेगेंडा वाली खबरों पर गौर करें तो यही बात सामने आ रही है। मतलब कि चीन के शासक गलवान में मारे गए पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी के जवानों के बारे में उनके परिवार वालों तक को सफाई नहीं दे पा रहे हैं, लेकिन उन्हें इस बात की खुशी जरूर हो रही है कि भले ही गलवान में भारतीय सेना ने उन्हें खदेड़ दिया हो, भारत को इस वक्त लद्दाख के अलावा भी कई संकट झेलने पड़ रहे हैं। भारत की जिन परेशानियों से ड्रैगन खुश हो रहा है, उनमें से पश्चिमी और उत्तर-मध्य भारत में हो रहा टिड्डी दलों का अटैक भी शामिल है।

ड्रैगन को पीएलए से ज्यादा टिड्डी दल पर भरोसा
लगता है कि शी जिनपिंग की सरकार को अब अपनी ताकतवर पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी की शक्ति से ज्यादा टिड्डी दल की ताकत पर यकीन हो चला है। चाइनीज कम्युनिस्ट पार्टी के हुक्कमरान इस भरोसे बैठे हैं कि टिड्डी दल के हमले के चलते शायद भारत उसके खिलाफ ट्रे़ड वॉर करने की साहस न दिखा पाए। चीन सरकार के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने भारतीय अखबारों का हवाला देकर लिखा है कि भारत कई दशकों बाद टिड्डी दल के सबसे खतरनाक हमले झेल रहा है, जिससे वहां फसलों के पूरी तरह से बर्बाद होने की आशंका पैदा हो गई है। इससे भारत में भुखमरी के हालात पैदा हो जाएंगे। इस रिपोर्ट में आईटी हब गुरुग्राम से लेकर राजधानी नई दिल्ली तक में टिड्डी दल के घुसने की खबरों को बड़े ही चटकारे लेकर जगह दी गई है।
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टिड्डियों के हमले से इसलिए खुश हो रहे हैं जिनपिंग
ग्लोबल टाइम्स लिखता है कि इतिहास में हुए टिड्डी दल के हमलों को देखते हुए इसबार का हमला बहुत ही खतरनाक लगता है, जिसे कंट्रोल करने के लिए भारत को बहुत ज्यादा कोशिशों की जरूरत है। लेकिन, अगर टिड्डियों पर समय रहते काबू नहीं किया गया तो भारत में सिर्फ कृषि ही चौपट नहीं हो जाएगी, बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था ही धाराशायी हो सकती है। चीन इस उम्मीद में बैठा है कि भारत पहले से ही आर्थिक तंगी झेल रहा है, उस स्थिति में टिड्डियों के हमले का जो असर होगा, वह भारत में गरीबी और बढ़ा देगा और देश में आर्थिक विसमता भी बहुत ज्यादा बढ़ जाएगी।

भारत में कोरोना की संख्या देखकर भी खुश हो रहा है चीन
कोरोना वायरस से दुनियाभर में हुई 5,00,000 से ज्यादा मौतों के लिए जिम्मेदार चीन भारत में करीब 5,50,000 लाख संक्रमित मामलों को देखकर भी बहुत ज्यादा खुश हो रहा है। चाइनीज अखबार लिखता है कि लगता है कि भारत में कोविड-19 बेकाबू हो चुका है। चीने कह रहा है कि इसने पहले ही देश की अर्थव्यवस्था पर बहुत ज्यादा प्रभाव डाला है और अब तो हालात और ज्यादा बिगड़ने की आशंका है। वह इस बात से खुश है कि ज्यादातर बड़ी रेटिंग एजेंसियों ने भारत को निम्नतम निवेश स्तर पर रखा है और कोरोना के जोखिम के चलते इसके आउटलुक को निगेटिव में रख दिया है। ऊपर से टिड्डी दल का हमला तो वहां की अर्थव्यवस्था पर जले पर नमक छिड़कने जैसा है।

इस वजह से बहुत आशंकित हो रहा है चीन
भारत के बारे में इतना कुछ बुरा सोचने के बाद चीन ने भारत से अपना असल डर और शातिर इरादा भी जाहिर किया है। ग्लोबल टाइम्स लिखता है कि भारत की हालत इतनी पतली है, फिर भी वहां चीन विरोधी भावनाएं भड़काई जा रही हैं। चीन के उत्पादों के बहिष्कार की बात की जा रही है। निवेश की मनाही की बात हो रही है। लेकिन, उसका दावा कि मौजूदा स्थिति में भारत इतनी चुनौतियों में फंसा हुआ है कि वह चीन के साथ ट्रेड वॉर छेड़ने में पूरी तरह असमर्थ है। चीन इस उम्मीद में है कि भारत भले ही सीमा पर उसकी चुनौतियों का सामना करने में सक्षम है, लेकिन कोरोना वायरस, लॉकडाउन और अब टिड्डी दल के हमले की वजह से ऐसे उलझ गया है कि उसे चीन की मदद की दरकार पड़ सकती है। ग्लोबल टाइम्स ने बाकायदा लिखा है कि 'हमें अभी भी उम्मीद है कि भारत-चीन के बीच तनाव कम हो सकता है और वह अलग-थलग पड़े भारत की सहायता के लिए चीन को सहायता की इजाजत दे सकता है।'

चीन विरोधी भड़की भावना से डर गया है ड्रैगन
आखिरकार मुद्दे की बात पर लौटते हुए चीन की ओर से भारत में उसके खिलाफ भड़की भावना पर मरहम लगाते हुए कहा गया है कि हम भारतीयों के राष्ट्र गौरव की भावना समझते हैं, लेकिन उन्हें समझना चाहिए गलवान घाटी में दोनों ओर की सेनाओं को नुकसान हुआ है; इसलिए इस समय भावना भड़काने की बजाय उसे शांत करने की आवश्यकता है। चीन ने यह रोना भी रोया है कि भारत में कुछ नेता चीन के खिलाफ लोगों को उकसा रहे हैं। लेकिन, वे ये नहीं सोच रहे कि भारतीय अर्थव्यवस्था अभी इस हालत में नहीं है कि वह इसे झेल सके। यानि चीन शातिराना अंदाज में घुमा-फिराकर जो कहना चाह रहा है, उसका मतलब ये है कि उसे गलवान में अपनी सेना के इस कदर पिटने की उम्मीद नहीं थी और उसके बाद भारतीयो में जिस कदर नाराजगी भड़की है और उसे पूरी दुनिया का साथ मिल रहा है, उसने चीन को अंदर ही अंदर हिला दिया है। उसे डर हो रहा है कि उसे आने वाले दिनों में लेने के देने न पड़ जाएं।
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