Karnataka News: कर्नाटक में सरकारी अस्पतालों की फीस बढ़ी, स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव ने दी सफाई
Karnataka News: कर्नाटक के सरकारी अस्पतालों में मरीजों के इलाज पर लगने वाली यूजर फीस में बढ़ोतरी को लेकर राज्य के स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव ने नई दरों का बचाव किया है। यह संशोधन 1 नवंबर से लागू किया गया है और इसका प्रभाव बेंगलुरु मेडिकल कॉलेज और रिसर्च इंस्टीट्यूट से जुड़े विक्टोरिया, मिंटो, वानी विलास, सुपर स्पेशलिटी और ट्रॉमा एवं इमरजेंसी केयर अस्पतालों पर पड़ रहा है।
न्यूनतम बढ़ोतरी का दावा
मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह फीस वृद्धि न्यूनतम है और इसका उद्देश्य जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ाना नहीं है। यह बदलाव कई वर्षों बाद किया गया है। जिसमें फीस में 10 से 20 प्रतिशत तक की वृद्धि की गई है। उदाहरण के तौर पर पहले जो सेवा 10 रुपये में उपलब्ध थी। अब 20 रुपए में मिलेगी और 20 रुपए वाली सेवा के लिए अब 40 या 50 रुपए देने होंगे। राव ने मुद्रास्फीति और आर्थिक कारकों का हवाला देते हुए कहा कि मौजूदा समय में पिछली दरों की तुलना करना उचित नहीं है।

विशेष और सामान्य वार्डों में वृद्धि
एकल बिस्तर का शुल्क 750 रुपए से बढ़ाकर 2,000 रुपए प्रति दिन। दो-व्यक्ति आवास का शुल्क 750 रुपए से बढ़ाकर 1,000 रुपए। सामान्य वार्ड शुल्क 15 रुपए प्रति दिन से बढ़ाकर 50 रुपए। पंजीकरण शुल्क और अन्य शुल्क इन-पेशेंट रजिस्ट्रेशन शुल्क 25 रुपए से बढ़ाकर 50 रुपए। इन-पेशेंट बिस्तर शुल्क 30 रुपए से बढ़कर 50 रुपए। आउट पेशेंट डिपार्टमेंट पंजीकरण शुल्क 10 रुपए से बढ़ाकर 20 रुपए। मरीजों को अतिरिक्त अस्पताल प्रक्रिया शुल्क भी देना होगा।
फीस बढ़ोतरी पर मंत्री का तर्क
स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव ने कहा कि ये संशोधन अभूतपूर्व नहीं हैं। उन्होंने पिछली सरकारों के कार्यकाल में पानी और बिजली के बिलों में किए गए संशोधनों का उदाहरण देते हुए कहा कि समय-समय पर इस तरह के कदम आवश्यक होते हैं। मंत्री ने भरोसा दिलाया कि इस वृद्धि से जरूरतमंद और गरीब वर्ग को कोई नुकसान नहीं होगा। क्योंकि सरकार की गारंटी योजनाओं के तहत उनका इलाज जारी रहेगा।
जनता और विपक्ष की प्रतिक्रिया
हालांकि इस बढ़ोतरी को लेकर विपक्ष और आम जनता के बीच असंतोष है। कई लोगों का कहना है कि यह वृद्धि गरीबों के लिए सरकारी अस्पतालों में इलाज कराना मुश्किल बना सकती है।
यह फीस वृद्धि कर्नाटक की स्वास्थ्य सेवाओं में वित्तीय स्थिरता लाने का प्रयास है। हालांकि सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि इस कदम से गरीब और वंचित वर्ग प्रभावित न हो और सरकारी अस्पतालों में इलाज सुलभ बना रहे।
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