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टेक्सटाइल और गारमेंट्स में GST की दरों में बढ़ोत्‍तरी के प्रस्ताव को लेकर व्यापारियों में भय,पीएम को लिखा पत्र

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बेंगलुरू, 24 सितंबर। टेक्सटाइल और गारमेंट्स में GST की दरों में बढ़ोत्‍तरी के प्रस्ताव को लेकर व्यापारियों में भय का महौल है। कोरोना काल में व्‍यापार में अब तक काफी घाटा खा चुके व्‍यापारियों में टेक्‍सटाइल और गारमेंट्स में जीएसटी की दरों में 12 प्रतिशत की बढ़ोत्‍तरी संबंधी केद्र सरकार के प्रस्‍ताव को लेकर काफी गुस्‍सा है।

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गुरुवार को जीएसटी परिषद की 45वीं बैठक में कपड़ा उद्योग पर जीएसटी दर में बदलाव पर फिर से विचार करने का प्रस्ताव किया गया है। कर्नाटक होजरी एंड गारमेंट एसोसिएशन के संयोजक कराधान समिति और पूर्व अध्यक्ष सज्‍जन राज मेहता ने इस विषय पर बात करते हुए बताया कि टेक्सटाइल और गारमेंट्स की दर को 12 फीसदी तक बढ़ाने के प्रस्ताव को लेकर व्यापारियों में भय, आक्रोश है, चाहे बिक्री मूल्य कुछ भी हो । इससे अनुचित कठिनाई होगी क्योंकि उद्योग पिछले कुछ वर्षों में सबसे बुरी तरह प्रभावित क्षेत्र में से एक है। सज्‍जन मेहता ने बताया कि रेडीमेड गारमेंट्स की दरों में प्रस्तावित परिवर्तन के संबंध में पीएम मोदी को एक पत्र लिखा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और देश की वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमन को भेजे गए ज्ञापन में व्‍यापारियो ने बताया कि इससे व्‍यापारियों ही नहीं आम जनता पर अत्‍यधिक प्रभाव पड़ेगा। पीएम को लिखे गए पत्र में व्‍यापारियों ने लिखा है टेक्सटाइल और रेडीमेड गारमेंट के लिए जीएसटी दर वर्तमान में 5% और 12% के 2 स्लैब के अंतर्गत है। यह करों में एक विसंगति की ओर जाता है और खुदरा विक्रेताओं के हाथों में बहुत अधिक कर बहिर्वाह का कारण बनता है। इसलिए हम आपसे सभी टेक्सटाइल और रेडीमेड गारमेंट पर 5% की एकल दर रखने का अनुरोध करते हैं, जिससे व्यापार के लिए व्यापार करने में आसानी होगी।

इसके साथ ही जीएसटी परिषद में पेश किया जा रहा प्रस्ताव पूरी तरह से अव्यावहारिक है क्योंकि यह कपड़ा और रेडीमेड कपड़ों के तहत सभी वस्तुओं पर जीएसटी दर को बढ़ाकर 12% करना चाहता हैं । जरूरी वस्तु रोटी ,कपड़ा और मकान पर सरकार संयम बरते ।

व्‍यापारियों ने कहा ये दर में यह वृद्धि न केवल ग्राहकों अर्थात हर तबके के नागरिक पर बोझ बढ़ाएगी बल्कि छोटे व्यवसायों के भविष्य को भी खतरे में डाल देगी जो पहले से ही उच्च किराये की लागत, कम और धीमी वसूली से जूझ रहे हैं।

एसोसिएशन ने कहा हम इस बात पर भी प्रकाश डालना चाहते हैं कि हमारा क्षेत्र विशेष रूप से महिलाओं के लिए अर्ध कुशल श्रमिकों के लिए सबसे अधिक रोजगार पैदा करता है जिससे उनका सशक्तिकरण होता है और परिवार की कुल घरेलू आय में वृद्धि होती है। इसे ध्यान में रखते हुए, दर में वृद्धि से उद्योग को अपूरणीय क्षति और नौकरी के नुकसान की संभावना है।

व्‍यापारियों ने पीएम को ये बताया है कि इस क्षेत्र ने कोविड के दौरान पीपीई किट, मास्क और अन्य आवश्यक वस्तुओं के निर्माण और वितरण में बहुत योगदान दिया है। सरकार बड़े पैमाने पर मेक इन इंडिया पहल को बढ़ावा दे रही है और इसे कपड़ा क्षेत्र के समर्थन से कई गुना बढ़ाया जा सकता है।

कर्नाटक होजरी एंड गारमेंट एसोसिएशन के अध्‍यक्ष डूंगरमल चौपड़ा ने बताया व्यापार को बढ़ावा देने के लिए ऐसे सभी सामानों पर दर को बिना किसी सीमा के 5% तक कम करने का एक बड़ा अवसर है, जो तभी संभव है जब सरकार कपड़ा क्षेत्र को पूरे दिल से समर्थन दे। इसके साथ ही पीएम मोदी से व्‍यारियों ने अनुरोध किया है कि टेक्सटाइल और रेडीमेड उत्पादों पर जीएसटी दर को 5% तक कम करें जिससे इस कठिन समय में छोटे व्यवसायों और उपभोक्ताओं को मदद मिलेगी।

English summary
Fear among traders, letter to PM regarding proposal to increase GST rates in textiles and garments
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