किसान आंदोलन: क्यों नहीं मिली पंजाबी गायक गुरदास मान को मंच से बोलने की इजाजत
नई दिल्ली- पंजाबी गायक गुरदास मान को दिल्ली के पास सिंघु बॉर्डर पर किसानों के विरोध प्रदर्शन के दौरान मंच से नहीं बोलने दिया गया। हालांकि, मंच संचालक उन्हें मंच पर समय देना चाहते थे, लेकिन धरने में बैठे युवाओं ने इसका सख्त इतना विरोध कर दिया, जिसके चलते मंच संचालकों को यह आइडिया छोड़ देना पड़ा। किसानों के धरने में शामिल कई लोग ऐसे थे, जिनका आरोप था कि मान ने किसानों का समर्थन देने में देर कर दी है। लेकिन, वहां पर जो उनके खिलाफ युवाओं में नाराजगी दिखी उसकी वजह कुछ और ही थी। चौंकने वाली बात ये है कि पंजाबी के बेहतरीन गायक पर पंजाबी भाषा अपमान का आरोप है और वहां पर इसी बात को लेकर उनका इतना विरोध हुआ कि वह मंच से किसानों को संबोधित नहीं कर पाए।

पंजाबी भाषा के अपमान का कहां से उठा मामला ?
पिछले साल 13 सितंबर को ऊर्दू शायर सरदार पंछी और हिंदू लेखक हुकम चंद राजपाल ने कथित रूप से पंजाबी भाषा के खिलाफ कुछ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। यह मामला पटियाला के पंजाबी यूनिवर्सिटी के भाषा विभाग का है, जिसमें हिंदी दिवस पर कार्यक्रम आयोजित किया गया था। हालांकि, पंछी और राजपाल दोनों ने ही पंजाबी भाषा प्रेमियों से उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए माफी मांग ली थी। लेकिन, सोशल मीडिया पर यह विवाद कायम रहा और अकाल तख्त के जत्थेदार भी इसमें कूद पड़े।

इस विवाद से गुरदास मान का कैसे जुड़ गया नाम ?
जिस दौरान सोशल मीडिया पर यह विवाद गर्म था, पंजाबी गायक गुरदास मान कनाडा के दौरे पर थे। 20 सितंबर, 2019 को उनका एक रेडियो शो था, जिसमें उनसे इस मामले पर प्रतिक्रिया मांगी गई। इस पर मान ने जवाब दिया कि, 'ऐसे विवाद फालतू लोगों द्वारा पैदा किए गए हैं। वो सिर्फ सोशल मीडिया पर आलोचना करते हैं। लेकिन, जो लोग सही में अपनी मातृभाषा और संस्कृति को प्रमोट करना चाहते हैं वो इसके लिए समर्पित होकर काम करें।' उन्होंने कहा, 'लोग हिंदी पर बहस कर रहे हैं। मैं कहूंगा कि हिंदुस्तानी होनी चाहिए, जिसमें ऊर्दू और पंजाबी शब्द भी शामिल होने चाहिए।.......इसमें कुछ भी गलत नहीं है। लोग हिंदी फिल्में देखते हैं और हिंदी गाने सुनते हैं। जब आप हिंदी सुन सकते हैं तब आप हिंदी पढ़ भी सकते हैं। आपको सभी भाषा सीखनी चाहिए, आपके पास जो है उसे नकारे बिना।'

हिंदी भाषा पर क्या कहा था ?
गुरदास मान अपने लय में थे, वो इतने पर ही नही रुके। उन्होंने कहा था, 'यह जरूरी है कि एक देश में एक भाषा होनी चाहिए। जिससे कि आदमी दक्षिण में भी बात कर सके। और अगर आप वहां बात नहीं कर सके तो फिर हिंदुस्तानी का क्या इस्तेमाल है। फ्रांस की अपनी भाषा है और जर्मन की भी। तब अगर हमारा देश एक भाषा में बात करना शुरू करता है तो इसमें नुकसान क्या है? अगर हम अपनी मातृभाषा पर इतना जोर दे रहे हैं तो हमें मां की बहन (मासी या हिंदी) पर भी ध्यान देना चाहिए।'

अपने शब्दों पर कायम रहे गुरदास मान
गुरदास मान के बयान पर पंजाब में भारी हंगामा मचा। लेकिन, वह अपने शब्दों पर डटे रहे। रेडियो टॉक शो के अगले दिन उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस में फिर कहा, 'यह जरूरी है कि मातृभाषा को प्यार, सम्मान दें और उसे सिखाएं। लेकिन, 'मासी' की भी अपनी अहमियत है। जब हम सारे भारत की बात करते हैं, तब यह हमारी मां है और हमें उसकी भाषा का सम्मान करना चाहिए। एक देश, एक भाषा जरूरी है। '

मान से कहां हो गई चूक?
एक दिन बाद उनका कनाडा में ही दूसरा शो था। कई प्रदर्शनकारी वहां पहुंच गए, जो चाहते थे कि मान माफी मांगें। लेकिन, मान इसके लिए तैयार नहीं थे और वो प्रदर्शनकारियों के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल कर गए। उनके इस रवैए से उनके चाहने वालों को भी धक्का लगा, जो चाहते थे कि इस मामले को धीरे-धीरे शांत होने दिया जाए।

मान के खिलाफ प्रदर्शन
उस घटना के बाद पंजाब में गुरदास मान को कई बार विरोध प्रदर्शनों का सामना करना पड़ा। कोलकाता में भी उनका विरोध हुआ। विरोध की वजह से उन्हें कई शो कैंसिल करने पड़े। मान इन विरोधों की वजह से परेशान हुए, लेकिन अपनी बातों से पीछे नहीं हटे। पिछले साल नवंबर में एक शो के दौरान उन्होंने कहा, 'आप अपने बच्चों को हिंदी जरूर सिखाएं। सिर्फ पंजाबी तक ही सीमित रहने से आप वहीं तक रह जाएंगे जहां अभी आप हैं।' आरोप लगाए गए कि वह भाजपा में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर उन्हें ट्रोल करना बंद नहीं हुआ।

किसान आंदोलन के दौरान मान ने दी सफाई
आखिरकार गुरदास मान ने पिछले हफ्ते एक रेकॉर्डेड मैसेज के जरिए पूरे विवाद पर अपना पक्ष स्पष्ट करने की कोशिश की। इसमें उन्होंने कहा, 'आप मुझे गाली दे सकते हैं, लेकिन, कृप्या पंजाबियत पर मेरे दावे को मुझसे ना छीनें। मैंने इसे ही कमाया है और जीया है। यह एक छोटा सा मामला था, जो गलत नहीं था, लेकिन उसे गलत तरीके से पेश किया गया। मुझे पंजाबी पर एक विवाद को लेकर पंजाब में जवाब देने को कहा गया। मैंने सिर्फ इतना कहा कि पूरे देश के लिए एक भाषा होनी चाहिए। यह एक राष्ट्र भाषा है। लेकिन, मैंने ऐसा कभी नहीं कहा कि पंजाब से पंजाबी खत्म कर देनी चाहिए। मैंने हमेशा पंजाबी की प्रशंसा की है।....सबको अच्छे और बुरे दिन देखने पड़ते हैं। '

'दिल दा मामला है' से मिली राष्ट्रीय पहचान
मंगलवार को उन्होंने एक ट्वीट के जरिए किसानों की लड़ाई में साथ रहने की बात कही है। उन्होंने पंजाबी में जो कुछ लिखा है, उसकी हिंदी कुछ इस तरह से है, 'कहने के लिए तो बहुत है, लेकिन मैं केवल यही कहूंगा कि मैं आपके साथ हमेशा से ही था और हमेशा ही आपके साथ रहूंगा........किसान जिंदाबाद है और वो हमेशा जिंदाबाद रहेगा।' गुरदास मान को पंजाबी गाने 'दिल दा मामला है' से राष्ट्रीय पहचान मिली। 1980 का उनका यह गाना पूरे हिंदी भाषी क्षेत्र में भी बहुत ही लोकप्रिय हुआ था। वह फिल्मों से भी जुड़े रहे हैं और बॉलीवुड की ब्लॉक बस्टर 'गदर:एक प्रेमकथा' भी उन्हीं की एक फिल्म 'शहीद-ए-मोहब्बत बूटा सिंह' की पटकथा पर ही आधारित बताई जाती है। उनके पास 35 के करीब एल्बम और 300 से अधिक गाने लिखने का अनुभव है।












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