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Farmers Protest: आंदोलन में अपना 'दर्द' लेकर पहुंच रहे गन्ना किसान, बकाया भुगतान नहीं होने से हैं परेशान

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Farmers Protest: मोदी सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली बॉर्डर पर किसानों का प्रदर्शन जारी है। किसानों को चिंता है कि नए कानून से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) खत्म हो जाएगा। इसके अलावा उन्हें कृषि मंडियों के भविष्य की भी चिंता है, लेकिन इस आंदोलन में कुछ किसान ऐसे हैं, जिनकी समस्या MSP से भी बड़ी है और वो हैं गन्ना किसान। जिनकी फसलें चीनी मिल में तो पहुंच जाती हैं, लेकिन उनको महीनों तक अपने पैसे का इंतजार करना पड़ता है।

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    दिल्ली-यूपी सीमा पर गाजीपुर में चल रहे प्रदर्शन में यूपी के कई गन्ना किसान पहुंचे हैं। वैसे तो अब सरकार ने गन्ने की डिलीवरी के 14 दिनों के अंदर भुगतान करने का आदेश दिया है, लेकिन 2019-20 के चीनी सीजन में बहुत से किसानों को अभी तक बकाए का भुगतान नहीं किया गया। इसके अलावा अभी तक यूपी सरकार ने चालू सत्र के लिए एसएपी की घोषणा नहीं की, जबकि अक्टूबर के अंत में मिलों ने पेराई का काम शुरू कर दिया था।

    इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक बागपत जिले से आंदोलन में पहुंचे एक किसान राकेश तोमर ने कहा कि उन्होंने रमाला सहकारी चीनी मिल को 2019-20 के सत्र में 2 जून को 15 पर्चियों के लिए गन्ने की सप्लाई की थी, लेकिन अभी तक उनके 4 पर्चियों का भुगतान नहीं हो पाया है। वहीं अब उन्होंने 6 पर्चियों के लिए मौजूदा सत्र में सप्लाई की है। 3 जनवरी को शामली में अपर दोआब शुगर मिल को 20.05 क्विंटल गन्ना सप्लाई करने वाले अनुज कलखंडी भी गाजीपुर आए हैं। उनके मुताबिक उन्होंने पिछले साल 2400 क्विटंल गन्ना चीनी मिल पहुंचाया था, लेकिन 6 अप्रैल के बाद से कोई भुगतान नहीं मिला।

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    योगी सरकार में सबसे कम बढ़े दाम

    जब यूपी में बहुजन समाजवादी पार्टी की सरकार थी, तो गन्ने का दाम 125 से 240 रुपये प्रति क्विंटल हो गया। इसके बाद समाजवादी पार्टी की सरकार आई तो ये दाम 240 से 305 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया। वहीं योगी सरकार ने 2017-18 के बाद से एसएपी नहीं बढ़ाया। किसान आंदोलन को देखते हुए योगी सरकार भी अब गन्ना किसानों के लिए एक्टिव हुई है और इस सत्र में गन्ने का एसएपी 10 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाने पर विचार हो रहा है। सूत्रों के मुताबिक इस हफ्ते योगी सरकार नई कीमतों की घोषणा कर सकती है।

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    English summary
    Farmers Protest: sugarcane farmers reached delhi for dues
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