Farmers Protest: किसानों को संसद घेराव की इजाजत नहीं, दिल्ली पुलिस ने दिया कोरोना का हवाला
नई दिल्ली, 18 जुलाई। कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे किसान संगठन अब संसद के सामने केंद्र सरकार का घेराव करने की योजना बना रहे हैं। 19 जुलाई से संसद का मानसून सत्र शुरू हो रहा है ऐसे में आंदोलनकारी किसान पार्लियामेंट के बाहर धरना प्रदर्शन कर सरकार तक अपनी बात पहुंचाना चाहते हैं, इस संबंध में रविवार को किसान नेताओं और दिल्ली पुलिस के अधिकारियों से बीच एक बैठक हो रही है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक दिल्ली पुलिस किसानों को संसद के बाहर प्रदर्शन करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। पुलिस ने कहा कि कोरोना वायरस की गाइडलाइन के मद्देनजर किसानों को संसद के पास प्रदर्शन की योजना पर फिर से विचार करना चाहिए।

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मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कृषि कानूनों के खिलाफ 22 जुलाई को किसान संगठन संसद का घेराव करना चाहते हैं, जिसे लेकर दिल्ली पुलिस और किसान नेताओं के बीच सिंघु बॉर्डर के पास मंत्रम बैंक्विट हॉल में बैठक हुई। इस मीटिंग में ज्वाइंट सीपी और डीसीपी स्तर कई अधिकारी मौजूद हैं, वहीं किसानों के 9 सदस्यों का प्रतिनिधिमंडल भी मंत्रम बैंक्विट हॉल पहुंचा है। अब तक मिल रही जानकारी के मुताबिक दिल्ली पुलिस ने संसद का घेराव करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है, हालांकि किसानों को सीमित संख्या में जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने का विकल्प दिया जा सकता है।
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बंद हो सकते हैं 7 मेट्रो स्टेशन
इस बीच न्यूज एजेंसी एएनआई के हवाले से खबर आई है कि दिल्ली पुलिस ने कल संसद के पास किसानों के विरोध के मद्देनजर दिल्ली मेट्रो के सात मेट्रो स्टेशनों पर अतिरिक्त निगरानी रखने और जरूरत पड़ने पर उन्हें बंद करने के लिए डीएमआरसी को पत्र लिखा है। वहीं किसान नेता शिव कुमार कक्का ने कहा, 'हमने दिल्ली पुलिस को बताया कि सिंघू बॉर्डर से हर दिन 200 लोग संसद तक मार्च करेंगे। प्रत्येक व्यक्ति के पास पहचान बैज होगा। हम सरकार को प्रदर्शनकारियों की सूची सौंपेंगे। पुलिस ने हमसे प्रदर्शनकारियों की संख्या कम करने को कहा, जिसे हमने मना कर दिया।'
रोजाना 200 लोग होंगे जमा
बता दें कि बैठक से पहले किसान नेता और भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा था कि कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार बातचीत को तैयार नहीं है। इसलिए हम 22 जुलाई को दिल्ली जाएंगे और संसद के बाहर बैठेंगे। हर दिन 200 लोग वहां जमा होंगे। इसके अलावा किसान नेता राकेश टिकैत ने अपने ट्विटर हैंडल से एक पोस्टर भी जारी किया है, जिसमें सरकार पर निशाना साधते हुए लिखा है कि संसद अगर अहंकारी और अड़ियल हो तो देश में जनक्रांति निश्चित होती है।












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