Farmers Protest: वार्ता से पहले बोले टिकैत-'स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू करे सरकार '

Govt should implement Swaminathan's report & make law on MSP said Rakesh Tikait:नए कृषि कानून को वापस लेने की मांग को लेकर लेकर पंजाब-हरियाणा के किसान दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर डटे हुए हैं। आज किसान संगठनों के साथ सरकार के साथ 7वें दौर की वार्ता होने वाली है लेकिन इस अहम वार्ता से पहले भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा कि आज सरकार के साथ कई मुद्दों पर चर्चा होनी है। सरकार को समझना चाहिए कि बिना कानून को रद्द किए, किसान यहां से नहीं हटने वाला है। इस आंदोलन को किसान ने अपने दिल में ले लिया है और ऐसा में कृषि कानूनों को निरस्त करने से कम नहीं समझेगा। सरकार को स्वामीनाथन की रिपोर्ट को लागू करना चाहिए और एमएसपी पर कानून बनाना चाहिए।

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    Farmers Protest: स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू करे सरकार

    जहां किसान नेता ने ये बात कही है, वहीं दूसरी ओर मीटिंग से पहल रविवार को केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर (Agriculture Minister Narendra Singh Tomar) ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) के साथ बैठक की है। बताया जा रहा है कि, इस बैठक में आज होने वाली बैठक पर रणनीति पर चर्चा हुई है।

    'जब तक हमारी मांगें नहीं मान ली जाती हैं तब तक हम यहां से नहीं हटेंगे'

    बता दें कि, कड़ाके की ठंड और बारिश के बीच आंदोलन कर रहे प्रदर्शनकारी किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि तीन नए कृषि कानूनों को वापस लेने और न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानूनी स्वरूप प्रदान करने की उनकी दो बड़ी मांगें सरकार चार जनवरी की बैठक में नहीं मानती है तो वे अपना आंदोलन तेज करेंगे। किसान संगठनों ने कहा है, 'जब तक हमारी मांगें नहीं मान ली जाती हैं तब तक हम यहां से नहीं हटेंगे'।

    सकारात्मक परिणाम आने की संभावना

    मालूम हो कि इससे पहले कृषि मंत्री ने कहा था कि 30 दिसंबर को हुई पिछली बैठक सौहार्दपूर्ण वातावरण में हुई और अगली बैठक में किसानों और देश के कृषि क्षेत्र के हित में सकारात्मक परिणाम आने की संभावना है। हरियाणा किसान नेता विकास सीसर ने कहा था कि 4 जनवरी को सरकार के साथ होने वाली बैठक में कोई हल नहीं निकला तो निजी पेट्रोल पंप को छोड़कर सभी पेट्रोल पंप और मॉल बंद रहेंगे। मालूम हो कि इससे पहले की औपचारिक वार्ता में सरकार और किसान संगठनों के बीच बिजली की दरों में वृद्धि और पराली जलाने पर जुर्माना को लेकर किसानों की चिंताओं के हल के लिए कुछ सहमति बनी थी लेकिन तीन कृषि कानूनों को रद्द करने और एमएसपी के लिए कानूनी गारंटी के मुद्दों पर गतिरोध कायम रहा। फिलहाल सभी की निगाहें आज की बैठक पर है, देखते हैं कि मीटिंग के बाद किसान आंदलोन खत्म करते हैं या फिर ये आंदोलन और उग्र होता है।

    क्या है स्वामीनाथन रिपोर्ट

    मालूम हो कि 18 नवंबर 2004 को राष्ट्रीय किसान आयोग का गठन किया गया था। इस आयोग के चेयरमैन कृषि वैज्ञानिक और हरित क्रांति के जनक डॉ. एमएस स्वामिनाथन थे इसलिए ही इसे स्वामीनाथन रिपोर्ट के नाम से जाना जाता है। आयोग ने सिफारिश की थी कि किसानों को उनकी फसलों के दाम उसकी लागत में कम से कम 50 प्रतिशत जोड़ के दिया जाना चाहिए।

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