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Blind Bull Farmer Story: अपने अंधे बैल की आंखें बना किसान, लोग बोल रहे-'असली महाकुंभ तो इसी भाई ने नहाया'

Blind Bull Farmer Story: किसान और बैल की यह कहानी अनूठी है। इसमें पालतू पशु के प्रति मालिक का अटूट स्‍नेह है, जो हर किसी के दिल को छू लेने वाला है। अपना बैल अंधा हुआ तो किसान उसे बेचने की बजाय उसकी आंखें बन गया।

किसान और बैल की यह कहानी महाराष्‍ट्र के सोलापुर जिले के गांव वलूज की है। यहां के किसान इंद्रसेन मोटे के पास लंबे समय से एक बैल था, जिसका नाम सोन्‍या रखा हुआ था। आंखें नहीं होने के बावजूद सोन्‍या अपने मालिक इंद्रसेन मोटे के साथ खेतों में जुताई व सामान ढोने समेत तमाम करता है।

Blind Bull Farmer Story

ढाई साल की बैल सोन्‍या अचानक कैंसर की चपेट में आ गया। किसान इंद्रसेन मोटे ने बैल का खूब इलाज करवाया। कैंसर की वजह से बैल सोन्‍या को अपनी दोनों आंखें गंवानी पड़ी। पशु चिकित्‍सकों ने सोन्‍या की आंखें निकालकर धागे से टांके लगा दिए। बैल सोन्‍या को दिखना पूरी तरह से बंद हो गया।

अंधे बैल सोन्‍या को बेचने के लिए गांव वालों ने किसान इंद्रसेन पर दबाव बनाया। इंद्रसेन मोटे ने बैल की मुश्किल घड़ी आने पर उसे बेचने से इनकार कर दिया और बैल का ख्‍याल रखने का फैसला लिया। अब पिछले 12 साल किसान इंद्रसेन मोटे अपने अंधे बैल के लिए आंखें बना हुआ है।

बीबीसी से बातचीत में में इंद्रसेन मोटे कहती हैं कि सोन्‍या बैल उनके घर पर एक गाय से पैदा हुआ था। जन्‍म के समय उसे दोनों आंखों से दिखाई देता था। वह ढाई साल का हुआ तब उसकी एक आंख से आंसू बहने शुरू हो गए थे। खूब इलाज करवाया। अंत में उसकी आंखें निकलवानी ही पड़ी।

इंद्रसेन मोटे कहते हैं कि जब लोगों ने बैल सोन्‍या को बेचने को कहा तो पता था कि बिकने के बाद वह बूचड़खाने जाएगा और वहां उसका क्‍या ही हाल ही होना है? यह सोचकर भी हमारी रूह कांप उठी थी। ऐसे में बैल सोन्‍या को पालने का फैसला किया।

बीबीसी न्‍यूज हिंदी ने 25 फरवरी को अपने फेसबुक पेज पर बैल व किसान की दोस्‍ती का यह न्‍यूज वीडियो शेयर किया है, जिस पर लोग महाकुंभ स्‍नान से जोड़कर भी कमेंट कर रहे हैं। कमेंट में Çhëtáñ Dhyani लिखते हैं कि 'असली कुंभ तो इसी भाई ने नहाया। बाकी सब मिट्टी है। सब व्यर्थ है।' Devesh Raikwar ने लिखा-एक लाख कुंभ स्नान का फल पा लिए भाऊ तुमि।

उल्‍लेखनीय है कि उत्‍तर प्रदेश के प्रयागराज में 13 जनवरी 2025 से शुरू हुआ महाकुंभ 45 दिन बाद 26 फरवरी 2025 को सम्‍पन्‍न हो गया। महाकुंभ में अब 66.31 करोड़ ने संगम के पानी में डुबकी लगाई है।

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