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Video:पाकिस्तानी आर्मी की करतूत को भारत में कश्मीरियों पर जुल्म बताकर वायरल किया

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नई दिल्ली- हाल में सोशल मीडिया पर कुछ लोगों की बेरहमी से पिटाई का एक विडियो खूब वायरल हुआ। पाकिस्तान की ओर से दावा किया गया कि विडियो कश्मीर का है, जहां सेना के जवान कश्मीरी मुसलमानों की पिटाई कर रहे हैं। लेकिन, जब उस विडियो की गहराई से छानबीन की गई तो पता चला लोगों को बुरी तरह पीटने वाले लोग पाकिस्तानी सेना के ही जवान थे और जिनकी पिटाई हो रही थी, वे कश्मीरी नहीं पश्तून थे। यही नहीं वह विडियो कम से कम 10 साल पुराना है और उसमें पाकिस्तानी सेना की बर्बरता की घटना की जांच की बात भी खुद वहां की सेना कह चुकी थी। उस विडियो को सिर्फ इसलिए कश्मीर का बताकर अफवाह फैलाने की कोशिश की जा रही है, क्योंकि उनमें जिन लोगों की पिटाई हो रही है, वे सारे के सारे परंपरागत कपड़े पहने और जालीदार टोपी लगाए लोग हैं।

पश्तूनों को पीट रही है पाकिस्तानी आर्मी

पश्तूनों को पीट रही है पाकिस्तानी आर्मी

पाकिस्तान की झूठ का एक बार फिर पर्दाफाश हो गया है। फेसबुक और ट्विटर पर जो विडियो कश्मीरी मुसलमानों की पिटाई के नाम पर वायरल किया गया ह, उसके कैप्शन में ये गुजरारिश की गई है कि इसे दुनिया भर में ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं, ताकि लोगों को पता चले की कश्मीर में भारतीय सेना क्या कर रही है। इंडिया टुडे ने अपनी पड़ताल में पाया है कि वो विडियो पाकिस्तान का ही है और वो भी कम से कम 10 साल पुराना। विडियो में परंपरागत कुर्ता-पायजामा और गोल टोपी पहने लोगों की कुछ वर्दी वाले बुरी तरह से पिटाई कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हुए विडियो के दावों की जांच के लिए उसके मुख्य हिस्सों से एक-एक फ्रेम निकाले गए। गहराई से छानबीन में ये तथ्य सामने आया कि विडियो मिलिट्री डॉट कॉम नाम की एक वेबसाइट पर अपलोडेड है, जिसपर वार्निंग ग्राफिक का कैप्शन लगा है कि पाकिस्तान में बेकसूर पश्तूनों से इसी तरह पूछताछ होती है, बिना कोर्ट के और बिना ट्रायल के। इस विडियो को पाकिस्तान के स्वात में मुल्ला एफएम के नाम से कुख्यात तालिबानी फजुलुल्लाह के एक सहयोगी ने 9 मार्च 2011 को डाला है।

तालिबानी समझकर बेरहमी से पिटाई

तालिबानी समझकर बेरहमी से पिटाई

विडियो की असलियत का पता लगने के बाद जब पिटाई के कारणों की छानबीन शुरू कई गई तो कुछ और भी चौंकाने वाले खुलासे सामने आए। गूगल में पाकिस्तान आर्मी बीटिंग पश्तून्स इन स्वात के नाम से सर्च किया गया। तब अलजजीरा डॉट कॉम में इसकी सच्चाई भी सामने आ गई। 2 अक्टूबर, 2009 के न्यूज आर्टिकल के मुताबिक पाकिस्तानी आर्मी उन लोगों को इसलिए पीट रही थी क्योंकि उन्हें शक था कि उनके तार तालिबान से जुड़े हैं। उस न्यूज रिपोर्ट में पाकिस्तानी सेना के तत्कालीन प्रवक्ता मेजर जनरल अतहर अब्बास की वह प्रतिक्रिया भी मिली है जिसमें उन्होंने कि लोगों की पिटाई की जांच की बात कही थी।

पाकिस्तानी वायरल विडियो देखने के लिए यहां पर क्लिक करें

कश्मीर का नहीं है विडियो

कश्मीर का नहीं है विडियो

हालांकि, उस रिपोर्ट में भी इस बात की जानकारी नहीं मिली कि इस विडियो को कहां शूट किया गया था। लेकिन, इतना तो तय है कि सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस विडियो का कश्मीर से कुछ भी लेना-देना नहीं है और यह पाकिस्तान में ही बना है और इसमें करतूत भी पाकिस्तानी सेना की ही कैद हुई है।

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English summary
Fake Video:Pakistani Army's 10-year-old video viral as Kashmiri
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