Farmers Protest: PM मोदी-तोमर के नाम किसानों का खुला पत्र-'सारी बातें तथ्यहीन'

Farmers Protest:कृषि कानून के खिलाफ किसानों का आंदोलन पिछले 25 दिनों से जारी है, किसान पीछे हटने को तैयार नहीं हैं तो वहीं सरकार की कोशिश इस मुद्दे को बातचीत से सुलझाने की है, वो कानून को रद्द नहीं करना चाहती है। कृषि मंत्री तोमर ने किसानों को आठ पन्नों का खुला पत्र लिखा था, जिसके बाद पीएम मोदी ने भी किसानों से अपील की थी वो इस खत को जरूर पढ़े, कृषि कानून आपके खिलाफ नहीं है। जिस पर प्रतिक्रिया देते हुए अब प्रदर्शनकारी किसानों की तरफ से अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआईकेएससीसी) ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के नाम एक खुला पत्र लिखा है।

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    तोमर के पत्र पर बोली किसान संघर्ष समिति-सारी बातें तथ्यहीन

    पत्र में किसानों के विरोध-प्रदर्शन को लेकर सरकार की ओर से लगाए तमाम आरोपों का खंडन किया गया है। अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि 'उनके द्वारा कही गई हर बात तथ्यहीन है।यह कहना दुर्भाग्यपूर्ण है कि किसानों के मुद्दों को हल करने की कोशिश में, पिछले दो दिनों में आपने किसानों की मांगों और उनके विरोध पर जो हमला किया है, वह बताता है कि किसानों के साथ आपका कोई सहानुभूति नहीं है। संभवतः आपने उनकी शिकायतों को हल करने के अपने इरादे को बदल दिया है।'

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी की थी अपील

    मालूम हो कि केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने आठ पन्नों का खत लिखकर कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों से खास अपील की थी। इस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट कर किसानों से कहा था कि वह कृषि मंत्री के खत को जरूर पढ़ें। उन्होंने देशवासियों से भी गुजारिश की थी कि वो इसे अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं। दरअसल किसानों के विरोध का कोई हल नहीं निकलते देख कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने किसानों को 8 पन्ने की चिट्ठी लिखकर सरकारी की सारी बातें उन्हें समझाने की कोशिश की थी और कहा था कि वो भी किसान परिवार से ही आते हैं।

    पीछे हटने को तैयार नहीं हैं किसान, जिद पर अड़े

    लेकिन उनके पत्र का कोई असर किसानों पर नहीं हो रहा है, वो कृषि कानून को वापस लेने की मांग पर अडिग है और साथ ही किसान संगठनों ने अभी तक के आंदोलन के दौरान शहीद होने वाले किसानों को शहीदों का दर्जा दे दिया है। जिनको श्रद्धांजलि देने के लिए अब दिल्ली के बॉर्डर समेत पंजाब भर में उनके लिए श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित किए जाने का निर्णय किया है।

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