'मैंने अपनी ही कम्युनिटी में झेला विरोध', CJI बीआर गवई का बड़ा बयान, बुलडोजर एक्शन पर भी दिया सख्त संदेश
Chief Justice of India BR Gavai: भारत के चीफ जस्टिस (CJI) बीआर गवई ने गोवा हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के एक कार्यक्रम में अपने अब तक के सबसे बेबाक विचार रखे। उन्होंने बताया कि किस तरह उन्हें आरक्षण में अनुसूचित जातियों (SC) की सब-क्लासिफिकेशन पर दिए गए अपने फैसले को लेकर अपनी ही कम्युनिटी के लोगों से भारी आलोचना झेलनी पड़ी।
बीआर गवई ने साफ कहा कि वे अपने फैसले जनता की इच्छाओं के हिसाब से नहीं, बल्कि कानून और अपने अंतरात्मा की आवाज के आधार पर लिखते हैं। गवई ने कहा -"मेरे फैसले की आलोचना मेरी ही कम्युनिटी के लोगों ने की, लेकिन मैं हमेशा मानता हूं कि मुझे अपना फैसला जनता की इच्छाओं या दबाव के हिसाब से नहीं, बल्कि कानून की समझ और अपनी अंतरात्मा की आवाज के आधार पर लिखना चाहिए।"

🔹 आरक्षण पर बड़ी बात
अगस्त 2024 में सात जजों की संविधान पीठ ने 6-1 के बहुमत से फैसला सुनाया था कि अनुसूचित जातियां एक समान (homogeneous) वर्ग नहीं हैं और राज्यों को यह अधिकार है कि वे इनमें उप-वर्गीकरण करके आरक्षण का लाभ समाज के सबसे पिछड़े तबकों तक पहुंचा सकें।
CJI गवई ने कहा कि कई बार "आरक्षण का फायदा पीढ़ी-दर-पीढ़ी कुछ परिवारों को ही मिल रहा है। एक परिवार से कई IAS निकलते हैं, जबकि मजदूर या खेतिहर परिवार का बच्चा अब भी पिछड़ा रह जाता है।"
CJI बीआर गवई ने कहा कि समानता का मतलब सभी को बराबर मानना नहीं है, बल्कि असमानों को बराबरी का हक दिलाना ही संविधान की असली सोच है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि -क्या एक मजदूर के बेटे को, जिसने गांव के स्कूल में पढ़ाई की हो, उसी स्तर पर रखा जा सकता है जिस स्तर पर एक चीफ सेक्रेटरी के बेटे को, जो दिल्ली-मुंबई के बेहतरीन स्कूल में पढ़ता है?
🔹 बुलडोजर एक्शन पर कड़ा वार
CJI बीआर गवई ने हाल ही में दिए गए सुप्रीम कोर्ट के फैसले 'डेमोलिशन गाइडलाइंस'का जिक्र करते हुए कहा कि कई जगह प्रशासन आरोपियों के घरों को बिना कोर्ट की प्रक्रिया पूरी किए ध्वस्त कर रहा था, जो संविधान के मूल सिद्धांत Rule of Law और Separation of Powers (शक्तियों का बंटवारा) पर हमला है। उन्होंने चेताया - "अगर कार्यपालिका खुद ही जज बनने लगे, तो संविधान का संतुलन बिगड़ जाएगा।"
🔹 परिवारों को सजा क्यों?
CJI बीआर गवई ने कहा कि कई बार ऐसे घर भी तोड़े गए जिनमें केवल आरोपी ही नहीं, बल्कि उनके परिवार वाले भी रहते थे। उन्होंने कहा, "निर्दोष परिवार वालों को बिना किसी गलती के सजा मिल रही थी। यहां तक कि दोषी साबित हुए व्यक्ति को भी कानून के तहत न्याय पाने का अधिकार है।"
🔹 संविधान के प्रति समर्पण
गवई ने कहा कि जज की कुर्सी उनके लिए "मजे लेने का पद" नहीं है, बल्कि यह देश और समाज की सेवा का अवसर है। CJI गवई ने कहा कि वे अपने 22-23 साल के न्यायिक जीवन में इस बात से खुश हैं कि वे भारतीय संविधान और समाज को सामाजिक व आर्थिक न्याय की ओर बढ़ाने में थोड़ा योगदान दे पाए।












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