Bindi-Sindoor Row: Akasa-SpiceJet में सिंदूर-मंगलसूत्र बैन! Air India में बिंदी पर सख्त नियम, Hijab पर क्या?

Bindi Sindoor Controversy Oneindia Exclusive: लेंसकार्ट से शुरू हुआ बिंदी-तिलक-कलावा विवाद अब एयरलाइंस तक पहुंच गया है। अप्रैल 2026 में एक के बाद एक तीन बड़ी एयरलाइंस एयर इंडिया, अकासा एयर और स्पाइसजेट की ग्रूमिंग गाइडलाइंस सामने आ चुकी है। इनमें भारतीय नारी के सबसे पवित्र प्रतीकों जैसे बिंदी, सिंदूर और मंगलसूत्र पर सख्त पाबंदियां लगाई गईं। लेंसकार्ट का मामला शांत होने के बीच एयरलाइंस में नया तूफान खड़ा हो गया।

Oneindia Hindi से सूत्रों ने खुलासा किया कि ये नियम 'यूनिफॉर्मिटी और प्रोफेशनल लुक' के नाम पर लागू हैं, लेकिन हिंदू धार्मिक प्रतीकों पर सख्ती के साथ-साथ हिजाब जैसे अन्य प्रतीकों को लेकर असमानता की झलक भी साफ नजर आ रही है। आइए विस्तार में समझते हैं कि कैसे भड़की आग एयरलाइंस तक पहुंची?

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Lenskart Controversy: जहां बिंदी-तिलक पर बैन, लेकिन हिजाब की इजाजत

फरवरी 2026 में लेंसकार्ट की एक आंतरिक 'स्टाइल गाइड' वायरल हुई। इसमें स्टोर कर्मचारियों के लिए साफ लिखा था कि धार्मिक टीका/तिलक और बिंदी की अनुमति नहीं है। सिंदूर न्यूनतम लगाने की सलाह, लेकिन माथे पर नहीं गिरना चाहिए। कलावा (धार्मिक धागा) पर भी रोक। लेकिन हिजाब और टर्बन की स्पष्ट अनुमति। इसके बाद, सोशल मीडिया पर विवादों का दौर शुरू हुआ। BoycottLenskart ट्रेंड किया। लोग पूछने लगे कि क्या हिंदू प्रतीकों पर भेदभाव है? शार्क टैंक फेम संस्थापक पीयूष बंसल ने X (पूर्व में ट्विटर) पर सफाई दी कि यह पुराना ट्रेनिंग डॉक्यूमेंट है, हमारी मौजूदा पॉलिसी नहीं। बिंदी-तिलक पर कोई रोक नहीं।

17 फरवरी को ही कंपनी ने इसे हटा लिया था, लेकिन वायरल होने के बाद 18 अप्रैल को नया अपडेटेड स्टाइल गाइड जारी किया। इसमें अब 'धार्मिक, सांस्कृतिक या पारिवारिक चिह्न (बिंदी, तिलक, सिंदूर, कलावा आदि)' की पूरी छूट दे दी गई। बंसल ने माफी मांगी और कहा कि यह हमारी वैल्यूज को नहीं दर्शाता था। लेंसकार्ट ने इसे 'भाषा की गलती' बताया और अब सभी धार्मिक प्रतीकों को बराबर सम्मान देने का वादा किया। यह विवाद सिर्फ एक कंपनी तक सीमित नहीं रहा। इसी तर्ज पर एयरलाइंस की पॉलिसी सामने आई।

Air India Bindi Guidline : बिंदी पर 'कब्जा', सिंदूर-टीका पर क्या निर्देश?

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Air India के प्रवक्ता ने Oneindia Hindi के दिव्यांश रस्तोगी से विशेष बातचीत में बताया कि एक पुराना मैनुअल वायरल हो रहा है, जो अब उपयोग में नहीं है। कर्मचारियों को बिंदी लगाने का पूरा विकल्प है। केबिन क्रू हैंडबुक के मुख्य नियम के अनुसार, माथे पर किसी भी रंग का टीका या सिंदूर को लेकर कोई दिशानिर्देश नहीं दिए गए हैं। बिंदी लगाने की अनुमति है, लेकिन उसके लिए क्रू मेंबर को गाइडलाइन को फॉलो करना होगा। साड़ी के साथ 5 मिमी (0.5 cm) की गोल बिंदी वैकल्पिक। लाल साड़ी के साथ लाल/हरे शेड की, नीली साड़ी के साथ नीली/गुलाबी। इंडो-वेस्टर्न यूनिफॉर्म के साथ बिंदी की अनुमति नहीं है। बिंदी में सोना-चांदी, पत्थर, डिजाइन, लिक्विड या फैंसी बिंदी की मनाही। मंगलसूत्र, चेन, धार्मिक धागे, रिंग आदि पर, गाइडलाइन के पालन के साथ छूट है।

एयर इंडिया का क्या था पुराना मैनुअल? जो हुआ वायरल?

Akasa Air और SpiceJet Sindoor-Mangalsutra Row: सिंदूर-मंगलसूत्र पर सख्त बैन

Akasa Air (IFS(TRG): 21/2024 - समेकित ग्रूमिंग अपडेट) के मुताबिक,

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  • गले में मंगलसूत्र/चेन दिखना मना।
  • माथे में सिंदूर और तिलक पर रोक।
  • दृश्यमान धार्मिक धागे, पायल, काला धागा (गर्दन, कलाई, टखने) नहीं।
  • हाथों पर टैटू/मेहंदी, नोज पिन, एक्स्ट्रा पियर्सिंग नहीं।
  • ब्रेसलेट: सिर्फ एक हाथ में, 1.25 cm तक, कोई चार्म्स/रंगीन स्टोन नहीं।

SpiceJet (केबिन क्रू ग्रूमिंग हैंडबुक):

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  • यूनिफॉर्म में सिंदूर और मंगलसूत्र पहनना सख्त मना।
  • धार्मिक धागे (कलावा, रुद्राक्ष), मेहंदी, नोज पिन, बिछिया, पायल, लूप्स, फैंसी इयररिंग्स नहीं।
  • चूड़ी/कड़ा: एक हाथ में, 1 cm से ज्यादा चौड़ाई नहीं। शादी के बाद 3 महीने तक हर हाथ में एक-एक चूड़ी की छूट।
  • पुरुषों के लिए भी कलावा आदि पर रोक।

Oneindia सूत्रों के मुताबिक, ये नियम 'सुरक्षा, यूनिफॉर्मिटी और ग्लोबल एविएशन स्टैंडर्ड' के नाम पर बनाए गए हैं। लेकिन सवाल उठ रहा है कि क्या हिंदू प्रतीक 'अप्रोफेशनल' हैं, जबकि अन्य धार्मिक प्रतीकों पर नरमी?

Hijab Rules Guidelines: हिजाब पर क्या नियम? असमानता की झलक?

लेंसकार्ट के पुराने दस्तावेज में हिजाब की स्पष्ट अनुमति थी, जबकि बिंदी-तिलक पर रोक। एयरलाइंस में भी केबिन क्रू के लिए हिजाब को लेकर कोई दिशानिर्देश नहीं है। लेकिन, यूनिफॉर्म पॉलिसी के तहत हिंदू संस्कृति के प्रतीकों पर लंबा-चौड़ा गाइडलाइंस जारी है।

Air India के प्रवक्ता ने Oneindia Hindi से बातचीत में हिजाब को लेकर एक साफ और संतुलित बयान दिया। उन्होंने कहा कि मिडिल ईस्ट की एयरलाइंस में हिजाब पहनना एक सामान्य बात है, क्योंकि यह वहां के कल्चर और सामाजिक माहौल का हिस्सा है। उनके मुताबिक, हर देश और एयरलाइन की अपनी अलग ग्रूमिंग गाइडलाइंस होती हैं, जो उनके स्थानीय परिवेश और संस्कृति के हिसाब से तय की जाती हैं। मिडिल ईस्ट की एयरलाइंस में हिजाब उसी नीति का हिस्सा है, इसलिए वहां इसे आसानी से देखा जा सकता है।

प्रवक्ता ने यह भी संकेत दिया कि एयरलाइंस अपने ब्रांड इमेज और सांस्कृतिक पहचान को ध्यान में रखते हुए ऐसे नियम बनाती हैं। यानी, जो चीज एक देश में आम है, जरूरी नहीं कि वह दूसरे देश की एयरलाइन में भी वैसी ही हो। सीधे शब्दों में समझें तो हिजाब को लेकर यह कोई विवाद नहीं, बल्कि अलग-अलग देशों और एयरलाइंस की अपनी-अपनी वर्किंग स्टाइल और गाइडलांस का हिस्सा है, जिसे उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

भारतीय नारी के लिए बिंदी, सिंदूर और मंगलसूत्र का गहरा मतलब

भारतीय नारी की पहचान सिर्फ उसके पहनावे से नहीं, बल्कि उन परंपराओं से भी जुड़ी होती है जो सदियों से चली आ रही हैं। बिंदी, सिंदूर और मंगलसूत्र ऐसे ही प्रतीक हैं, जो केवल सजावट नहीं बल्कि गहरी सांस्कृतिक और भावनात्मक अहमियत रखते हैं। बिंदी का शब्द संस्कृत के 'बिंदु' से निकला है और इसे माथे पर आज्ञा चक्र यानी तीसरी आंख के स्थान पर लगाया जाता है। इसे ज्ञान, एकाग्रता और ऊर्जा का केंद्र माना जाता है। पारंपरिक रूप से लाल बिंदी शादीशुदा महिला के सौभाग्य का प्रतीक होती है, हालांकि आज के समय में यह फैशन का भी हिस्सा बन चुकी है।

सिंदूर लाल या नारंगी रंग का पाउडर होता है, जिसे बालों की मांग में लगाया जाता है। हिंदू विवाह में 'सिंदूरदान' एक अहम रस्म होती है, जहां पति पत्नी की मांग में सिंदूर भरता है। यह पति की लंबी उम्र, समृद्धि और वैवाहिक बंधन का प्रतीक माना जाता है। लाल रंग को शक्ति और उर्वरता से भी जोड़ा जाता है।

मंगलसूत्र एक काले मोतियों वाला हार होता है, जिसे शादी के समय पति अपनी पत्नी को पहनाता है। 'मंगल' का मतलब शुभ और 'सूत्र' का मतलब धागा होता है। इसे पति-पत्नी के अटूट रिश्ते, प्रेम और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है। काले मोती बुरी नजर से बचाने का संकेत भी देते हैं।

इन तीनों प्रतीकों को केवल धार्मिक परंपरा के रूप में नहीं देखा जाता, बल्कि ये लाखों महिलाओं की सांस्कृतिक पहचान और भावनाओं से जुड़े होते हैं। यह तीनों प्रतीक शादीशुदा महिला का आवरण का अहम हिस्सा है। इसलिए जब इन पर किसी तरह की रोक या सीमा की बात होती है, तो इसे केवल एक नियम नहीं, बल्कि सांस्कृतिक अभिव्यक्ति से जुड़ा मुद्दा माना जाता है।

बड़ा सवाल: यूनिफॉर्मिटी vs धार्मिक स्वतंत्रता

भारत में आर्टिकल 25 संविधान के तहत धार्मिक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है। लेकिन निजी कंपनियां वर्कप्लेस पॉलिसी के नाम पर नियम बना सकती हैं। ग्लोबल एविएशन स्टैंडर्ड में सेफ्टी और प्रोफेशनल इमेज पर जोर होता है।

  • समर्थन में तर्क: यूनिफॉर्म से ब्रांड इमेज मजबूत, ग्राहक अनुभव एकसमान, सुरक्षा (चेन/पायल उड़ान में खतरा)।
  • विरोध में तर्क: सांस्कृतिक भेदभाव। क्यों हिजाब/टरबन की छूट, लेकिन बिंदी-सिंदूर पर नहीं? महिलाओं की परंपरा को 'अप्रोफेशनल' क्यों ठहराया जा रहा?

क्या यह सिर्फ पॉलिसी है या सांस्कृतिक सम्मान का सवाल?

लेंसकार्ट से Air India तक फैला यह विवाद दिखाता है कि कॉर्पोरेट भारत अभी भी 'भारतीय महिलाओं की परंपरा' को पूरी तरह समझ नहीं पाया। बिंदी, सिंदूर और मंगलसूत्र कोई फैशन नहीं, ये लाखों महिलाओं की पहचान, विश्वास और भावनाएं हैं।

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