शाह फैसल ने IAS की नौकरी को बताया 'जेल', कहा- घुटन होती थी
नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के 2010 बैच के आईएएस अधिकारी रहे शाह फैसल ने कहा है कि कश्मीर के मसले को सुलझाने के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत होनी चाहिए। श्रीनगर से करीब 100 किमी दूर कुपवाड़ा में वे पहली बार एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे। आईएएस फैसल ने पिछले महीने ही इस्तीफा दे दिया था। उनके इस्तीफे पर काफी बवाल मचा था। इस्तीफा देने के बाद फैसल ने कहा था कि पिछले कुछ सालों में कश्मीर में जो हालात रहे हैं, उसे देखते हुए ये फैसला किया।

नौकरी के दिनों की तुलना जेल से की
फैसल ने कहा कि कश्मीर राजनीतिक समस्याओं से घिरा हुआ है और इसका हल विकास के जरिए नहीं किया जा सकता है। शाह ने अपने नौकरी के दिनों की तुलना जेल से की। फैसल ने कहा कि सरकार की नौकरी करने के दौरान उन्हें हमेशा घुटन होती थी। उनके पास देश की समस्याओं से अलग एक शानदार जिंदगी जीने का अवसर मौजूद था लेकिन उन्होंने एक अधिकारी और जनता के बीच के बैरियर को खत्म करने का निर्णय किया। अब वे लोगों के साथ जुड़ेंगे और गांव-गांव जाएंगे।

शाह फैसल ने दिया था इस्तीफा
फैसल ने कहा कि सरकारी नौकरी के दौरान जो चीजें देखीं, अपने लोगों पर जो अत्याचार देखे, ये सब दिल में चुभती थीं। मैं एक ऐसे रास्ते की तलाश कर रहा था जिसके जरिए मैं अपने लोगों की भलाई के लिए काम कर सकूं, कश्मीर के लोगों से बात कर सकूं। बता दें कि आईएएस अफसर फैसल ने 9 जनवरी को इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधा था।

कुपवाड़ा में जनसभा को किया संबोधित
इस्तीफे के बाद फैसल ने कहा था, 'मैं गहराई से इमरान खान और अरविंद केजरीवाल से प्रेरित हूं, लेकिन हम एक संघर्ष क्षेत्र में काम कर रहे हैं और हमारे लिए उस स्थान पर काम करना बहुत आसान नहीं है। वह स्थान जिसने पिछले कुछ वर्षों में अपना औचित्य खो दिया।' फैसल को कश्मीर घाटी में स्कूल एजुकेशन का डायरेक्टर नियुक्त किया गया था लेकिन उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।












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