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हार्ट अटैक या जहर? जिस DSP ने मुख्तार अंसारी को पहली बार किया था गिरफ्तार, अब उसी ने किया बड़ा खुलासा

Former UP DSP Shailendra Singh : उत्तर प्रदेश के कुख्यात माफिया डॉन मुख्तार अंसारी का 28 मार्च को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। 30 मार्च को मुख्तार अंसारी को गाजीपुर में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। एक वक्त यूपी में अपना दबदबा रखने वाले कुख्यात मुख्तार अंसारी के दहशत की कहानियां लेकिन आज भी जिंदा है।

ऐसी की एक आपबीती पूर्व डीएसपी शैलेंद्र सिंह की भी है, जिनकी मुख्तार अंसारी की वजह से नौकरी चली थी। उनका परिवार कई सालों तक डर के माहौल में रहा था। ये वही DSP शैलेंद्र सिंह हैं, जिन्होंने 2004 में पहली बार मुख्तार को गिरफ्तार किया था।

Former UP DSP Shailendra Singh

अब DSP शैलेंद्र सिंह ने मुख्तार अंसारी की मौत के बाद अपनी आपबीती के साथ-साथ बाहुबली को हार्ट अटैक क्यों आया...इसपर भी बात की है। असल में मुख्तार अंसारी के परिवार वाले दावा कर रहे हैं कि उन्हें जेल में धीमा जहर देकर मारा गया है। मुख्तार अंसारी ने भी कई बार शासन-प्रशासन को पत्र लिख कर ये 'स्लो पॉइजन' वाली बात कही थी।

क्यों आया होगा 63 वर्षीय मुख्तार अंसारी को हार्ट अटैक?

डीएसपी शैलेंद्र सिंह ने कहा,

'मुख्तार अंसारी को हार्ट अटैक क्यों आया होगा...इसको समझने के लिए आपको तीन पहले जाना होगा। जब मुख्तार को तीन साल पहले (अप्रैल 2021) पंजाब से जब यूपी की जेल में शिफ्ट किया गया था तो आप याद कीजिए की योगी सरकार को कितीन जद्दोजहद करनी पड़ी थी। पंजाब में कांग्रेस के शासन काल में अंसारी जेल में ठाठ से था और अपना जेल के अंदर से साम्राज्य चला रहा था। उसके पहले जब यूपी में था तो सपा-बसपा की सरकार में, वो जेल में रहे या बाहर, उसे सारी सुविधाएं मिलती थीं। उसका आर्थिक साम्राज्य अच्छे चल रहा था और क्राइम की दुनिया में उसका नाम हो रहा था।'

Former UP DSP Shailendra Singh

डीएसपी शैलेंद्र सिंह ने आगे कहा,

'...लेकिन जब से मुख्तार अंसारी यूपी की जेल में आया, उसकी परिस्थिति खराब होती चली गई...उसके खिलाफ लगातार एक्शन होते चला गया। कोर्ट से उसको एक के बाद एक सजा मिलती रही...गैंगस्टर एक्ट के तहत उसकी सैकड़ों करोड़ों की संपत्ति जब्त होती रही...उसको छटपटाहट इसी बात की थी। उसने फिर माहौल बनाना शुरू किया कि, उसको जहर दिया जा रहा है...जेल में सविधा नहीं दिया जा रहा है। वो इसी कोशिश में था कि किसी तरह उसे यूपी से बाहर की जेल में शिफ्ट करने का आदेश कोर्ट से मिल जाए। लेकिन ये हो नहीं पा रहा था। जब उसकी शाख खत्म हो गई, शासन-प्रशासन ने उसको राहत देना छोड़ दिया। तो इन्होंने घुटने टेक दिए। जिससे अंसारी के मन में डर बैठ गया...खौफ पैदा करने वाला खुद कई सालों से खौफ में था। इसी खौफ की वजह से इसको हार्ट अटैक आया है।'

डीएसपी शैलेंद्र सिंह ने आगे कहा,

'माफिया दिल बहुत कमजोर होता है, मैंने तो सबकुछ बहुत करीब से देखा है...अंसारी को जब मैंने पहली बार इसको लाइट मशीन गन (LMG) के साथ पकड़ा था तो ये हफ्ते-10 दिन डर से फोन को हाथ नहीं लगाया था। इतना कमजोर था ये अंदर से, और बाहर से दिखाता है कि हम इतने मजबूत हैं। इसके अंदर डर बैठ गया था। जब मैं इसको पिछले कुछ वक्त से मीडिया में देखता था, कोर्ट से गुहार करते हुए, तो इसकी स्थिति देखते हुए समझ गया था कि इसकी मनोस्थिति क्या है। मैं 10 साल पुलिस में रहा हूं...माफिया-डॉन की मनोस्थिति समझता हूं...इसे पता था कि मैं यहां से नहीं हठा तो खत्म हो जाऊंगा...उस डर ने इसकी जान ली है।'

Former UP DSP Shailendra Singh

उन्होंने ये भी कहा कि,

'जरा आप सोचिए, जिस जेल में मुख्तार अंसारी डीएम के साथ बैडमिंटन खेलता था। सरेआम जेल से परिवार के साथ बाहर घूमने निकल जाता था...मछली खाने के लिए जिसके लिए जेल में तालाब खोद दिया गया हो...अब उससे वहां कोई सीधे मुंह बात भी ना करे तो उसकी स्थिति क्या हो जाएगी।'

Former UP DSP Shailendra Singh

जब 2004 में पूर्व DSP शैलेंद्र सिंह ने जब मुख्तार अंसारी पर कार्रवाई की तो क्या-क्या हुआ?

लगभग 20 साल पहल, 2004 में, खतरनाक गैंगस्टर-राजनेता मुख्तार अंसारी का साम्राज्य अपने चरम पर था। वह खुली जीपों में घूमता था और एक लाइट मशीन गन भी रखता था। तत्कालीन डीएसपी शैलेंद्र सिंह को छोड़कर किसी भी पुलिस अधिकारी में उसका सामना करने का साहस नहीं था।

शैलेंद्र सिंह ने कहा है कि, 'जब मऊ में 20 साल पहले दंगों के दौरान कर्फ्यू लगा हुआ था, तब मुख्तार अंसारी अपने गुर्गों संग खुली जीप में घूम रहा था और लाइट मशीनगन भी लहरा रहा था। उस वक्त मैंने उसे मशीनगन के साथ गिरफ्तार कर लिया था और उसके खिलाफ पोटा (Prevention of Terrorism Act- POTA) भी लगाया था।"

'मुख्तार अंसारी को गिरफ्तार करने के बाद 15 दिनों में छोड़नी पड़ी थी नौकरी'

शैलेंद्र सिंह ने जैसे ही मुख्तार अंसारी को गिरफ्तार किया, इस घटना के 15 दिनों के बाद तत्कालीन मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व वाली सरकार ने उन्हें इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया था।

शैलेंद्र सिंह ने कहा कि, ''वह वही व्यक्ति थे जिन्होंने सबसे पहले गैंगस्टर से नेता बने मुख्तार अंसारी के कब्जे से लाइट मशीन गन बरामद की थी। लेकिन मुलायम सरकार उन्हें (अंसारी) किसी भी कीमत पर बचाना चाहती थी। उन्होंने अधिकारियों पर दबाव डाला, आईजी-रेंज, डीआईजी और एसपी-एसटीएफ का तबादला किया गया, यहां तक कि मुझे 15 दिनों के भीतर इस्तीफा देने के लिए भी कहा गया। लेकिन अपने इस्तीफे में, मैंने अपने कारण लिखे और लोगों के सामने रखें कि यह वह सरकार है जिसे आपने चुना है, जो माफियाओं की रक्षा कर रही है और उनके आदेश पर काम कर रही है... मैं किसी पर एहसान नहीं कर रहा था। यह मेरा कर्तव्य था।''

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