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गांधी परिवार और कांग्रेस की इस बात से दुखी थीं शीला दीक्षित, इंटरव्यू में छलका था दर्द

नई दिल्ली। गांधी परिवार के बेहद करीब और कांग्रेस ही नहीं बल्कि देश के बड़े नेताओं में शुमार शीला दीक्षित अब हमारे बीच में नहीं हैं, 20 जुलाई 2019 को उन्होंने दिल्ली के एस्कॉर्ट अस्पताल में दोपहर 3:55 बजे अंतिम सांस ली थी, शीला दीक्षित का यूं अचानक चले जाना कांग्रेस के लिए किसी कुठाराघात से कम नहीं है, अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही पार्टी के लिए ये एक अपूर्णनीय क्षति है जिसकी भरपाई कोई नहीं कर सकता है।

शीला दीक्षित के दिल में चुभती थी ये बात...

शीला दीक्षित के दिल में चुभती थी ये बात...

दिल्ली को 'नई दिल्ली' बनाने वाली शीला दीक्षित अपनी आखिरी सांस तक कांग्रेस से जुड़ी रहीं, उनके निधन पर कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष और यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने शोक जताते हुए कहा था कि शीला दीक्षित उनकी बेहद अच्छी और प्यारी दोस्त थीं, आज उन्होंने अपना खास दोस्त खो दिया है। इसमें कोई शक नहीं कि शीला दीक्षित, गांधी परिवार के बेहद ही करीब थीं लेकिन एक वक्त ऐसा भी आया था कि जब शीला दीक्षित को कांग्रेस और गांधी परिवार से एक बड़ी शिकायत भी थी।

बात साल 2018 की है...

बात साल 2018 की है...

बात साल 2018 की है, जब 'भाषा' न्यूज एजेंसी को दिए इंटरव्यू में शीला दीक्षित ने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की थी, आम आदमी पार्टी के हाथों दिल्ली में 2013 के चुनावों में सत्ता गंवाने के बाद लगभग हाशिए पर चली गईं कांग्रेस की वरिष्ठ नेता शीला दीक्षित ने पार्टी नेताओं को आंतरिक राजनीति नहीं करने की नसीहत देते हुए स्वयं के बारे में कहा था कि बरसों तक उनकी अनदेखी की गई किंतु उन्होंने कभी भी उफ्फ तक नहीं की और चुपचाप अपना काम करती रहीं।

शीला दीक्षित का इशारा सोनिया-राहुल की ओर था

शीला दीक्षित का इशारा सोनिया-राहुल की ओर था

तीन बार दिल्ली की मुख्यमंत्री रह चुकीं शीला दीक्षित ने अपने साक्षात्कार में कहा था कि मुझसे जो कहा जाता है, वह मैं करती हूं। मैं कांग्रेस की हूं और कांग्रेस मेरी है, मैं कांग्रेस के लिए कुछ भी कर सकती हूं, जब मुझसे कोई कुछ कहेगा नहीं तो मैं कैसे कुछ कर सकती हूं, मेरे में यह आदत भी नहीं है कि अपने आपसे जाकर कहीं घुस जाऊं, तो बरसों तक मेरी अनदेखी की गई पर मैंने कुछ नहीं कहा।

सोनिया-राहुल से थी शिकायत

गांधी परिवार का नाम ना लेते हुए उन्होंने कहा था कि पार्टी की कमान जिनके हाथ में हैं, मैं उनकी हर बात बिना सवाल किए मानती हूं लेकिन अगर किसी को कुछ समझ नहीं आता को मैं क्या कर सकती हूं, आपको बता दें कि शीला दीक्षित का इशारा राहुल और सोनिया गांधी की ही ओर था क्योंकि उस वक्त पार्टी अध्यक्ष राहुल और यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी ही थीं।

दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कमान शीला दीक्षित के हाथ में दी गई थी...

दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कमान शीला दीक्षित के हाथ में दी गई थी...

फिलहाल अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही कांग्रेस को लोकसभा चुनाव 2019 के पहले अपनी गलतियों का शायद एहसास हुआ था और इसी वजह से उसने दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कमान वयोवृद्द शीला दीक्षित के हाथ में दी थी, हालांकि इस बार उनका तजुर्बा मोदी की आंधीं में पार्टी के काम नहीं आया लेकिन उन्होंने अंतिम सांस तक पार्टी के लिए काम करके पार्टी के प्रति अपने कर्तव्य को भरपूर रूप से चुकाया है और इसके लिए कांग्रेस पार्टी हमेशा उनके प्रति कृतज्ञ रहेगी।

शीला दीक्षित का आखिरी खत

शीला दीक्षित का आखिरी खत

वैसे शीला दीक्षित इन दिनों पार्टी की गुटबाजी को लेकर परेशान थीं और उन्होंने इस बारे में अपने आखिरी खत में लिखा था, जो कि उन्होंने सोनिया गांधी को भेजा था, खत में शीला दीक्षित ने उन दो नेताओं का जिक्र किया है, जो पार्टी को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं और उन दो नेताओं के नाम है अजय माकन और पीसी चाको, खत में शीला दीक्षित ने लिखा है कि मैं दिल्ली कांग्रेस को मजबूत करने के लिए फैसले ले रही हूं, लेकिन अजय माकन के इशारे पर चलकर प्रभारी पीसी चाको बेवजह कदम उठा रहे हैं। अजय माकन पीसी चाको को गुमराह कर रहे हैं, जिससे पार्टी का कार्य प्रभावित हो रहा है।

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