लॉकडाउन हटने के 6 माह के बाद भी अकुशल कामगारों को नहीं मिल रहा काम, मनरेगा की मांग में नहीं आ रही कमी
कोरोना वायरस के मामलों में गिरावट के बाद अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए चरणबद्ध तरीके से खोले गए लॉकडाउन के 6 महीनों के बाद भी मनरेगा के तहत काम करने की मांग उच्चतम स्तर पर बनी हुई है।
नई दिल्ली। कोरोना वायरस के मामलों में गिरावट के बाद अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए चरणबद्ध तरीके से खोले गए लॉकडाउन के 6 महीनों के बाद भी मनरेगा के तहत काम करने की मांग उच्चतम स्तर पर बनी हुई है। हर महीने लगभग 2 करोड़ या उससे अधिक घरों में ग्रामीण नौकरी की गारंटी का लाभ उठा रहे हैं। इससे यह पता चलता है कि कोरोना के बाद अकुशल मजदूरों को अन्य क्षेत्रों में काम मिलने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

वास्तविकता यह है कि पिछले दो महीनों (दिसंबर और जनवरी) में मनरेगा का लाभ उठाने वाले परिवारों की संख्या पिछले साल अगस्त और सितंबर (जिस समय कोरोना के मामले अपने चरम पर थे) के समान स्तर पर है। कुल मिलाकर 7.17 करोड़ परिवारों (10.51 करोड़ व्यक्तियों) ने चालू वित्त वर्ष (1 अप्रैल,2020 से पहले) में 17 फरवरी तक मनरेगा का लाभ उठाया, जो कि योजना की शुरूआत के बाद से एक वित्तीय वर्ष में सबसे बड़ी संख्या है।
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कोरोना महामारी के दौरान लाखों मजदूर अपने-अपने घर वापस लौटे थे, जिसके बाद उन्हें मनरेगा के तहत काम दिया गया। एक मासिक विश्लेषण के मुताबिक अकुशल कार्यों में जून 2020 में मांग बढ़ गई और उस दौरान 3.89 करोड़ परिवारों (जून 2019 की तुलना में 80% अधिक) ने इस योजना का लाभ उठाया। जुलाई 2019 की तुलना में जुलाई 2020 का आंकड़ा 2.75 करोड़ अधिक था।
पिछले दो महीनों के मनरेगा के आंकड़े वहीं हैं, जो कोरोना वायरस के अपने चरम पर होने के दौरान थे। ग्रामीण नौकरी योजना की निरंतर मांग से पता चलता है कि अकुशल मजदूर लॉकडाउन खुलने के बाद काम पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्हें अन्यत्र काम नहीं मिल रहा है। मांग में सबसे अधिक उछाल तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों से दर्ज किया गया है। चालू वित्त वर्ष में अब तक 40 लाख से अधिक परिवारों ने पूर्ण 100 दिनों का रोजगार प्राप्त किया है। कोविड के जवाब में घोषित आर्थिक पैकेज के हिस्से के रूप में, केंद्रीय बजट 2020-21 में आवंटित किए गए 61,500 करोड़ रुपये से अलग
सरकार ने मनरेगा के लिए 40,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त धनराशि की घोषणा की है। इस बढ़ोत्तरी के साथ मनरेगा वार्षिक बजट ने पहली बार 1 लाख करोड़ रुपए का आंकड़ा पार किया है।
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