अयोध्या के ऐतिहासिक फैसले में इन विदेशियों का भी रहा है योगदान, इनके बारे में जानिए

नई दिल्ली। दशकों से लंबित और राजनीतिक रूप से संवेदनशील राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की पीठ ने शनिवार को फैसला सुना दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने रामलला विराजमान के पक्ष में फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को कहीं और 5 एकड़ जमीन दी जाए। इसके साथ ही कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिया है कि वह मंदिर निर्माण के लिए 3 महीने में ट्रस्ट बनाए।

english travelogues claim, supreme court, babri maszid ayodhya case, ayodhya verdict, cji ranjan gogoi, ayodhya, uttar pradesh, delhi, सुप्रीम कोर्ट, अयोध्या फैसला, अयोध्या मामला, अयोध्या, सुप्रीम कोर्ट, सीजेआई रंजन गोगोई, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बाबरी मस्जिद, विदेशी, यात्रा विवरण

इस फैसले तक पहुंचने के लिए सुप्रीम कोर्ट को विदेशियों के यात्रा विवरण से भी मदद मिली है। इन विदेशियों ने अयोध्या में यात्रा को लेकर विवरण किए थे। जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने आधार बनाया। इन विदेशियों में जोसेफ टेफेन्थैलर (Joseph Tiefenthaler), एम मार्टिन (M Martin) और विलियम फिंच (William Finch) का नाम शामिल है।

यहां होती थी पूजा

यहां होती थी पूजा

अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि विदेशी यात्रियों के यात्रा विवरण से काफी जानकारी मिली है। इनसे हिंदुओं की आस्था और विश्वास के संबंध में काफी कुछ पता चला है। इनमें भगवान राम के जन्मस्थान और हिंदुओं द्वारा वहां की जाने वाली पूजा का भी जिक्र है।

कोर्ट ने कहा कि 18वीं सदी में जोसेफ टेफेन्थैलर और एम मार्टिन के यात्रा विवरण विवादित स्‍थल को भगवान राम का जन्‍मस्‍थान मानने के प्रति हिंदुओं की आस्‍था और विश्‍वास को दर्शाते हैं। इनके यात्रा विवरणों में विवादित स्थल और उसके आसपास सीता रसोई, स्वर्ग द्वार और बेदी (झूला) जैसे क्षेत्रों की पहचान है। ये वहां भगवान राम के जन्म को दर्शाते हैं।

पूजा पाठ का जिक्र

पूजा पाठ का जिक्र

सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की पीठ ने ये भी कहा कि इन यात्रा विवरणों में विवादित स्थल पर तीर्थयात्रियों द्वारा पूजा पाठ, परिक्रमा करने और धार्मिक उत्सवों के अवसर पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ने का भी उल्‍लेख किया गया है।

कोर्ट ने कहा कि विवादित स्थल पर 1856-57 तक नमाज पढ़ने के सबूत नहीं हैं। हिंदू इससे पहले अंदरूनी हिस्से में भी पूजा करते थे। हिंदू बाहर भी सदियों से पूजा करते रहे हैं। साल 1857 में जब अंग्रेजों ने दीवार का निर्माण कराया था, उससे पहले भी विवादित स्थल पर भक्‍तों की ऐतिहासिक उपस्थिति और पूजा का अस्तित्व था।

टेफेन्थैलर ने अयोध्या पर भी लिखा

टेफेन्थैलर ने अयोध्या पर भी लिखा

भारत पर लिखने वाले इटली के मिशनरी जोसेफ टेफेन्थैलर ने 1743-1785 के बीच भारत का दौरा किया था। साथ ही फिंच ने 1608-1611 के बीच भारत की यात्रा की थी। इन दोनों ने ही अपने यात्रा विवरण में अयोध्या के बारे में लिखा है।

इनके लेखों में स्पष्ट रूप से हिंदुओं द्वारा भगवान राम की पूजा के बार में लिखा है। टेफेन्थैलर ने तो विशेष रूप से सीता रसोई, स्वर्ग द्वार और बेदी का उल्लेख किया है। उनके यात्रा विवरण में त्योहारों का भी वर्णन है। जिस दौरान हिंदू श्रद्धालु इन स्थलों पर पूजा करने के लिए एकत्रित होते थे।

दीवार बनाए जाने से पहले की कहानी

दीवार बनाए जाने से पहले की कहानी

टेफेन्थैलर का यात्रा विवरण ब्रिटिश राज में बनाई गई दीवार से पहले का है। उनके यात्रा विवरण के अनुसार, 'जमीन से पांच इंच ऊपर एक चौकोर बॉक्स जिसका बॉर्डर चूने से बना है और इसकी लंबाई 225 इंच के करीब है और अधिकतम चौड़ाई 180 इंच है।' बता दें इसे हिंदू बेदी या झूला कहा जाता है। इस यात्रा विवरण में लिखा है कि ये स्थान भगवान विष्णु के भगवान राम के रूप में जन्म लेने वाले स्थान को दर्शाता था।

उन्होंने अपने यात्रा विवरण में दर्शाया है कि जिस स्थान पर 'भगवान राम का पैतृक घर' था, वहां हिंदू तीन बार परिक्रमा करते थे और फर्श पर लेट जाते थे। टेफेन्थैलर का यात्रा विवरण पूजा के केंद्र बिंदु को संदर्भित करता है, जो भगवान का जन्म स्थान है।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+