100-150 किलो खाना खाने वाले इस जानवर की 10 बड़ी बातें

बेंगलोर। प्रकृति को नुकसान पहुंचाकर खुद को फायदा पहुंचाना यहां कुछ तस्करों पर भारी पड़ गया। श‍िवराजू और श‍िवस्वामी नाम के इन दो तस्करों से हाथी के दो दांत बरामत हुए जिनकी विश्व बाजार में कीमत 50 लाख आंकी गई।

जानकारी मिली कि ये युवक पहले भी इस तरह के धंधे से मुनाफा बंटोरते आए हैं। हालांकि देश भर में इस तरह के मामले बढ़ते जा रहे हैं। विशालकाय जीव हाथी के अंगों की तस्करी ना सिर्फ प्रकृति की रचना के साथ शर्मनाक है साथ ही इंसानियत के सख्त ख‍िलाफ भी। घुमाएं स्लाइडर और जानें इस विशाल जीव की विशाल बातें-

उड़सी में हाथ‍ियों पर कहर

उड़सी में हाथ‍ियों पर कहर

2010 में एक क्षेत्रीय मीडिया संस्थान ने उड़ीसा में बड़ी संख्या में हाथियों को खतरा बताया था। बीते दो दशक में यहां लगभग 570 हाथी बिजली करेंट और अवैध शिकार की भेंट चढ़ चुके हैं, जो अपने आप में काफी भयावह आंकड़ा है। हालिया रिपोर्ट कहती है कि हाथियों को शिकारियों ने बेरहमी से निशाना बनाया है, और बाकियों की मौत अन्य संदिग्ध कारणों से हुई है।

होती है तस्करी

होती है तस्करी

कई बार मृत पाये गए हाथियों के क्षत-विक्षत और गायब विशेष अंग जैसे दांत, नाखून इस बात की ओर तुरंत इशारा कर देते है कि उन्हें तस्करी की नीयत से रौंदा गया है।

बन गए कठपुतली

बन गए कठपुतली

प्रकृति से इस जीव को कुछ आदतें विरासत में मिलीं हैं, जैसे हरे-भरे लहलहाते मैदानों में विचरण करना, पेड़ के तनों, खासकर लंबी घास का जमकर आहार लेना। घने जंगलों का सम्राज्य छीनकर हाथी को या तो तमाशबीनों के बीच प्राणि उद्यानों में लाया गया या फिर वे अपनी भरपेट खुराक की मजबूरी में सर्कस-नौटंकी वालों की कठपुतली बन गए।

कम हो रही है संख्या

कम हो रही है संख्या

इन्हीं हाथियेां की एक खूबसूरत प्रजाति जो सिर्फ थाइलेंड जैसे देशों तक सिमट कर रह गई है, जिन्हें हम 'सफेद हाथी' कहते हैं। भारत में वन्यजीव विभाग के हालिया आंकड़ों में कुल 20,000-25,000 हाथी दर्ज हैं, जिन पर भी अब बेहद निगरानी व सतर्कता बरतने की ज़रूरत है।

क्या है इनकी दिनचर्या

क्या है इनकी दिनचर्या

4-5 टन वजनी व अमूमन 21-22 फीट लंबे इस जानवर को जो लोग बोझ समझते हों, वे इसकी उपयोगिता को एक बार ज़रूर जान लें। हाथी दिन में लगभग 19 घंटे जंगलों में चरता रहता है, और 125 वर्गमील क्षेत्र में घूमते हुए करीब 220 पाउंड गोबर गिराता है, जो कि बीजों व पौधों के विकास के लिए संजीवनी है।

हिलाते हैं कान

हिलाते हैं कान

हाथी दिन भर अपने कान हिलाता रहता है। अपने विशालकाय शरीर की गर्मी को कानों के जरिये बाहर छोड़ता है। यह काम उसकी कोशिकाएं करती हैं। यही कारण है कि अफ्रीका के हाथियों के कान बहुत बड़े होते हैं, क्‍योंकि वहां गर्मी ज्‍यादा पड़ती है।

भोजन

भोजन

हाथी एक दिन में करीब 100 से 150 किलो तक खाना खाता है। खास बात यह है कि वो उसका सिर्फ 35 फीसदी ही पचा पाता है, बाकी मल के माध्यम से बाहर निकल जाता है।

नींद

नींद

हाथी दिन भर में करीब 10 से 20 किलोमीटर चलते हैं और सोते सिर्फ 3 से 4 घंटे ही हैं, जबकि‍ अगर हम इंसानों को इतना चला दिया जाए तो हमारी थकान और नीदं के वक्त का ठिकाना ही ना रहे।

70 साल है उम्र

70 साल है उम्र

हाथी 70 साल तक जीवित रहते हैं। यह उम्र जानवरों में सबसे ज्यादा हाथियों की अधिकतम आयु मानी गई है। अब तक 70 साल रिकॉर्ड की गई यह उम्र ही इनके लिए घातक साबित हो रही है। तस्करों की बुरी नज़र का ये बेहद दुर्भाग्यपूर्ण पहलू है।

क्‍यों निकलते हैं आंसू

क्‍यों निकलते हैं आंसू

हाथी की आंखों की रौशनी बहुत कम होती है। खास बात यह है कि तेज़ रौशनी में उन्‍हें कम दिखाई देता है और कम रौशनी में ज्‍यादा। हाथी की आंख की पुतलियां बहुत जल्‍दी सूख जाती हैं, जिस वजह से वो अपनी आंख की पुतलियां हिला नहीं पाता है। पुतलियां आसानी से हिल सकें, इसके लिये उन्‍हें नम रखना जरूरी होता है, यही कारण है कि हाथी की आंख में एक तरल पदार्थ की सप्‍लाई होती रहती है, जो ज्‍यादा होने पर आंख से बाहर निकल आता है, जिसे हम आंसू समझ बैठते हैं।

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