पिछड़े गांवों और जनजातीय क्षेत्रों तक पहुंची बिजली, 'पीएम-सौभाग्य' योजना ने बदली छत्तीसगढ़ की तस्वीर

भोजन, वस्त्र, आवास के बाद बिजली आज के समय में मौलिक आवश्यकता बन गई है। इसके बिना न तो औद्योगिक विकास संभव है ना ही आधुनिक सुविधाओं तक पहुंच। यदि एक वाक्य में कहें तो बिजली, जीवन की रगों में बहने वाली ऊर्जा है।

कुछ वर्ष पूर्व तक देश के कई इलाके अंधेरे में डूबे हुए थे। इनमें छत्तीसगढ़ के भी कई गांव और जनजातीय क्षेत्र शामिल थे, जिन्हें बिजली का सुख कभी प्राप्त नहीं हुआ था। बिजली क्या होती है, उन्हें मालूम ही नहीं था। 2014 में केंद्र की सत्ता में आने के साथ ही प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली राजग सरकार ने देश के हर गा‍ँव में बिजली पहुंचाने के लक्ष्य के साथ काम करना शुरु किया।

Electricity reached backward villages and tribal areas PM-Saubhagya scheme changed the picture

अक्टूबर 2017 में केंद्र सरकार ने 'पीएम-सौभाग्य योजना' यानी 'पीएम सहज बिजली हर घर योजना' की शुरुआत करके इन अंधेरे को मिटाने का संकल्प लिया। इस योजना का उद्देश्य देशभर के सभी उपशहरी और ग्रामीण क्षेत्रों तक बिजली पहुंचाना था, ताकि हर गरीब का घर रोशन हो सके।

इसके तहत देशभर में उन सभी घरों में बिजली का कनेक्शन दे दिया जाने लगा, जो इस प्राथमिक सुविधा से वंचित थे। एक रोचक बात यह भी है कि इस दौरान, असम, छत्तीसगढ़, झारखंड, कर्नाटक, मणिपुर, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे सात राज्यों में करीब 19.09 लाख घरों ने बिजली कनेक्शन लेने से मना कर दिया था। बाद में इन सभी घरों ने भी बिजली कनेक्शन लेने की इच्छा जताई और उन्हें कनेक्शन दिया भी गया। इन सात राज्यों में 31 मार्च 2021 तक शत प्रतिशत विद्युतीकरण का लक्ष्य प्राप्त कर लिया गया। इसके बाद 31 मार्च 2022 तक 2.86 करोड़ वंचित घरों में बिजली पहुंचा कर केंद्र सरकार ने अपना 'यूनिवर्सल हाउसहोल्ड इलेक्ट्रिफिकेशन' का लक्ष्य पूरा कर लिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई 'पीएम-सौभाग्य' योजना भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। विकसित राष्ट्र के लिए इसकी सभी इकाई का विकसित होना आवश्यक है। जनजातीय प्रदेश छत्तीसगढ़ भारत के विकास की एक महत्त्वपूर्ण कड़ी है। छत्तीसगढ़ के सभी जिलों, खासकर पिछड़े और दुर्गम इलाकों में बिजली कनेक्शन के साथ-साथ लाभार्थियों को 5 एलईडी बल्ब, एक पंखा और एक डीसी पावर प्लग भी देकर भारत सरकार ने इस वन्य प्रदेश में भी बिजली की चमक फैला दिया। जिन इलाकों में बिजली पहुंचाना मुश्किल था, वहां सोलर पावर के माध्यम से बिजली मुहैया कराई गई। कोरिया जिले का खड़गवां तहसील जो कई सालों तक पिछड़ा हुआ था, बिजली पहुंच जाने के कारण अब विकास के पथ पर अग्रसर है।

छत्तीसगढ़ भारत के प्रगतिशील राज्यों में से एक है जो व्यापार और विकास के लिए कई अवसर प्रदान करता है। उत्तर और दक्षिण को जोड़ने वाला यह वन्य प्रदेश अपनी समृद्ध खनिज संपदा और घने वनों के अतिरिक्त सुशासन और बिजली उत्पादन के बल पर एक कुशल व्यापार-अनुकूल केंद्र बनने की क्षमता रखता है।

छत्तीसगढ़ और वहां के लोगों की आर्थिक स्थिति को सुधारना और राज्य को देश के विकास की मुख्यधारा से जोड़ना, केंद्र और राज्य सरकार की प्राथमिकता है । 'पीएम-सौभाग्य' योजना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसकी बदौलत आज छत्तीसगढ़ के हर घर में बिजली का उजियारा पहुंच चुका है।

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