महिला वोटरों को चुनावी लॉलीपॉप, किस दल के लिए घाटे का सौदा हो सकता है? जानिए
नई दिल्ली, 12 दिसंबर: भारत में लोकतंत्र जितना मजबूत हो रहा है, चुनावी वादों के मामले वह उतना ही संकुचित होता जा रहा है। लगभग सभी राजनीतिक दल अब सीधे-सीधे वोटरों को निजी प्रलोभन देने पर उतर आए हैं। इसी कड़ी में मौजूदा पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों में कुछ दलों ने महिला वोटरों को लुभाने के लिए चुनावी वादों का पिटारा खोल दिया है। सबसे बड़ी बात है कि ज्यादातर पार्टी किसी न किसी राज्य में सत्ता में है। तो क्या महिला वोटरों के मन में यह सवाल नहीं आएगा कि आप जो हमसे वादा करने आए हैं, वह आपने उन राज्यों की महिलाओं को क्यों नहीं दिया है, जहां आपकी पहले से ही सरकारें हैं ?अगर महिला वोटरों के मन में यह सवाल उठता है तो चुनावी वादे घाटे का भी सौदा साबित हो सकता है। इस तरह के सबसे ज्यादा वादे यूपी, पंजाब और गोवा में अबतक किए गए हैं, जहां दो में (यूपी और गोवा में )भाजपा की सरकारें हैं और पंजाब में कांग्रेस काबिज हैं। इन दोनों दलों को वहां जनता को पांच साल की सरकार का हिसाब देना है।

उत्तर प्रदेश और गोवा में कांग्रेस की चुनावी गुगली
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने यूपी के अलावा जिस राज्य में पार्टी के लिए प्रचार करना शुरू किया है, वह है गोवा। वहां पर उन्होंने आदिवासी महिलाओं के साथ डांस किया है, जो वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ है और इसको लेकर उनपर आरोप भी लग रहे हैं कि देश में सीडीएस बिपिन रावत और उनकी पत्नी के अलावा 11 सैनिकों के असामयिक निधन से शोक की लहर है और वो मस्ती के मूड में हैं। लेकिन, यहां मुद्दा है 'लड़की हूं, लड़ सकती हूं' वाले नारे के साथ महिला वोटरों को लुभाने पर उनका फोकस। उन्होंने गोवा में महिला वोटरों से वादा किया है कि कांग्रेस सत्ता में आई तो महिलाओं को नौकरियों में 30% आरक्षण देगी। वह यूपी में पार्टी के घोषणापत्र में महिलाओं को 40 फीसदी सरकारी नौकरी देने का भी वादा कर चुकी हैं। यूपी में 40 फीसदी सीटें महिलाओं को देने का ऐलान वह शुरू में ही कर चुकी हैं। यानी कुल मिलाकर प्रियंका के जरिए कांग्रेस महिला वोटरों का आशीर्वाद पाने की उम्मीद कर रही है।

आम आदमी पार्टी का 1,000 रुपये वाला वादा
कांग्रेस ने जिस सियासी चाल को अब चलना शुरू किया है, आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल उसके चतुर खिलाड़ी माने जाते हैं। उन्होंने पहले पंजाब में चुनाव जीतने पर 18 साल से ऊपर की हर महिला को हर महीने 1,000 रुपये देने का वादा किया और पिछले हफ्ते उन्होंने गोवा में भी यही वादा दोहरा दिया है। उन्होंने यह भी साफ किया है कि यह 1,000 रुपया सिर्फ परिवार की एक महिला को नहीं मिलेगा बल्कि, घर में 18 साल से ज्यादा उम्र की जितनी भी महिलाएं या लड़कियां होंगी, उन सबको आम आदमी पार्टी की सरकार बनने पर सरकारी खजाने से फोकट में यह पैसा दिया जाएगा। जाहिर है कि 18 साल से ज्यादा उम्र की सभी महिलाएं, मतलब चाहे वह खुद कितनी भी संपत्तिशाली क्यों ना हों, इस फॉर्मूले के तहत सब सरकारी योजना का लाभ लेने योग्य होंगी। दक्षिण गोवा में एक सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, 'जैसे ही आम आदमी पार्टी की सरकार बनेगी, 18 साल से ऊपर की हर महिला- बेटी, बहन, मां, बहू, सास, दादी-नानी, सबके खाते में हर महीने 1,000 रुपये आएंगे।'

गोवा में टीएमसी ने भी महिला वोटरों से किया 5,000 रुपये देने का वादा
पश्चिम बंगाल की सत्ता पर बैठीं महिला मुख्यमंत्री ममता बनर्जी गोवा में कांग्रेस की जमीन हथियाने में लगी हुई हैं। आम आदमी पार्टी के बाद उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने यहां महिलाओं के लिए गृह लक्ष्मी स्कीम का वादा किया है, जिसके तहत प्रत्येक घर की मुख्य महिला सदस्य के खाते में टीएमसी सरकार बनने पर हर महीने 5,000 रुपये ट्रांसफर किए जाएंगे, चाहे उनकी खुद की आमदनी कितनी भी क्यों ना हो। टीएमसी सांसद और पार्टी की गोवा इंचार्ज महुआ मोइत्रा के अनुसार यह राशि गोवा में 3.5 लाख घरों तक पहुंचेगी। इसपर जनता के खजाने पर 1,500 से 2,000 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा, जो कि राज्य के बजट का 6-5% है। यहां गौर करने वाली बात है कि महिलाओं के लिए सभी पार्टियों की ओर से दिया गया यह चुनावी प्रलोभन किसी आर्थिक-सामाजिक आधार पर नहीं है। चाहे करोड़पति महिलाएं भी हैं, अगर वह वोटर हैं तो उन्हें भी सरकारी खजाने से लाभ देने का वादा किया जा रहा है।

इस तरह के वादे क्यों हो सकता है घाटे का सौदा?
सबसे पहला ये सवाल उठता है कि गोवा जैसा राज्य जहां प्रति व्यक्ति आय देश में सर्वाधिक है, वहां इस तरह का चुनावी वादा किया जा रहा है। टीएमसी ने जितना बड़ा ऐलान गोवा की महिलाओं के लिए किया है, उसकी शुरुआत वह पश्चिम बंगाल में भी करके मिसाल पेश कर सकती थी। वहां की आम महिलाओं की गरीबी वाली स्थिति देश से छिपी नहीं है। अरविंद केजरीवाल की पार्टी दिल्ली में सत्ता में है, वह हर महीने सभी महिला वोटरों के खाते में पैसे डालने की योजना यहीं से लॉन्च कर सकती थी। अगर वह ऐसा करती तो उसके इस वादे में भरोसे की ताकत आ सकती थी। इसी तरह कांग्रेस पंजाब में सत्ता में है। वह वहां भी महिलाओं को 40 फीसदी टिकट देकर महिला सशक्तिकरण के अपने वादों में दम दिखा सकती थी। जहां तक 30 फीसदी या 40 फीसदी महिलाओं को नौकरियों में आरक्षण देने का चुनावी वादा है तो वह अभी भी राजस्थान और छत्तीसगढ़ में इसे लागू करके चुनावी राज्यों के वोटरों का भरोसा जीत सकती है। इस तरह के वादे जिन दलों ने भी किए हैं, सबकी किसी न किसी राज्य में सरकारें हैं। लिहाजा, उनको वोटरों को यह जवाब देना पड़ेगा कि पंजाब, यूपी या गोवा के लिए जो वादे कि जा रहे हैं, वह अपने शासन वाले राज्यों में पहले क्यों नहीं पूरे करते। वहां आपको कौन रोक रहा है?












Click it and Unblock the Notifications