Electoral Bonds Data: टांय-टांय फिस्स हो गया विपक्ष का एजेंडा! लोकसभा चुनाव में उल्टा पड़ सकता है दांव?

Electoral Bonds List: सुप्रीम कोर्ट ने जब एसबीआई को आदेश दिया था कि वह इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदने वाली कंपनियों के नामों की लिस्ट चुनाव आयोग को सौंपे तो विपक्षी दलों में खुशी का ठिकाना नहीं था। उसे उम्मीद थी कि इसमें कुछ ऐसी कंपनियों के नाम बड़े दानदाताओं के रूप में सामने आएंगे, जिससे मोदी सरकार की किरकिरी हो सकती है।

लेकिन, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एसबीआई से मिली जो सूची चुनाव आयोग ने जारी की है, वह लोकसभा चुनाव से पहले विपक्षी दलों के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है।

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अडाणी-अंबानी-टाटा का नाम नहीं!
क्योंकि, विपक्षी दलों और खासकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इसको लेकर जो माहौल तैयार किया था, उससे एक आम आशंका पैदा हुई थी कि इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदने वालों की लिस्ट में अडाणी, अंबानी और टाटा ग्रुप जैसी कंपनियों का नाम सबसे ऊपर होगा।

लेकिन, जो लिस्ट सामने आई है, उसमें ऊपर के तीन सबसे बड़ी दानदाता कंपनियों के नाम तो बहुत कम ही लोगों को पता होगा। पूरी लिस्ट में वे नाम कहीं भी प्रमुखता से नजर नहीं आ रहे हैं, जिस विपक्ष चुनावी हथियार की तरह इस्तेमाल करने के इंतजार में बैठा था।

बड़े दानदाताओं के नामों ने सबको चौंकाया
इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए चुनावी चंदा देने वालों में जिस फ्यूचर गेमिंग का नाम सबसे ऊपर है, उसका कारोबार तमिलनाडु, केरल से लेकर कर्नाटक और पूर्वोत्तर जैसे राज्यों में फैला है।

इसके प्रमोटर प्रमोटर सैंटियागो मार्टिन लॉटरी किंग के नाम से मशहूर रहे हैं। 12,769 करोड़ रुपए की कुल रकम में सबसे ज्यादा 1,368 करोड़ रुपए का चंदा इसी कंपनी ने दिया है।

इसी तरह से दूसरे नंबर पर 966 करोड़ रुपए चंदा देने वाली मेघा इंजीनियरिंग विपक्ष शासित तेलंगाना के हैदराबाद स्थित कंपनी है। चौथे नंबर पर वेदांता ग्रुप का नाम आता है, जिनके अनिल अग्रवाल उत्तर भारत में भी चर्चित कारोबारी माने जाते हैं।

इसी तरह से कोलकाता स्थित मदनलाल लिमिटेड, एमकेजे इंटरप्राजेज और केवेंटर फूड पार्क ने कुल 573 करोड़ रुपए का चंदा दिया है।

सबसे बड़े 'दानी' पर कसता रहा है ईडी और आईटी का शिकंजा
फ्यूचर गेमिंग के प्रमोटर सैंटियागो मार्टिन 2011 से जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। पीएमएलए के तहत प्रवर्तन निदेशालय ने दिसंबर, 2021 में उनकी 19.6 करोड़ रुपए की संपत्ति भी जब्त की थी।

पिछले साल मई में ईडी ने दावा किया था कि उनकी कंपनियों ने गैर-कानूनी तरीके से मुनाफा कमाया, जिससे सिक्किम सरकार को 910 करोड़ रुपए तक का नुकसान हुआ। 2019 में भी आयकर अधिकारियों ने उनके 70 ठिकानों पर छापेमारी की थी।

सबसे ज्यादा चंदा बीजेपी को मिला
एसबीआई ने चुनाव आयोग को जो ब्योरा थमाया है, उसमें अप्रैल, 2019 से लेकर जनवरी, 2024 की लिस्ट है। इस दौरान चुनाव बॉन्ड का सबसे ज्यादा लाभ यानी 6,060.50 करोड़ रुपए बीजेपी को मिले हैं।

भाजपा चुनावी बॉन्ड में सबसे बड़ी हिस्सेदार है, यह जानकारी पहले ही सार्वजनिक है। मतलब, इस लिस्ट के सार्वजनिक होने से इसमें कोई नया खुलासा नहीं हुआ है।

टीएमसी दूसरे और कांग्रेस तीसरे स्थान पर
लेकिन, दूसरे नंबर पर पश्चिम बंगाल में सरकार चला रही टीएमसी है, जिसे 1609.5 करोड़ रुपए मिले हैं, यह बात जरूर चौंकाने वाली है।

क्योंकि, केंद्र में मुख्य विपक्षी कांग्रेस इसकी वजह से 1,421.9 करोड़ रुपए के साथ तीसरे नंबर है: और 1,214 करोड़ रुपए के साथ भारत राष्ट्र समिति चौथे नंबर पर है।

यानी चंदा देने वाली कंपनियों ने सभी प्रमुख पार्टियों पर खजाना लुटाया है और केंद्र समेत कई राज्यों में सरकार होने की वजह से बीजेपी ने उसमें बाजी मारी है।

अभी तक जो डेटा सामने आया है, उससे भाजपा को यह मौका मिला है कि विपक्ष की ओर से उसपर जो कुछ ही कंपनियों के हित में काम करने के आरोप लगते रहे हैं, उसका जवाब मिल गया है।

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सबसे बड़ी बात तो ये है कि जिस कंपनी ने सबसे ज्यादा चंदा दिया है, वह लगातार केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई का सामना कर रही है। मतलब, चंदे और कानूनी कार्रवाई से कोई लेना-देना नहीं है, 'कानून अपना काम' करता रहा है।

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