भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य को ED ने किया गिरफ्तार, शराब घोटाले मामले में कोर्ट ने भेजा 5 दिन की रिमांड पर
ED Raids Baghel's House: छत्तीसगढ़ की राजनीति में नया सियासी बवाल मच गया है। इस बार इस के केंद्र में हैं राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उनके बेटे चैतन्य बघेल। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार को भिलाई स्थित उनके आवास पर दबिश दी और उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। इससे पूरे राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई। यह छापेमारी राज्य में कथित ₹2,161 करोड़ के शराब घोटाले से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच का हिस्सा है।
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले से जुड़ी हुई है। शुक्रवार सुबह से ही ईडी की टीम इस मामले में कई जगहों पर छापेमारी कर रही थी। छापेमारी के दौरान कुछ अहम दस्तावेज और सबूत मिले, जिसके बाद चैतन्य बघेल को हिरासत में लिया गया। ईडी का कहना है कि शराब घोटाले में पैसों के लेन-देन और मनी लॉन्ड्रिंग के सबूतों की जांच की जा रही है। इस कार्रवाई से राज्य की सियासत में हलचल मच गई है।

ED ने इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने उन्हें पांच दिन की ED रिमांड पर भेज दिया है। ED का आरोप है कि शराब घोटाले में करोड़ों रुपये की अवैध कमाई हुई, जिसमें चैतन्य बघेल की भूमिका की जांच जरूरी है। एजेंसी अब पूछताछ के जरिए यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि घोटाले से जुड़े पैसों का लेनदेन कैसे हुआ और किन-किन लोगों की इसमें संलिप्तता है।
खास बात यह है कि यह कार्रवाई उस दिन हुई, जब विधानसभा सत्र का अंतिम दिन था। राजनीतिक और जांच एजेंसियों के बीच की इस खींचतान ने अब एक बार फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं, क्या यह केवल कानूनी प्रक्रिया है या इसके पीछे कोई और 'राजनीतिक एजेंडा' भी छिपा है? शुक्रवार को चैतन्य बघेल के भिलाई स्थित आवास पर रेड की गई, यह उनके पिता भूपेश बघेल के साथ साझा घर है।
PMLA कानून के तहत छापेमारी
अधिकारियों के मुताबिक, यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक कानून (PMLA) के तहत की गई। जांच एजेंसी को मामले में कुछ नए सबूत मिले हैं, जिसके आधार पर यह छापा मारा गया है। चैतन्य बघेल के इस घर पर इससे पहले मार्च में भी ED की टीम पहुंच चुकी है।
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भूपेश बघेल ने खुद दी जानकारी
इस छापेमारी की पुष्टि खुद भूपेश बघेल ने की। उन्होंने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए बताया कि विधानसभा सत्र के अंतिम दिन उनके भिलाई स्थित घर पर ED पहुंची। उन्होंने यह भी संकेत दिए कि यह कार्रवाई राजनीतिक मंशा से प्रेरित हो सकती है।
क्या है मामला?
ED का आरोप है कि छत्तीसगढ़ में 2019 से 2022 के बीच शराब कारोबार को लेकर एक बड़ा घोटाला हुआ, जिसमें करीब ₹2,161 करोड़ की अवैध कमाई हुई। जांच एजेंसी का दावा है कि सरकार के कुछ अधिकारी, राजनेता और शराब कारोबारी मिलकर एक सिंडिकेट चला रहे थे, जो सरकारी दुकानों के ज़रिए शराब की बिक्री और सप्लाई में गड़बड़ी कर रहा था।
पहले भी हो चुकी हैं बड़ी कार्रवाईयां
इस केस में पहले भी कई जगहों पर छापेमारी हो चुकी है, जिनमें पूर्व सरकार से जुड़े कई नेताओं और अफसरों के नाम सामने आए हैं। ED ने इस मामले में कई दस्तावेज जब्त किए हैं और पूछताछ भी जारी है।
राजनीतिक तेज
छापेमारी के समय और तरीके को लेकर कांग्रेस लगातार सवाल उठा रही है। भूपेश बघेल पहले भी कह चुके हैं कि ED और अन्य केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं को परेशान करने के लिए किया जा रहा है। यह मामला अब केवल जांच एजेंसियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि छत्तीसगढ़ की राजनीति में भी गरमाहट ला चुका है। आने वाले दिनों में इस केस से जुड़े और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
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