ED raid in Bengal: शेख शाहजहां के गुंडों ने जो किया, उसकी जिम्मेदारी से क्यों बच नहीं सकतीं ममता?
Sandeshkhali West Bengal: पश्चिम बंगाल में करोड़ों रुपए के राशन घोटाले की जांच करने गई प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम को जिस तरह से हिंसक भीड़ ने निशाना बनाया है, वह राज्य में पैदा हो रहे बहुत बड़े सियासी और संवैधानिक संकट की ओर इशारा कर रहा है।
ईडी जिस मामले की जांच कर रही है, उसकी निगरानी अदालत कर रही है। जिन लोगों पर केंद्रीय एजेंसी के जांच अधिकारियों पर जानलेवा हमले का आरोप लगा है, वह प्रदेश में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के नेता शेख शाहजहां के समर्थक बताए जा रहे हैं।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने घटना पर की गंभीर टिप्पणी
मामले की गंभीरता को इस बात से समझा जा सकता है कि कलकत्ता हाई कोर्ट ने भी इस घटना पर हैरानी जताई है। जब हाई कोर्ट के एक वकील सुदिप्त दासगुप्ता ने अदालत में जस्टिस अभिजीत गंगोपाध्याय के संज्ञान में इस घटना को लाया तो उन्होंने कहा, 'मुझे इस घटना के बारे में नहीं पता था। अगर ऐसी घटना हुई है तो ईडी अधिकारी कानून और व्यवस्था के बारे में राज्यपाल का ध्यान खींच सकते हैं।'
बंगाल की कानून-व्यवस्था पर बड़ा सवाल
कलकत्ता हाई कोर्ट के जज की यह टिप्पणी सामान्य नहीं है। कानून और व्यवस्था का मामला राज्य सूची का विषय है। इसकी जिम्मेदारी प्रदेश में चुनी हुई सरकार की होती है। इसमें गवर्नर तभी दखल देता है, जब राज्य का शासन संवैधानिक व्यवस्था के मुताबिक चलाने में दिक्कत आ रही हो।
संवैधानिक प्रावधान यह है कि जब किसी राज्य में संविधान के तहत शासन चलाना मुश्किल हो जाता है तो राज्यपाल की सिफारिश पर वहां अनुच्छेद 356 का इस्तेमाल करते हुए राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है। ऐसा करके केंद्र प्रदेश की कानून और व्यवस्था की जिम्मेदारी अपने हाथों में ले सकता है।
शेख शाहजहां के खिलाफ लुक-आउट सर्कुलर जारी
घटना की गंभीरता समझने के लिए इतना ही काफी है कि सत्ताधारी टीएमसी नेता शेख शाहजहां के खिलाफ लुक-आउट सर्कुलर जारी किया चुका है, क्योंकि उसके बांग्लादेश भागने की आशंका है। उसे ऐसा करने से रोकने के लिए बीएसएफ को अलर्ट करना पड़ा है। इसी के समर्थकों पर ईडी अधिकारियों की टीम पर जानलेवा हमले का आरोप है।
आरोपों के मुताबिक शेख के समर्थकों ने ईडी अधिकारियों के फोन, लैपटॉप और वॉलेट तक लूट लिए। घटना के बाद बंगाल पुलिस ने शाहजहां और उसके समर्थकों के खिलाफ हत्या की कोशिश का मुकदमा दर्ज किया है।
यही नहीं बंगाल पुलिस ने आरोपी के केयरटेकर की शिकायत पर ईडी अधिकारियों के खिलाफ भी आपराधिक अतिक्रमण का मामला दर्ज किया है। क्योंकि, उसका आरोप है कि जांच एजेंसी ने बिना वारंट के आरोपी के घर की तलाशी लेने की कोशिश की थी।
ईडी रेड के वक्त घर में ही दुबका था टीएमसी नेता?
जबकि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को दावा किया था कि टीएमसी नेता का घर अंदर से बंद था और उसके मोबाइल फोन का लोकेशन बता रहा था कि वह घर के अंदर ही छिपा बैठका है।
अपनी जिम्मेदारी से क्यों बच नहीं सकतीं ममता?
कानून और व्यवस्था राज्य सूची का विषय है, इसलिए जो घटना घटी है, उससे ममता बनर्जी की सरकार अपना पल्ला नहीं छुड़ा सकती। खासकर जब आरोपी सरकारी पार्टी का नेता है। ईडी अधिकारियों की सुरक्षा संवैधानिक तौर पर भी राज्य सरकार की जिम्मेदारी थी।
लेकिन, सत्ताधारी टीएमसी की ओर से जिस तरह की प्रतिक्रिया दी गई है, उससे लगता है कि वह अपनी जवाबदेही को समझने की जगह मामले को राजनीतिक मोड़ देने की कोशिश ज्यादा कर रही है।
पार्टी के प्रवक्ता कुणाल घोष ने शनिवार को कहा, 'टीएमसी हिंसा का समर्थन नहीं करती। न ही पार्टी किसी जांच को बाधित करना चाहती है और न ही भ्रष्टाचार का समर्थन करती है। लेकिन, अगर एजेंसी सोचती है कि वह बीजेपी के निर्देश पर बंगाल और यहां के लोगों को बदनाम करने के लिए सिर्फ टीएमसी नेताओं को टारगेट करेगी...यह नहीं चलेगा।'
सवाल है कि हिंसा को समर्थन नहीं करने की बात कहकर यह परोक्ष तौर पर सत्ताधारी दल के हिंसाई प्रवृत्ति के नेताओं और उनके समर्थकों को बढ़ावा देना नहीं है? देश संवैधानिक व्यवस्थाओं के आधार पर चलता है। इसके लिए संघीय ढांचा बना हुआ है।
संविधान में केंद्र और राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र निर्धारित किए गए हैं। क्या एक राज्य सरकार को लगेगा कि कोई केंद्रीय एजेंसी उसके नेताओं को निशाना बना रही है तो वह असमाजिक तत्वों को खुला छूट दे सकती है?
जब मामला अदालत के संज्ञान में है तो राज्य सरकार केंद्रीय एजेंसियों के कथित अतिक्रमण (अगर टीएमसी के दावों में दम है तो) के खिलाफ उसका दरवाजा खटखटा सकती है।
क्या है पूरा मामला?
5 जनवरी को ईडी की टीम बंगाल के नॉर्थ 24 परगना जिले के संदेशखेली में शेख शाहजहां के घर पर जांच के सिलसिले में पहुंची थी। वह तृणमूल कांग्रेस का स्थानीय और दबंग नेता है।
जैसे ही ईडी के लोग उसके घर पर दस्तक देने पहुंचे एक भीड़ जुट गई। ईडी की टीम और उनके साथ पहुंची सीआरपीएफ के लोगों की संख्या भीड़ के मुकाबले बहुत कम थी।
भीड़ ने आग्नेयास्त्रों और अन्य हथियारों से ईडी-सीआरपीएफ के लोगों पर हमला बोल दिया। उन्हें खदेड़ा जाने लगा। उनके वाहनों को नष्ट कर दिया गया। एक अधिकारी को सिर पर गंभीर चोटें लगीं। बंगाल पुलिस अभी तक शेख शाहजहां को पकड़ने में नाकाम रही है।












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