ईडी का खुलासा: राज ठाकरे ने 1 रुपए का नहीं किया निवेश, फायदा हुआ 20 करोड़ का
मुंबई। मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच कर रहा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) अब इस बात की पड़ताल कर रहा है कि कैसे मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने 2008 में मातोश्री रियल्टर्स में बिना किसी निवेश के 20 करोड़ रुपये का मुनाफा प्राप्त किया है। ईडी ने जांच में पाया कि राज ठाकरे ने मातोश्री रियल्टर्स कंपनी के गठन में एक भी पैसा निवेश नहीं किया था लेकिन 2008 में उन्होंने 20 करोड़ रुपये निकाले थे। यह कंपनी कोहिनूर सीटीएनएल का हिस्सा थी। बता दें कि ये कंपनी फिलहाल नगदी के संकट से जूझ रही है।

उन्मेश जोशी और राजन शिरोडकर से सोमवार को करीब सात घंटे तक पूछताछ की गई। यह संदेह है कि कंसोर्टियम से जुड़े कुछ और लोग जो आईएल एंड एफएस के प्रमुख डिफॉल्टर हैं, उन्हें निकट भविष्य में बुलाया जा सकता है। अनियमितताओं की जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय ने हैरतअंगेज खुलासा करते हुए बताया कि, केपीपीएल ने बाद में साल 2005 में कोहिनूर सीटीएनएल नाम से एक संगठन (कंसोर्शियम) बनाया, जिसमें केपीपीएल के 51 प्रतिशत शेयर थे। जबकि 49 प्रतिशत शेयर आईएल एंड एफएस के थे, जिन्होंने कंपनी में 225 करोड़ रुपये का निवेश किया था।
कोहिनूर CTNL एक रियलिटी क्षेत्र की कंपनी है जो पश्चिम दादर में कोहिनूर स्क्वॉयर टॉवर का निर्माण कर रही है. आईएल एंड एफएस ने अपना हिस्सा सिर्फ 90 करोड़ रुपये में बेच दिया, जिससे उसे 135 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। जबकि राज ठाकरे और उनकी सहयोगी कंपनी मातोश्री रियल्टर्स ने अपना हिस्सा बेचा और 80 करोड़ रुपये कमा लिए। 80 करोड़ में से 20 करोड़ राज ठाकरे को मिले जबकि बाकी की रकम मातोश्री रियल्टर्स के अन्य पार्टनर के पास गई।
मातोश्री रियल्टर्स ने इस संगठन में 4 करोड़ रुपये का निवेश किया, जिसमें से 3 करोड़ रुपये कॉपरेटिव बैंकों से लिए गए थे। जबकि 1 करोड़ दो बैंक खातों से आए।ईडी के सूत्रों ने कहा कि इस लेनदेन पर नजर बनी हुई है। जबकि संगठन में विभिन्न बैंक खातों के जरिए मातोश्री रियल्टर्स ने जो 36 करोड़ रुपये निवेश किए हैं, उन्हें संदिग्ध करार देते हुए जांच की जा रही है। संगठन से बाहर जाने के बाद शिरोडकर के शेयर्स का पता नहीं चल पाया जैसा कि मातोश्री रियलटर्स के बाकी 6 शेयर धारकों का हिस्सा है।












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