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डायरेक्ट कैश ट्रांसफर के बिना अर्थव्यवस्था को उठाने के लिए नाकाफी हैं आर्थिक पैकेजः विशेषज्ञ

नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने लॉकडाउन प्रभावित किसानों और प्रवासी श्रमिकों पर ध्यान केंद्रित करते हुए गुरूवार को 20 लाख करोड़ रुपए के आर्थिक पैकज की दूसरी किश्त की घोषणा की, लेकिन अभी तक लाभार्थियों तक प्रत्यक्ष नकदी समर्थन की सही मात्रा पर स्पष्टता सामने नहीं आई है

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विशेषज्ञों का मानना है कि बगैर कैश ट्रांसफर के अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन देने और उसे उठाने के लिए घोषित पैकेज इसलिए नाकाफी हैं, क्योंकि राजकोषीय प्रोत्साहन आम तौर पर बजटीय आवंटन के ऊपर और अधिक व्यय को संदर्भित करते हैं। यही कारण है कि वित्त मंत्री सीतारमन द्वारा आय समर्थन को बढ़ावा देने के उपायों के तहत दो किश्तों में घोषित आर्थिक पैकेज सही अर्थों में प्रोत्साहन के योग्य बिल्कुल नहीं हैं।

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दरअसल, वित्त मंत्री सीतारमन द्वारा विभिन्न सेक्टरों के प्रोत्साहन के लिए दो किश्तों में घोषित अधिकांश उपाय ऋण के रूप में हैं, जो एमएसएमई, किसानों अथवा समाज के कमजोर वर्गों को तुरंत लाभ नहीं पहुंचाते हैं। उदाहरण के लिए, ऋण लेने वाले किसान अब से कुछ महीनों के बाद ही फसलों के माध्यम से आय उत्पन्न कर सकेंगे।

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इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च के प्रिंसिपल इकोनॉमिस्ट और डायरेक्टर (पब्लिक फाइनेंस) सुनील कुमार सिन्हा ने कहा, अब तक की गई ज्यादातर घोषणाएं एनाब्लर्स या फैसिलिटेटर के रूप में हैं। वे अर्थव्यवस्था में जान फूंकने में सक्षम नहीं हैं।

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गुरुवार को वित्त मंत्री ने सीमांत किसानों, सड़क विक्रेताओं और प्रवासी श्रमिकों के लिए विभिन्न क्रेडिट सहायता पहलों के साथ किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के माध्यम से 2.5 करोड़ किसानों को 2 लाख करोड़ रुपए रियायती ऋण देने की घोषणा की। उन्होंने बुधवार को MSMEs के लिए 3 लाख करोड़ रुपए की जमानत मुक्त स्वत: ऋण की भी घोषणा की थी।

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गौरतलब है केंद्र ने पिछले सप्ताह अपने उधार लक्ष्य को 2020-21 के लिए बढ़ाकर 7.8 लाख करोड़ रुपए के बजट से बढ़ाकर 12 लाख करोड़ रुपये कर दिया था, लेकिन यह कोरोनोवायरस महामारी से उत्पन्न आर्थिक संकट से निपटने के उपायों में ज्यादा कारगर होता नहीं दिख रहा है।

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इसके अलावा RBI द्वारा बाजार में तरलता प्रदान करने और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना के तहत आय समर्थन भी प्रधानमंत्री द्वारा घोषित 20 लाख करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि का हिस्सा है।

हालांकि पीडब्ल्यूसी में आर्थिक सलाहकार सेवाओं में लीडर रेन बैनर्जी का कहना है कि वित्त मंत्री द्वारा MSMEs, NBFC, HFC, MFI और डिस्कम्स के लिए पहले किश्त के दौरान की गई घोषणाएं डीटेल्स के अनुरूप हैं। चूंकि कुल मिलाकर राजकोषीय प्रभाव केवल 4,000 करोड़ रुपए तक सीमित है इसलिए घोषित कुछ उपायों से प्रवासी श्रमिकों को लंबी अवधि के लिए राहत मिलेगी।

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उन्होंने बताया कि बुधवार को घोषित 6 लाख करोड़ रुपए के वित्तीय पैकेज का प्रभाव वित्तीय वर्ष 2021 के लिए घोषित 20,000 करोड़ रुपए के राजकोषीय घाटे से कम था।

उल्लेखनीय है गुरूवार को वित्त मंत्री द्वारा 20 लाख करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज की दूसरी किश्त में विशेष रूप से सड़क विक्रेताओं, प्रवासी श्रमिकों और किसानों की पीड़ा को कम करने के लिए उपायों की थी। इनमें केंद्र ने 'वन नेशन, वन राशन कार्ड' शुरू करने की घोषणा शामिल है।

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वन कार्ड वन नेशन प्रवासी श्रमिकों को किसी भी राज्य में पीडीएस राशन कार्ड का उपयोग करने की अनुमति देता है और गैर-कार्ड धारकों की खाद्यान्न की समस्या को दूर करने के लिए प्रति परिवार को पांच किलो गेहूं या चावल और एक किलो चना मिलेगा।

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