Uttarakhand News: बद्रीनाथ धाम में दान-चढ़ावे के मामले में सरकार सख्त, उच्च स्तरीय जांच समिति गठित; बीकेटीसी कर्मचारी निलंबित

उत्तराखंड सरकार ने बद्रीनाथ धाम में कथित दान और चढ़ावे में अनियमितताओं की जांच के लिए तीन सदस्यीय उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया है। बीकेटीसी ने एक वरिष्ठ सहायक को निलंबित कर दिया है, एफआईआर दर्ज की गई है, और चार सदस्यीय जांच चल रही है। समिति 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट देगी और पारदर्शिता के लिए सुधारों का सुझाव देगी।

बद्रीनाथ धाम में दान-चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं की शिकायतों पर उत्तराखंड सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है। वहीं, प्रशासनिक पारदर्शिता और अनुशासन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने अध्यक्ष कार्यालय में तैनात एक कर्मचारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। उसके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई है।

Badrinath donation probe begins

सरकार द्वारा गठित जांच समिति की अध्यक्षता गढ़वाल आयुक्त आनंद स्वरूप करेंगे। समिति में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के प्रबंध निदेशक संदीप तिवारी तथा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक कार्यालय में निदेशक (वित्त) जगत सिंह चौहान को सदस्य बनाया गया है। पर्यटन सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल द्वारा जारी आदेश के अनुसार समिति बद्रीनाथ मंदिर में प्राप्त दान-चढ़ावे से संबंधित कथित अनियमितताओं की विस्तृत जांच करेगी और 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट एवं अनुशंसाएं राज्य सरकार को सौंपेगी।

पारदर्शिता बढ़ाने के लिए भी देगी सुझाव

जांच के दौरान आवश्यकता पड़ने पर समिति किसी भी अधिकारी, विशेषज्ञ या संबंधित व्यक्ति की राय और सहयोग ले सकेगी। इसके अलावा दान-चढ़ावे के प्रबंधन तंत्र को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक सुधारात्मक सुझाव भी सरकार को सौंपे जाएंगे।

बीकेटीसी कर्मचारी निलंबित, एफआईआर दर्ज

दूसरी ओर, बीकेटीसी ने अध्यक्ष कार्यालय में तैनात व्यक्तिगत सहायक प्रमोद नौटियाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई है। बताया गया कि 3 जुलाई 2026 को प्रथम दृष्टया गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। मामले की निष्पक्ष जांच के लिए चार सदस्यीय जांच समिति भी गठित की गई थी।

समिति की प्रारंभिक रिपोर्ट और कर्मचारी के स्पष्टीकरण की समीक्षा के बाद आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए। जांच समिति ने अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश करते हुए कहा कि संबंधित कर्मचारी को वर्तमान पद पर बनाए रखने से जांच प्रभावित हो सकती है।

निलंबन अवधि में जोशीमठ कार्यालय से रहेंगे संबद्ध

जांच की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए प्रमोद नौटियाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें नियमानुसार जीवन-निर्वाह भत्ता मिलेगा। उन्हें बीकेटीसी के जोशीमठ (चमोली) कार्यालय से संबद्ध किया गया है। निलंबन अवधि में सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना उन्हें मुख्यालय छोड़ने की अनुमति नहीं होगी। साथ ही उन्हें जांच और विभागीय कार्रवाई में पूरा सहयोग देना होगा।

बीकेटीसी ने दोहराई पारदर्शिता की प्रतिबद्धता

बीकेटीसी ने स्पष्ट किया है कि मंदिर समिति के प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और अनुशासन सर्वोच्च प्राथमिकता हैं। समिति का कहना है कि किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।

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