Dwarka Expressway बना देश का पहला AI सिस्टम वाला हाइवे, जानें एआई से कैसे कंट्रोल होगा ट्रैफिक?
Dwarka Expressway AI: भारत अब स्मार्ट हाइवेज की ओर एक बड़ा कदम बढ़ा चुका है। द्वारका एक्सप्रेसवे देश का पहला ऐसा हाइवे बना जहां पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल से ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (Advanced Traffic Management System - ATMS) पूरी तरह से लागू कर दिया गया है।
यह प्रोजेक्ट नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) की 2023 की नई गाइड लाइंस के अनुसार शुरू किया गया है और इसे एक राष्ट्रीय मॉडल के रूप में मान्यता दी जा रही है।

कैसे काम करेगा पूरा सिस्टम
इस हाईटेक ट्रैफिक सिस्टम को भारतीय राजमार्ग प्रबंधन कंपनी लिमिटेड (IHMCL) द्वारा विकसित किया गया है और इसे एनएचएआई द्वारा लागू किया गया है। कुल 56.46 किलोमीटर लंबे इस रूट पर यह सिस्टम स्थापित किया गया है, जो दिल्ली-गुरुग्राम के बीच सफर को न केवल अधिक सुरक्षित बनाता है बल्कि भारत में हाईवे ट्रैफिक नियंत्रण की दिशा में एक क्रांतिकारी बदलाव का संकेत भी देता है।
हर किलोमीटर पर हाई-रेजोल्यूशन कैमरे से होगी निगरानी
पूरे रूट पर प्रत्येक किलोमीटर की दूरी पर हाई-रेजोल्यूशन पीटीजेड (PTZ) कैमरे लगाए गए हैं। कुल 110 कैमरों के माध्यम से ट्रैफिक की गति, सड़क दुर्घटनाएं, गाड़ियों की स्पीड और ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है।
ये कैमरे एआई तकनीक से लैस हैं और किसी भी तरह की दुर्घटना, गाड़ी के ब्रेकडाउन, या सड़क पर किसी अन्य असामान्य घटना की तुरंत पहचान कर सकते हैं। इससे समय पर एंबुलेंस, पेट्रोलिंग या क्रेन जैसी सेवाओं को मौके पर भेजना संभव हो गया है।
वीडियो इंसिडेंट डिटेक्शन एंड एनफोर्समेंट सिस्टम (VIDES)
सड़क सुरक्षा को और सशक्त बनाने के लिए VIDES (Video Incident Detection and Enforcement System) लगाया गया है। यह प्रणाली पूरे रूट में चिन्हित 15 हाई-रिस्क लोकेशन्स पर ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन को पहचानती है।
- ओवरस्पीडिंग
- गलत लेन में वाहन चलाना
- बिना हेलमेट बाइक चलाना
- सीट बेल्ट न पहनना
- मोबाइल फोन पर बात करते हुए वाहन चलाना
इस सिस्टम को ई-चालान पोर्टल से जोड़ा गया है, जिससे नियम तोड़ने वालों को तुरंत चालान भेजा जा सकता है।
स्पीड डिस्प्ले और रियल टाइम अलर्ट सिस्टम
हाइवे किनारे व्हीकल एक्टुएटेड स्पीड डिस्प्ले (VASD) सिस्टम लगाए गए हैं जो गाड़ियों की वास्तविक स्पीड को दिखाते हैं और यदि कोई वाहन तय सीमा से तेज चलता है तो तुरंत चेतावनी देता है।
इसके अतिरिक्त, वेरिएबल मैसेज साइनबोर्ड (VMS) लगाए गए हैं, जो मौसम, दुर्घटना, ट्रैफिक डायवर्जन जैसी अहम सूचनाएं यात्रियों तक रियल टाइम में पहुंचाते हैं। यह ड्राइवरों को निर्णय लेने में मदद करते हैं और ट्रैफिक फ्लो को सुगम बनाते हैं।
हाईटेक कंट्रोल रूम - बिजवासन टोल पर कमांड सेंटर
द्वारका एक्सप्रेसवे के पूरे ट्रैफिक सिस्टम की निगरानी 9+050 किमी पर स्थित बिजवासन टोल प्लाजा में बनाए गए हाईटेक कंट्रोल रूम से की जाती है। इसमें ड्यूल वीडियो वॉल, इंटीग्रेटेड सॉफ्टवेयर, और एआई एनालिटिक्स जैसे एडवांस फीचर्स शामिल हैं।
यहां से पूरे रूट पर नजर रखी जाती है और जरूरत पड़ने पर एंबुलेंस, पुलिस पेट्रोलिंग गाड़ी या क्रेन जैसी सेवाओं को मॉबाइल ऐप के माध्यम से तुरंत रवाना किया जा सकता है।
यह प्रोजेक्ट सिर्फ दिल्ली और गुरुग्राम के बीच यात्रा को अधिक सुरक्षित और स्मार्ट नहीं बनाता, बल्कि यह भविष्य के भारत के हाइवे सिस्टम का रोडमैप भी प्रस्तुत करता है। सरकार की योजना है कि इसी तरह के AI-पावर्ड ट्रैफिक सिस्टम को आने वाले समय में देश के अन्य हाईवे और एक्सप्रेसवे पर भी लागू किया जाए। इसका उद्देश्य है:
- सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना
- समय पर मदद पहुंचाना
- ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई
- यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोपरि बनाना
द्वारका एक्सप्रेसवे पर लागू किया गया यह स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम न केवल एक तकनीकी उपलब्धि है, बल्कि यह भारतीय सड़क प्रणाली में एक नई क्रांति का भी संकेत है। यह पहल दिखाती है कि भारत अब केवल सड़कों का निर्माण नहीं कर रहा, बल्कि उन्हें स्मार्ट, सुरक्षित और उत्तरदायी भी बना रहा है। आने वाले वर्षों में यह मॉडल देशभर में लागू होकर लाखों यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकता है।












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