अब 8 घंटे की जगह 9 घंटे करना पड़ सकता है काम, सरकार ने तैयार किया ड्राफ्ट
नई दिल्ली। केंद्र सरकार दफ्तरों में कामकाज के समय में इजाफा कर सकती है। दरअसल, सरकार ने वेज कोड ड्राफ्ट रूल्स पेश किया है जिसमें दफ्तरों में कामकाज का समय 8 घंटे से बढ़ाकर 9 घंटे करने का प्रस्ताव है। हालांकि, सरकार ने नेशनल मिनिमम वेज पर चुप्पी साधी हुई है और ड्राफ्ट में इसका जिक्र नहीं किया गया है। इस ड्राफ्ट में सरकार ने अधिकांश पुराने सुझावों को रखा है और भौगोलिक आधार पर वेतन को भविष्य में तीन भागों में बांटने की बात कही है।

ड्राफ्ट रुल्स के मुताबिक, कामकाज के घंटे को 8 घंटे से बढ़ाकर 9 घंटे करने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, इसको लेकर अस्पष्टता भी है क्योंकि ड्राफ्ट में कहा गया है कि मासिक तौर पर प्रतिदिन कामकाज के घंटों 8 घंटों की 26 दिनों के आधार पर गणना की जाएगी, यानी पुराने आधार पर ही इसकी गणना की जाएगी। वहीं, सरकार की तरफ से नेशनल मिनिमम वेज पर लेबर कोड ऑन वेजेज की तरह ड्राफ्ट रूल ऑन वेजेज को लेकर भी चुप्पी साधी गई है।
श्रम मंत्रालय ने सभी संबंधित पक्षों से इस ड्राफ्ट पर एक माह के भीतर सुझाव देने को कहा है। इस ड्राफ्ट में कहा गया है कि भविष्य में एक एक्सपर्ट कमेटी मिनिमम वेज तय करने की सिफारिश सरकार से करेगी। इस साल जनवरी में एक आंतरिक पैनल ने केंद्रीय श्रम मंत्रालय को भेजी एक रिपोर्ट में कहा था कि भारत में राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन 375 रु प्रतिदिन होना चाहिए।
इस प्रकार मासिक तौर पर ये वेतन 9,750 रु होगा। पैनल ने अपनी रिपोर्ट में 1430 रु का हाउसिंग अलाउंस भी देने का प्रस्ताव दिया था। इस ड्राफ्ट में कहा गया है कि जब न्यूनतम वेतन पर कोई फैसला लिया जाएगा, तब देश को तीन भौगोलिक कैटेगरी में बांटा जाएगा। इनमें मेट्रोपॉलिटन एरिया, जिसकी जनसंख्या 40 लाख या ज्यादा, नॉन-मेट्रोपॉलिटन, जिसकी जनसंख्या 10-40 लाख और ग्रामीण इसके शामिल होंगे। वहीं, घर का किराया न्यूनतम वेतन के 10 फीसदी के बराबर पर तय होगा। हालांकि, ये स्पष्ट नहीं है कि कैटेगरी के हिसाब में इसमें कोई बदलाव होगा या नहीं।












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