तीसरी लहर से बचाव के लिए आने वाले दिनों में प्रतिदिन 1 करोड़ लोगों का टीकाकरण हमारा लक्ष्य- डॉ. एनके अरोड़ा
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च काउंसिल (आईसीएमआर) के सदस्य डॉ. एनके अरोड़ा ने कहा कि आईसीएमआर ने एक स्टडी की है जिसके मुताबिक कोरोना की तीसरी लहर देर से आने की संभावना है।
नई दिल्ली, 27 जून। कोरोना वायरस की दूसरी लहर अभी खत्म नहीं हुई कि देश के स्वास्थ्य विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों ने कोरोना की तीसरी लहर की भविष्यवाणी भी कर दी है। कोरोना की तीसरी लहर के प्रभाव को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने तैयारियां शुरू कर दी हैं, साथ ही राज्य सरकारों को भी एकदम चौकन्ना रहने के लिए कहा है।
कोरोना की तीसरी लहर पर अपनी राय रखते हुए नेशनल टेक्निकल एडवाइजरी ग्रुप आफ इम्यूनाइजेशन के चीफ और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च काउंसिल (आईसीएमआर) के सदस्य डॉ. एनके अरोड़ा ने कहा कि आईसीएमआर ने एक स्टडी की है जिसके मुताबिक कोरोना की तीसरी लहर देर से आने की संभावना है। उन्होंने कहा कि हमारे पास कोरोना की तीसरी लहर से पहले हर किसी का टीकाकरण करने के लिए 6-8 महीने का समय है। आने वाले दिनों में हमारा लक्ष्य प्रतिदिन 1 करोड़ लोगों का टीकाकरण करने का है।

तीसरी लहर को डेल्टा प्लस से जोड़ना अभी जल्दबाजी
एक मीडिया चैनल से बातचीत में उन्होंने कहा कि कोरोना का डेल्टा प्लस वेरिएंट तीसरी लहर का कारण बनेगा यह कहना फिलहाल जल्दबाजी होगी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि कोरोना की लहरों का कारण इसके नए वेरिएंट ही हैं, इसलिए इस बात से इंकार भी नहीं किया जा सकता कि डेल्टा प्लस वेरिएंट कोरोना की तीसरी लहर का कारण बने।
इस दौरान उन्होंने तीन महत्वपूर्ण बातों पर जोर दिया
उन्होंने कहा कि यदि कोरोना की दूसरी लहर में एक बड़ी आबादी संक्रमित हुई है तो तीसरी लहर में लोगों को सर्दी खांसी जैसी समस्याएं होंगी, क्योंकि ऐसे लोगों में एंटीबॉडी का निर्माण हो चुका है।
उन्होंने आगे कहा कि दूसरी महत्वपूर्ण बात ये है कि जिस रफ्तार से देश में टीकाकरण हो रहा है यदि इस रफ्तार से ही टीकाकरण होता रहा तो कोरोना की तीसरी लहर तक आबादी का एक बड़ा हिस्सा टीका लगवा चुका होगा। इससे तीसरी लहर का प्रभाव उतना नहीं होगा, जिसका लोगों को डर है।
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कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करना जरूरी
उन्होंने तीसरी महत्वपूर्ण बात बताते हुए कहा कि तीसरी लहर के प्रभाव को कम करने के लिए हमें कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करना जरूरी है। अगर हम नियमित तौर पर ऐसा करते रहे तो तीसरी लहर से काफी हद तक बचा जा सकता है।












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