#APJAbdulKalam: एपीजे अब्दुल कलाम: कैसे बना मैं राष्ट्रपति, जानिए उन्हीं की जुबानी

नई दिल्ली। आज पूरा देश अपने-अपने तरीके से देश के मिसाइल मैन यानी कि डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को याद कर रहा है। आज कलाम साहब की दूसरी बरसी है। आज भले ही वो सशरीर हमारे बीच में नहीं है लेकिन अपने विचारों और अपने आदर्शों की वजह से वो आज भी हर भारतवासी के जेहन में जिंदा है।

साल 2002 में जब उनका नाम राष्ट्रपति चुनाव के लिए सामने आया था तो देश का हर बाशिंदा चौंक गया था क्योंकि पृथ्वी, अंतरिक्ष की बात करने वाले कलाम का तो राजनीति से दूर-दूर तक कोई वास्ता ही नहीं था।

अपने राष्ट्रपति बनने की अनमोल कहानी खुद कलाम साहब ने In this extract from Turning Points: A Journey through Challenges में बयां की थी, आइए आपको भी बताते हैं उसके खास अंश...

 10 जून 2002

10 जून 2002

कलाम ने लिखा था कि 10 जून 2002 की सुबह अनुसंधान परियोजनाओं पर प्रोफेसरों और छात्रों के साथ मैं काम कर रहा था, रोजाना की तरह क्लास 60 बच्चों के लिए थी लेकिन क्लास में उस वक्त 300 से ज्यादा छात्र मौजूद थे, मैं उन सभी प्यारे बच्चों के साथ अपने अनुभवों को साझा कर रहा था, वो क्लास बहुत खूबसूरत थी। उस क्लास को खत्म करने के बाद मैं बहुत प्रसन्न होकर जब वापस अपने कार्यालय की ओर लौटा तो अन्ना यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रोफेसर कलानिधि ने बताया कि मेरे ऑफिस में दिन में कई बार फोन आए और कोई मुझसे बात करने को व्याकुल है। जैसे ही मैं अपने कमरे में पहुंचा तो देखा कि फोन की घंटी बज रही थी।

देश को आप जैसे एक राष्ट्रपति की जरूरत है?

देश को आप जैसे एक राष्ट्रपति की जरूरत है?

मैंने जैसे ही फोन उठाया दूसरी तरफ से आवाज आई कि प्रधानमंत्री आपसे बात करना चाहते हैं। मैं प्रधानमंत्री से फोन कनेक्ट होने का इंतजार ही कर रहा था, कि आंध्रप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू का मेरे सेलफोन पर फोन आया। नायडू ने कहा कि प्रधानमंत्री अटल बिहारी आप से कुछ महत्वपूर्ण बात करने वाले हैं और आप उन्हें मना मत कीजिएगा। मैं नायडू से बात कर ही रहा था, कि अटल बिहारी बाजपेयी से कॉल कनेक्ट हो गई। बाजपेयी ने फोन पर कहा कि कलाम आप की शैक्षणिक जिंदगी कैसी है? मैंने कहा बहुत अच्छी। बाजपेयी ने आगे कहा कि मेरे पास आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण खबर है, मैं अभी गठबंधन के सभी नेताओं के साथ एक अहम बैठक करके आ रहा हूं, और हम सबने फैसला किया है कि देश को आप जैसे एक राष्ट्रपति की जरूरत है।

 प्रधानमंत्री अटल बिहारी का फोन

प्रधानमंत्री अटल बिहारी का फोन

मैंने आज रात इसकी घोषणा नहीं की है, आपकी सहमति चाहिए। बाजपेयी ने कहा कि मैं सिर्फ हां सुनना चाहता हूं ना कि नहीं। मैंने कहा कि एनडीए करीब दो दर्जन पार्टियों का गठबंधन है और कोई जरूरी नहीं कि हमेशा एकता बनी रहे। अपने कमरे में पहुंचने के बाद मेरे पास इतना भी वक्त नहीं था, कि मैं बैठ भी सकूं। भविष्य को लेकर मेरी आंखों के सामने कई चीजें नजर आने लगीं, पहली बात हमेशा छात्रों और प्रोफेसर के बीच घिरे रहना और और दूसरी तरफ संसद में देश को संबोधित करना।

 2 घंटे का समय

2 घंटे का समय

ये सब मेरे दिमाग में घूमने लगा, मैंने अटल जी को कहा कि क्या आप मुझे ये फैसला लेने के लिए 2 घंटे का समय दे सकते हैं? अटल जी ने ओके बोला और कहा कि आपकी हां के बाद हम सर्वसम्मति पर काम करेंगे। अगले दो घंटों में मैंने मेरे करीबी दोस्तों को करीब 30 कॉल किए, जिसमें कई सिविल सर्विसेज से थे तो कुछ राजनीति से जुड़े लोग थे।

भारत 2020 मिशन

भारत 2020 मिशन

उन सबसे बात करके दो राय सामने आई। एक राय थी कि मैं शैक्षणिक जीवन का आनंद ले रहा हूं, इसलिए इसे छोड़ना नहीं चाहिए। वहीं दूसरी राय थी कि मेरे पास मौका है भारत 2020 मिशन को देश और संसद के सामने प्रस्तुत करने का। ठीक 2 घंटे बाद मैंने अटल जी को फोन किया और कहा मैं इस महत्वपूर्ण मिशन के लिए तैयार हूं। बाजपेयी जी ने कहा धन्यवाद। 15 मिनट के अंदर ये खबर पूरे देश में फैल गई। थोड़ी ही देर के बाद मेरे पास फोन कॉल्स की बाढ़ आ गई। मेरी सुरक्षा बढ़ा दी गई और मेरे कमरे में सैकड़ों लोग इकट्ठे हो गए। उसी दिन अटल जी ने विपक्ष की नेता सोनिया गांधी से बात की। मीडिया वाले मेेेरे बारे में ही बातें करने लगे।

कैप्टन लक्ष्मी सहगल

कैप्टन लक्ष्मी सहगल

जब सोनिया ने उनसे पूछा कि क्या एनडीए की पसंद फाइनल है। प्रधानमंत्री ने कहा कि हां, तब सोनिया गांधी ने अपनी पार्टी के सदस्यों और सहयोगी दलों से बात कर मेरी उम्मीदवारी के लिए समर्थन किया। हालांकि लेफ्ट ने इस पर सहमति नहीं जताई, अगर वो ऐसा करते तो मुझे खुशी होती और उन्होंने मेरे मुकाबले में कैप्टन लक्ष्मी सहगल को खड़ा किया।

राजनीति से कोई रिश्ता नहीं...

राजनीति से कोई रिश्ता नहीं...

गौरतलब है कि डॉ एपीजे अब्दुल कलाम, 25 जुलाई को राष्ट्रपति बने। कुल दो प्रत्याशियों में कलाम को 9,22,884 वोट मिले। वहीं लेफ्ट समर्थित उम्मीदवार कैप्टन लक्ष्मी सहगल को 1,07,366 मत मिले। वो ऐसे पहले राष्ट्रपति रहे हैं जिनका राजनीति से कभी दूर का भी संबंध नहीं रहा।

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