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Don Abu Salem क्या 21 साल बाद जेल से आएगा बाहर? किसके लिए पैरोल चाहता है? क्यों तड़प रहा? UP से है पूरा Link

Underworld Don Abu Salem Parole Reason: 1993 मुंबई बम धमाकों के लिए उम्रकैद की सजा काट रहे कुख्यात अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम ने हाल ही में बॉम्बे हाईकोर्ट में इमरजेंसी पैरोल की मांग की है। 21 साल से नासिक जेल में बंद है। यह मामला राम रहीम जैसे केस से तुलना हो रहा है, जहां सजा के बावजूद पैरोल मिलती है।

आपको बता दें कि, बीती 1 दिसंबर को सलेम को एस्कॉर्ट के साथ जाने की अनुमति दी, लेकिन खर्च ज्यादा होने और जमानतदार न मिलने से डीआईजी ने रिजेक्ट कर दिया। अबू सलेम को 'फ्लाइट रिस्क' माना गया। पहले, 2009 और 2011 में मां और खाला की मौत पर पैरोल मिली थी, और वो समय पर सरेंडर कर चुका है। यह मामला राम रहीम जैसे केस से तुलना हो रहा है, जहां सजा के बावजूद पैरोल मिलती है।

Don Abu Salem parole

ये न सिर्फ शाही परिवारों या सेलिब्रिटी की तरह सुर्खियां बटोर रहा है, बल्कि अपराध जगत, पारिवारिक रिश्तों और कानूनी प्रक्रियाओं के इंटरसेक्शन को उजागर करता है। आइए, इस पूरी कहानी को विस्तार से समझते हैं - अबू हाकिम अंसारी की जिंदगी, उनके परिवार का UP कनेक्शन और पैरोल विवाद की इनसाइड स्टोरी...

Who Was Abu Hakim Ansari: कौन था अबू हाकिम अंसारी?

अबू हाकिम अंसारी उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के सराय मीर गांव का रहना वाला था। वो अबू सलेम का सबसे बड़ा भाई था और परिवार में उसे'चुंचुन मियां' के नाम से भी जाना जाता था। अबू सलेम का जन्म 1968-69 के आसपास हुआ और वो चार भाइयों में तीसरे नंबर पर है, तो अबू हाकिम की उम्र लगभग 60 के दशक में होने का अनुमान लगाया जा सकता है, हालांकि कोई आधिकारिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। उसका परिवार निचली-मध्यम वर्ग का था, जहां पिता अब्दुल कयूम अंसारी लोकल कोर्ट में वकील थे और क्रिमिनल केस हैंडल करते थे। पिता की सड़क हादसे में मौत के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति बिगड़ी, जिसने अबू सलेम को मुंबई की ओर रुख करने पर मजबूर किया।

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अबू हाकिम खुद कोई बड़ा अपराधी नहीं था, लेकिन भाई अबू सलेम की वजह से वो अक्सर सुर्खियों में रहा। वो स्थानीय स्तर पर पारिवारिक संपत्ति और जमीन के मामलों में सक्रिय था। 2018 में, जब अबू सलेम ने जेल से अपनी पैतृक संपत्ति के गलत कब्जे की शिकायत की, तो अबू हाकिम ने ही लोकल रेवेन्यू अथॉरिटीज से संपर्क कर परिवार के नाम पर जमीन रिस्टोर करवाई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सराय मीर में उसकी फैमिली प्रॉपर्टी को कुछ लोकल लोगों ने फर्जी दस्तावेजों से हड़प लिया था, लेकिन अबू हाकिम की कोशिशों से इसे वापस लिया गया।

Abu Hakim Ansari Criminal Case: अबू हाकिम पर कितने क्रिमिनल केस?

हालांकि, अबू हाकिम पर भी अपराध के आरोप लगे थे। 2024 में, आजमगढ़ पुलिस ने उस पर एफआईआर दर्ज की, जहां एक रेस्टोरेंट ओनर ने आरोप लगाया कि अबू हाकिम ने पैसे की मांग की और मौत की धमकी दी। इसमें अबू सलेम का नाम लेकर डराने का जिक्र था, जो दर्शाता है कि भाई की कुख्याति ने अबू हाकिम की लोकल इमेज पर असर डाला। फिर भी, मीडिया रिपोर्ट्स में उन्हें मुख्य रूप से अबू सलेम के परिवारिक प्रतिनिधि के तौर पर ही दिखाया गया है, न कि किसी बड़े माफिया सरगना के रूप में। उसकी पत्नी, बच्चों या नेटवर्थ के बारे में कोई विश्वसनीय जानकारी उपलब्ध नहीं है, जो बताता है कि वे पब्लिक फिगर नहीं थे।

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Abu Salem UP Connection: UP से गहरा नाता?

अबू हाकिम का उत्तर प्रदेश से गहरा कनेक्शन था, खासकर आजमगढ़ के सराय मीर से, जहां पूरा अंसारी परिवार बसा हुआ है। यह इलाका मुस्लिम-बहुल है और यहां की जड़ें अबू सलेम की अपराधी जिंदगी की शुरुआत से जुड़ी हैं। अबू सलेम ने अपने गैंग के लिए आजमगढ़ से ही मुस्लिम युवकों को रिक्रूट किया था, जो मुंबई में शूटिंग कर वापस लौट जाते थे। अबू हाकिम यहां रहकर परिवार की देखभाल करता था, जबकि अबू सलेम मुंबई में दाऊद इब्राहिम के D-कंपनी में ड्राइवर से डॉन बना।

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Abu Salem Family Tree: अबू सलीम फैमिली ट्री?

रिपोर्ट्स के अनुसार, अबू सलेम चार भाई हैं। अबू हाकिम (सबसे बड़ा-आजमगढ में बैटरी की दुकान), उसके बाद एजाजा (लखनऊ में रहता है), फिर अबू सलेम (तीसरा), और चौथा सबसे छोटा अबू जैश (लखनऊ में रहता है)। एक बहन अंजुम अंसारी भी हैं। 2005 में, अबू हाकिम के बेटे (अबू सलेम के भतीजे) का जिक्र हुआ, जो क्लास 12 का स्टूडेंट था। अबू सलेम ने अपनी याचिका में अबू हाकिम को 'पिता तुल्य' बताया, जो दर्शाता है कि बड़े भाई ने परिवार की जिम्मेदारी संभाली थी।

Abu Salem Parole Reason: मौत की खबर और पैरोल विवाद- 40वें दिन की रस्म का बहाना?

अबू हाकिम अंसारी की मौत 14 नवंबर 2025 को लंबी बीमारी के बाद हुई। अबू सलेम ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा कि वे भाई को पिता जैसा मानते थे और मौत से पहले मिलना चाहते थे। उन्होंने जेल अथॉरिटीज से रेगुलर पैरोल मांगा था, लेकिन प्रक्रिया लंबित रहने से मिल नहीं सके। अब, मौत के बाद 40वें दिन की कुरान ख्वानी, कब्रिस्तान पर दुआ और परिवार से मिलने के लिए इमरजेंसी पैरोल मांगी है।

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पैरोल क्यों रोकी गई?

एडीजीपी ने 1 दिसंबर को एस्कॉर्ट के साथ जाने की अनुमति दी, लेकिन खर्च ज्यादा होने और जमानतदार न मिलने से डीआईजी ने रिजेक्ट कर दिया। अबू सलेम को 'फ्लाइट रिस्क' माना गया। वे कहते हैं कि छोटा भाई जमानतदार बनने वाला था, लेकिन गलतफहमी से नहीं आया। अब दो वकील तैयार हैं। पहले, 2009 और 2011 में मां और खाला की मौत पर पैरोल मिली थी, और वो समय पर सरेंडर कर चुके हैं।

यह मामला राम रहीम जैसे केस से तुलना हो रहा है, जहां सजा के बावजूद पैरोल मिलती है। लेकिन अबू सलेम का केस संवेदनशील है, क्योंकि वे 1993 ब्लास्ट्स (257 मौतें) और 1995 में बिल्डर प्रदीप जैन की हत्या के दोषी हैं। पुर्तगाल से 2005 में प्रत्यर्पण के बाद उनकी सजा 25 साल की कर दी गई।

Who Is Don Abu Salem: अबू सलेम का संक्षिप्त बैकग्राउंड?

अबू सलेम (जन्म: 1968-69) सराय मीर से मुंबई पहुंचा, जहां वो टैक्सी ड्राइवर से दाऊद गैंग में शामिल हुआ। वो ब्लास्ट्स में हथियार ट्रांसपोर्ट के आरोपी हैं और 2005 से नासिक जेल में हैं। उसकी पहली पत्नी समीरा जुमानी से बच्चे हैं, और बाद में मोनिका बेदी (Monica Bedi) से रिश्ता रहा। अब वो 25 साल की सजा पूरी होने का दावा कर रिहाई मांग रहा है। हालांकि, सरकारी डेटा के मुताबिक, अभी 21 साल ही पूरे हुए हैं, 2030 में 25 साल पूरे होंगे।

क्या कहती है कहानी? अपराध, परिवार और कानून का मेल

अबू हाकिम अंसारी की मौत ने अबू सलेम के अतीत को फिर से जिंदा कर दिया है। यह केस दर्शाता है कि अपराधी जीवन के पीछे भी पारिवारिक बंधन होते हैं, लेकिन कानून पैरोल जैसे मामलों में सख्ती बरतता है। अगर पैरोल मिली, तो यह UP के आजमगढ़ में एक भावुक पुनर्मिलन होगा, लेकिन सुरक्षा चिंताएं बनी रहेंगी।

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