क्या प्रशांत किशोर ने 'दैवीय अधिकार' वाला आइडिया चुराया ?
नई दिल्ली, 3 दिसंबर: चुनावी रणनीतिकार और तृणमूल कांग्रेस के लिए काम कर रहे प्रशांत किशोर ने गुरुवार को एक ट्वीट करके कांग्रेस को तिलमिला दिया है। हालांकि, उन्होंने किसी का नाम तो नहीं लिखा, लेकिन माना जा रहा है कि उन्होंने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधने की कोशिश की है। उससे पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद उनके विदेश जाते रहने को लेकर उनपर इशारों में तंज कस चुकी हैं। प्रशांत किशोर ने कहा था कि कांग्रेस का नेतृत्व करना किसी व्यक्ति का 'दैवीय अधिकार' नहीं है। एक वरिष्ठ पत्रकार ने दावा किया है कि लगता है कि पीके ने यह आइडिया उन्हीं के एक ट्वीट से उठाया है।

प्रशांत किशोर ने 'दैवीय अधिकार' शब्द कहां से उठाया ?
वरिष्ठ पत्रकार सागरिका घोष ने एक ट्वीट करके कहा है कि लगता है कि प्रशांत किशोर ने 'दैवीय अधिकार' वाला ट्वीट उनके ट्वीट से ही उठाया है। दरअसल, गुरुवार को सागरिका ने एक ट्वीट किया था, जिसमें उन्होंने उसी विषय पर 'दैवीय जन्मसिद्ध अधिकार' जैसे शब्द का प्रयोग किया था, जो बाद में पीके ने भी किया। घोष के ट्वीट के करीब तीन घंटे बाद ही पीके ने वह ट्वीट मारा, जिसने कांग्रेस नेताओं को तिलमिला दिया है। कांग्रेस के संचार प्रमुख रणदीप सुरजेवाला ने तो इसके बाद ममता के खिलाफ मोर्चा ही खोल दिया। उन्होंने कहा कि 'अगस्त में उन्होंने (ममता ने) कहा कि बीजेपी से लड़ने के लिए सबको साथ आना चाहिए। उन्हें आत्ममंथन करने की जरूरत है कि वह एक सलाहकार (प्रशांत किशोर) के कहने पर कांग्रेस से लड़ रही हैं या बीजेपी से। '

पत्रकार ने लिखा था- 'दैवीय जन्मसिद्ध अधिकार'
दरअसल, टीएमसी के चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने बुधवार को जो ट्वीट किया था वह इसक तरह से है- 'कांग्रेस जिस विचार और स्थान का प्रतिनिधित्व करती है, वह मजबूत विपक्ष के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। लेकिन, कांग्रेस का नेतृत्व किसी का 'दैवीय अधिकार' नहीं है, विशेष रूप से एक व्यक्ति का, जबकि पार्टी पिछले 10 वर्षों में 90% से ज्यादा चुनाव हार चुकी हो। विपक्ष का नेतृत्व लोकतांत्रिक तरीके से तय होने दें।' शुक्रवार को पीके से करीब तीन घंटे पहले सागरिका घोष ने ममता बनर्जी की ओर से उठाए गए इसी मसले को लेकर ही एक ट्वीट किया था। उन्होंने लिखा था, 'ममता बनर्जी बिल्कुल सही हैं, न तो संयुक्त है, न प्रगतिशील और ना ही गठबंधन: पुराना यूपीए खत्म हो चुका है। भारत के विपक्ष के लिए यह एक नया सांचा खोजने का समय है, जहां किसी भी पार्टी / व्यक्ति के पास नेतृत्व करने का 'दैवीय जन्मसिद्ध अधिकार' नहीं है।'

क्या प्रशांत किशोर ने 'दैवीय अधिकार' वाला आइडिया चुराया ?
शुक्रवार को घोष ने एक और ट्वीट किया है, जिसमें उन्होंने गुरुवार वाला अपना और प्रशांत किशोर दोनों का ट्वीट भी लगाया है और यह बताने की कोशिश की है कि पीके ने 'दैवीय अधिकार' वाला आइडिया उन्हीं से लिया है। उन्होंने लिखा है, 'क्या मेरा ट्वीट उधार लेना चुनावी रणनीतिकारों का "दैवीय अधिकार" है? मैंने "दैवीय जन्मसिद्ध अधिकार" वाला ट्वीट कल सुबह 9.54 पर किया और प्रशांत किशोर ने दोपहर बाद 12.46 पर। कोई सवाल नहीं है कि पीके ने "दैवीय अधिकार" मुझसे उधार लिया। क्या मैं सही हूं? .......'

ममता और उनके सलाहकार के तंज से तिलमिलाई है कांग्रेस
बता दें कि पहले ममता बनर्जी ने बिना नाम लिए राहुल गांधी की राजनीति की गंभीरता पर यह कहते हुए सवाल उठाया कि जो आधे समय विदेशों में रहेगा, वह सियासत क्या करेगा। फिर उन्होंने यूपीए के अस्तित्व को ही नकार दिया कि वह है ही नहीं। इसपर टीएमसी नेता डेरेक ओ ब्रायन ने सफाई दी कि यूपीए तो सिर्फ सरकार चलाने के लिए 2004 से 2014 तक ही था। उसके बाद दूसरा गठबंधन सत्ता में आ गया। इसलिए ममता ने कुछ भी गलत नहीं कहा। लेकिन, उसके बाद पीके ने जो कांग्रेस आलाकमान की क्षमता पर सीधा हमला किया, उसने कांग्रेस और टीएमसी को फिलहाल के लिए राजनीतिक तौर पर बहुत दूर कर दिया है।












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