मुंबई हमले में जिंदा बची Devika Rotawan अब Tahawwur Rana पर क्या बोली? इसी ने दिलाई थी कसाब को फांसी
Devika Rotawan on Tahawwur Rana: 26/11 मुंबई आतंकी हमले के जख्म आज 10 अप्रेल 2025 को उस वक्त फिर ताजा हो रहे हैं जब आरोपी तहव्वुर हुसैन राणा को भारत लाया जा रहा है। राणा के भारत आने पर उस लड़की देविका रोटावन का भी खून खौल उठा है, जो मुंबई आतंकी हमले में जिंदा बची थी और फिर उसी की गवाही पर आतंकी अजमल कसाब को 21 नवंबर 2012 को पुणे की यरवदा जेल में फांसी की सजा मिली थी।
न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में देविका रोटावन ने कहा कि आखिरी तहव्वुर हुसैन राणा को भारत लाया जा रहा है। यह बात सुनकर बहुत खुशी हुई। आतंकवाद के खिलाफ भारत की यह सबसे बड़ी जीत है। इसके लिए भारत व अमेरिकी सरकार को धन्यवाद। तहव्वुर हुसैन राणा मामले में यूएस सरकार ने भारत को काफी सपोर्ट किया है।

Tahawwur Rana After Extradition to India: तहव्वुर हुसैन राणा से निकलवाई जाए सूचनाएं
देविका रोटावन ने कहा कि मुंबई आंतकी हमले के आरोपी तहव्वुर हुसैन राणा को लेकर उसकी भारत सरकार से मांग है कि उसे यहां लाने के बाद जल्द से जल्द उससे आतंकवाद के खिलाफ गुप्त सूचनाएं निकलवाई जाए। ताकि पता चल सके कि पाकिस्तान में बैठकर मुंबई हमले की साजिश कैसे रची गई?
तहव्वुर हुसैन राणा को भी कसाब की तरह फांसी हो
इंटरव्यू में देविका आगे कहती हैं कि वे आतंकवाद के खिलाफ बड़ा कदम उठाने पर पीएम नरेंद्र मोदी को धन्यवाद बोलना चाहेंगी। साथ ही यह भी मांग करती है कि तहव्वुर हुसैन राणा की तरह पाकिस्तान में बैठे मुंबई हमलों के अन्य आरोपियों को भी भारत लाकर सजा दिलाई जाए। राणा को कसाब की तरह फांसी की सजा हो।
26/11 Mumbai Terrorist Attack में देविका के साथ क्या हुआ?
देविका कहती हैं कि ''26 नवंबर 2008 की रात मैं कभी नहीं भूल पाई और ना कभी भूल पाऊंगी। उस रात मैं अपने माता-पिता व भाई के साथ मुंबई से ट्रेन में सवार होकर पुणे जाने वाली थी। मैंने रेलवे स्टेशन पर एक आतंकवादी को अंधाधुंध फायरिंग करते देखा था। मेरे भी पैर में एक गोली लगी थी। मुझे बाद में पता चला कि मुंबई में 10 आतंकी घुस आए थे। वो भी उन्हीं में से एक था।''
''मैं उस वक्त छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनल (CST) पर थी। मेरी आंखों के सामने लोग मर रहे थे। कई लोगों की लाशें जमीन पर थीं। जान बचाने के लिए इधर-उधर भाग रहे थे। भागते-भागते गिर रहे थे। चारों तरफ अफरा-तफरी मची हुई थी। किसी के पैर तो किसी के सिर पर गोली लग रही थी। मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था। उसी दौरान एक गोली मेरे राइट पैर में आकर लगी।''
देविका कहती है कि ''पैर में गोली लगने के बाद मैं घायल हो चुकी थीं। मुझे तुरंत अस्पताल ले जाया गया। वहां बड़ी संख्या में घायल लोगों को लाया गया था। यहां से मुझे दूसरे अस्पताल में रैफर किया गया। पैर का छह बार ऑपरेशन हुआ। इसके बाद मुंबई आतंकी हमले में गवाही के लिए कोर्ट रूम बुलाया गया। उस वक्त मेरी उम्र महज 9 साल थी।''
देविका ने की थी कसाब की पहचान
इंटरव्यू में देविका आगे कहा कि 10 जून 2009 को उसने और पापा ने कोर्ट में आतंकी अजमल कसाब की पहचान की थी। कसाब और अब्बू इस्माइल दोनों आतंकियों को मुंबई पर हमले के दौरान देखा था। अब भारत सरकार से मांग है कि कसाब को जितने टाइम तक जेल में रखा गया था, उतना टाइम तक राणा को नहीं रखा जाए। उसे जल्द से जल्द फांसी की सजा दिलाई जाए। शेष मास्टर माइंड को भी भारत लाया जाए।
Who is Tahawwur Hussain Rana: तहव्वुर हुसैन राणा कौन है? मुंबई आतंकी हमले की इसकी क्या भूमिका?
- तहव्वुर हुसैन राणा एक पाकिस्तानी मूल के कनाडाई नागरिक है, जो 2008 के मुंबई आतंकी हमलों में अपनी भूमिका के लिए जाना जाता है। पाकिस्तान सेना में चिकित्सक के रूप में कार्य करता था। बाद में कनाडा जाकर बस गया। वहां एक इमिग्रेशन सेवा एजेंसी खोली।
- लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादी डेविड हेडली ने मुंबई आतंकी हमलों के लिए कई बार भारत आकर रेकी की थी। तहव्वुर हुसैन राणा ने उसे अपनी इमिग्रेशन सेवा एजेंसी से मदद उपलब्ध करवाई थी। अब अमेरिका से प्रत्यर्पित किए गए 26/11 मुंबई आतंकी हमले के आरोपी तहव्वुर हुसैन राणा को स्पेशल विमान के जरिए 10 अप्रेल 2025 को भारत लाया जा रहा है।
- भारत में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा औपचारिक रूप से तहव्वुर हुसैन राणा गिरफ्तार करेगी। फिर उससे पूछताछ होगी। राणा को दिल्ली की तिहाड़ जेल में रखा जाएगा, जहां उसकी सुरक्षा को लेकर विशेष इंतजाम किए गए हैं। इससे पहले राणा को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में पेश करके एनआईए उसकी कस्टडी की मांग करेगी।
Who is Devika Rotawan: देविका रोटावन कौन है?
देविका रोतावन 26 नवंबर 2008 को मुंबई में हुए आतंकवादी हमलों की जीवित गवाह और पीड़िता हैं। वह मात्र नौ वर्ष की थीं जब छत्रपति शिवाजी टर्मिनस (CST) रेलवे स्टेशन पर हुए हमले में उनके पैर में गोली लगी थी। इस हमले के दौरान, उन्होंने अजमल कसाब को देखा और बाद में अदालत में उसकी पहचान की, जिससे वह मुकदमे में सबसे कम उम्र की गवाह बनीं।
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा: देविका का जन्म मुंबई, महाराष्ट्र में हुआ था। उनकी माता का निधन 2006 में हो गया, जिसके बाद उनके पिता, नटवरलाल रोतावन, सूखे मेवे बेचने का काम करते थे। हमले के बाद, देविका और उनका परिवार राजस्थान चले गए, लेकिन मुकदमे के लिए मुंबई लौट आए और 2009 में बांद्रा की एक झुग्गी में रहने लगे।
हमले के बाद, जब देविका ने स्कूल जाना शुरू किया, तो उन्हें सहपाठियों से उपहास और बहिष्कार का सामना करना पड़ा। उन्होंने 11 वर्ष की आयु में स्कूल में प्रवेश लिया, हालांकि सुरक्षा चिंताओं के कारण उनकी नामांकन में कठिनाइयाँ आईं। उन्होंने IES न्यू इंग्लिश हाई स्कूल, बांद्रा ईस्ट से पढ़ाई की, सिद्धार्थ कॉलेज, फोर्ट से उच्च माध्यमिक शिक्षा पूर्ण की, और 2023 में चेतना कॉलेज से कला में स्नातक की डिग्री प्राप्त की।
2008 मुंबई हमले: 26 नवंबर 2008 को, देविका अपने पिता और भाई के साथ ट्रेन का इंतजार कर रही थीं, जब आतंकवादी हमला हुआ और उन्हें पैर में गोली लगी। हमले के बाद, उन्होंने छह सर्जरी करवाईं और 45 दिन अस्पताल में बिताए। इलाज के दौरान, उन्होंने अपने दाहिने पैर का उपयोग खो दिया। देविका ने 10 जून 2009 को मुकदमे में गवाही दी और अजमल कसाब की पहचान की, जिससे वह सबसे कम उम्र की गवाह बनीं। उनके पिता ने भी गवाही दी।
मुंबई आतंकी हमले के बाद का जीवन: 26/11 मुंबई हमले के बाद, उनके परिवार को सरकार और विभिन्न संगठनों से मुआवजा और वित्तीय सहायता मिली, जिसे उन्होंने अपने भाई जयेश के चिकित्सा देखभाल पर खर्च किया। देविका ने कहा है कि बाद में प्राप्त मुआवजा उनकी अपनी चिकित्सा उपचार पर खर्च हुआ।
सम्मान और पुरस्कार: 2009 में, उन्हें एक गैर-सरकारी संगठन से पुरस्कार मिला। उन्होंने राजस्थान में बनवारीलाल जोशी से नागरिक रत्न पुरस्कार भी प्राप्त किया। 2014 में, उन्हें महिला अचीवर्स अवार्ड, राजस्थान गौरव अवार्ड, श्री गंगानगर राजस्थान अवार्ड और बारामती अवार्ड से सम्मानित किया गया। अक्टूबर 2022 में, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने 26/11 मुंबई हमले की पीड़िता देविका रोतावन से मुलाकात की।
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